गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए नीतीश ने की पदयात्रा

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पटना । चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के मौके पर आज मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया गांव से मोतिहारी तक 9 किमी की पैदल यात्रा की। इस यात्रा में सीएम के साथ उप मुख्यमंत्राी तेजस्वी यादव और शिक्षा मंत्राी अशोक चौधरी भी थे। पदयात्रा सुबह 7.45 बजे शुरू हुई। नीतीश के साथ हजारों लोग साथ चल रहे थे। मोतिहारी पहुंचकर नीतीश कुमार ने गांधी मैदान स्थित गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर सीएम ने कहा कि आज गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पफैलाने की बड़ी जरूरत है। इसके लिए हमने सालभर चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह मनाने का पफैसला किया है। इस दौरान गांधी जी के विचारों को हम गांव-गांव तक ले जाएंगे। आज से 100 साल पहले गांधी जी चंपारण के नीलहे किसानों की तकलीपफ देखने आए थे और तुरकौलिया से मोतिहारी तक पदयात्रा की थी। आज की यह यात्रा उसी की याद में है। आज ही के दिन 18 अप्रैल को सौ साल पहले गांधी जी के सत्याग्रह के सामने अंग्रेजों ने हथियार डाल दिये थे। चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के आयोजन की कड़ी में इस पदयात्रा को शुरू किया गया। सौ साल पूर्व की घटना को यादगार बनाने के लिए इस पदयात्रा का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्राी तेजस्वी यादव के अलावा और भी कई गणमान्य मंत्राी और नेता इस पदयात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्राी ने चंद्रहिया से मोतिहारी तक की यात्रा सुबह आठ बजे शुरू की और साढ़े नौ बजे के आस-पास मोतिहारी के गांधी मैदान पहुंच गये।
सर्वधर्म प्रार्थना का हुआ आयोजन: इससे पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और शिलापट्ट का लोकार्पण किया। कार्यक्रम स्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्राी के साथ सभी लोगों ने सबसे पहले प्रार्थना सभा में भाग लिया। मुख्यमंत्राी ने वहां एक चंपा के पौधे का पौधारोपण किया। मुख्यमंत्राी के साथ यात्रा में भारी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए और उन्होंने पदयात्रा की। हालांकि, बहुत सारे लोगों ने पदयात्रा को पूरा नहीं किया। लेकिन, मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार अंतिम पड़ाव तक पहुंचे। वहां उन्होंने गांधी जी के भजन को सुनकर पदयात्रा का समापन किया। इस दौरान, मुख्यमंत्राी की पदयात्रा को देखते हुए चंद्रहिया से मोतिहारी गांधी मैदान तक सड़क के दोनों तरपफ सुरक्षा कड़ी कर दी गयी थी। गांधी मैदान को किले में तब्दील कर दिया गया था। वहीं, पदयात्रा वाले मार्ग पर वाहनों का परिचालन रोक दिया गया था। कड़ी सुरक्षा के घेरे में एन एच -57 हजारों लोगों के साथ सी एम ने यह यात्रा डेढ घंटे से कुछ अधिक समय में पूरा किया। लगभग नौ किमी की दूरी कैसे पूरी हुई किसी को पता नहीं चला। पूरा रास्ता होर्डिंग और झण्डा बैनरों से पटा हुआ है। हर छोटी दूरी पर लोगों ने पानी का इन्तजाम किया हुआ था। चन्द्रहिया को दुल्हन की तरह सजाया गया है। पदयात्रा में शिक्षा मंत्राी अशोक चौधरी, प्रभारी मंत्राी मदन मोहन झा समेत कई विधायक और पूर्व विधायक मौजूद रहे।
सौ साल पूर्व की घटना का हुआ नाट्य रूपांतरण: मुख्यमंत्राी के मोतिहारी गांधी मैदान पहुंचने के बाद सौ साल पूर्व हुई घटना का नाट्य रूपांतरण किया गया। सौ साल पहले गांधी जी आदेश के उल्लंघन के आरोप में एसडीओ कोर्ट में पेश हुए थे। वहां, दिये गये उनके बयान के बाद अंग्रेजी हुकूमत के पांव उखड़ गये थे। एसडीओ कोर्ट में पेशी व गांधी जी द्वारा दिये गये बयान की यादें इस कार्यक्रम के माध्यम से ताजा हुई. मुख्यमंत्राी भी सत्याग्रह शताब्दी को लेकर जिलावासियों को संबोधित किया और कहा कि गांधी जी के विचारों को आम लोगों तक और आम जनों तक पहुंचाने के लिए ही इस पदयात्रा का आयोजन किया गया है।

बिहार के चंद्रहिया से मोतिहारी तक आयोजित स्मृति यात्रा में भाग लेते हुये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं अन्य।

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