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Tuesday, September 25, 2018
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बिगड़ सकता है बीजेपी का खेल, इन 6 पार्टियों के हाथों में है राष्ट्रपति चुनाव की चाबी

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नई दिल्ली| भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस साल जुलाई में समाप्त हो रहा है. वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के आधार पर देखें तो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने बीजेपी को राष्ट्रपति चुनाव में वोट शेयर के मामले में कांग्रेस से आगे पहुंचा दिया है. इससे एक बात तो साफ है कि अगला राष्ट्रपति बीजेपी की पसंद का ही होगा.

इकोनॉमिक टाइम्स के एक आकलन के मुताबिक, एनडीए (23 पार्टियों के सांसद और राज्यों के सदनों में जनप्रतिनिधि सहित) के पास राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित इलेक्टोरल कॉलेज में तकरीबन 48.64 फीसदी वोट हैं वहीं इसके विपरीत राज्य या केंद्र में राजनीतिक समीकरणों के आधार पर कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्ष के साथ जाने वाली 23 राजनीतिक पार्टियों का वोट शेयर 35.47 फीसदी बैठता है.

हाल में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी को मिली जीत से राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े इलेक्टोरेल कॉलेज में 5.2 फीसदी वोटों का कुल फायदा हुआ. पंजाब और गोवा में बीजेपी गठबंधन के विधायकों की संख्या में कमी जरूर आई लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ी है.

गौर करें तो राज्य की क्षेत्रीय पार्टियां राजनीतिक समीकरणों की वजह से बीजेपी और कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रही हैं. इनमें से छह राजनीतिक पार्टियों के एक ग्रुप के पास 13 फीसदी से भी ज्यादा वोट शेयर हैं. ये हैं तमिलनाडु की एआईएडीएमके, बीजेडी (ओडिशा), वाईएसआरसीपी (आंध्र प्रदेश), आम आदमी पार्टी (दिल्ली और पंजाब) और आईएनएलडी (हरियाणा). इन राजनीतिक पार्टियों का रुख राष्ट्रपति चुनाव को दिलचस्प बना सकता है.

यदि कांग्रेस इन छह पार्टियों को अपने पाले में करने में सफल होती है तो सत्ताधारी ग्रुप और विपक्ष के बीच मुकाबला कांटे का हो सकता है. कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष का 35.47 वोट और इन छह पार्टियों का 13 फीसदी वोट शेयर मिलाकर एनडीए के वोट शेयर के तकरीबन बराबर हो जाएगा.

इलेक्ट्रोरल कॉलेज

राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद वोट देते हैं और इनके अलावा विधानसभाओं के विधायक भी वोट देते हैं. इन सांसदों और विधायकों को मिलाकर ही राष्ट्रपति पद के चुनाव का इलेक्ट्रोरल कॉलेज बनता है. इसमें कुल 784 सांसद और 4114 विधायक हैं. इस कॉलेज में वोटरों के वोट की वैल्यू एक नियम के अनुसार अलग-अलग होती है.

इसके अनुसार, हर सांसद के वोट की वैल्यू 708 है जबकि विधायक के वोट की वैल्यू संबंधित राज्य की विधानसभा की सदस्य संख्या और उस राज्य की आबादी पर आधारित होती है. इस तरह यूपी के हर विधायक के वोट की वैल्यू सबसे ज्यादा 208 है, वहीं सिक्किम के हर विधायक के वोट की वैल्यू सबसे कम सात है. राष्ट्रपति पद के लिए 10,98,882 वोटों की वैल्यू होती है। इसमें चुनाव जीतने के लिए 5.49 लाख वोट चाहिए. बीजेपी+ के पास 4.57 लाख वोट हैं.

राष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मजबूत गठजोड़ बनाने की तैयारी में लग गया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए व्यापक गठबंधन बनाने के लिए विपक्षी नेताओं से मुलाकत कर सक्रिय हो गई हैं. तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने भी हाल में बीजेडी चीफ नवीन पटनायक से मुलाकात की थी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात हुई.

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी भी सोनिया गांधी से मिले. माना जा रहा है कि उन्होंने समान राय रखने वाली विपक्षी पार्टियों की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार खड़ा करने की संभावनाओं पर चर्चा की. येचुरी सोनिया से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात कर चुके हैं.

सीपीएम ने इस मुद्दे पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से भी अनौपचारिक चर्चा की है. उन्होंने बताया कि विपक्षी पार्टियां जल्द ही मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा कर सकती हैं.

ये राजनीति बैठकें इस बात का संकेत हैं कि नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सरकार और विपक्ष, दोनों तरफ से पर्दे के पीछे से काम चल रहा है. हालांकि, जीत का पलड़ा बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए के पक्ष में भारी नजर आ रहा है.

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