संजय दत्त कोर्ट पहुंचे, गिरफ्तारी का वारंट रद्द

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, मुंबई: बॉलिवुड अभिनेता संजय दत्त चेक बाउंस मामले में दो दिन पहले अपने खिलाफ जारी हुए गिरफ्तारी वारंट पर सोमवार को अंधेरी ईस्ट स्थित एक कोर्ट में पेश हुए। उनकी हाजिरी के बाद कोर्ट ने वारंट को रद्द कर दिया। संजय अपने वकीलों के साथ अंधेरी कोर्ट की मजिस्ट्रेट छाया पाटील के समक्ष यह बताने के लिए पेश हुए कि वह पूर्व की सुनवाई में क्यों नहीं पहुंच सके थे।

संजय हमेशा से खबरों में रहते हैं। पिछले साल ही उन्हें 1993 में हुए मुंबई बम ब्लास्ट मामले में लंबी गिरफ्तारी के बाद रिहा किया गया था। उन पर गैरकानूनी ढंग से हथियार रखने का आरोप था।

कोर्ट ने संजय के आवेदन को स्वीकार करते हुए उनकी गिरफ्तारी का वारंट रद्द कर दिया। सुनवाई के फौरन बाद संजय मीडिया को नजरअंदाज करते हुए अदालत परिसर से निकल गए।

इससे पहले संजय को 7 फरवरी को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन वह में पेश नहीं हुए। इसके बाद 15 अप्रैल को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया। वह इस सुनवाई में भी नहीं पहुंचे। संजय के एक प्रवक्ता ने शनिवार रात को दावा किया कि कानूनी टीम के साथ संवाद की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। प्रवक्ता ने कहा कि ‘हम माननीय न्यायालय द्वारा हमारी पेशी को लेकर दिखाई गई तत्परता का सम्मान करते हैं। हम स्थिति में सुधार के लिए जल्द ही कोई उपाय करेंगे।’

संजय पेश हुए:

संजय मजिस्ट्रेट पाटील की अदालत में पेश हुए और पूरी सुनवाई के दौरान बैठे रहे। हालांकि उनके वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा कि वारंट निरस्त करने के लिए अभिनेता की मौजूदगी जरूरी नहीं है। इसपर कोर्ट ने शनिवार को संजय के खिलाफ जारी वारंट निरस्त करने की उनके वकील की अर्जी स्वीकार कर ली।

क्या है मामला:

फिल्म निर्माता नूरानी ने संजय के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करते हुए एक निजी शिकायत दाखिल की थी और आरोप लगाया था कि संजय दत्त ने 2002 में उनकी फिल्म ‘जान की बाजी’ बीच में ही छोड़ दी थी, जिसे वह बना रहे थे। नूरानी ने कहा कि संजय दत्त ने उन्हें दिया गया पैसा भी नहीं लौटाया। फिल्म निर्माता ने इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स असोसिएशन (आईएमपीपीए) का दरवाजा खटखटाया, जिसने संजय को पैसा वापस करने का निर्देश दिया था। बाद में नूरानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट से आईएमपीपीए के आदेश के क्रियान्वयन के लिए गुहार लगाई। निर्माता का आरोप है कि अंडरवर्ल्ड के कुछ लोगों ने उन्हें मामले को वापस लेने की धमकी दी थी।

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