बिहार में जीएसटी बिल पर लगी मुहर

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पटना। बिहार विधानसभा में आज जीएसटी बिल को चर्चा के बाद सर्व सम्मति से पारित कर दिया गया। जीएसटी को बिहार विधानमंडल से पारित करने के लिए आज विशेष सत्रा बुलाया गया, जिसमें विधानमंडल के दोनों सदनों में इस बिल को मंजूरी प्रदान की गई। विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि बिहार माल और सेवा कर विधेयक 2017 को स्वीकृत किया गया। इससे पूर्व विधानसभा में विरोधी दल के नेता डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि जीएसटी बिल के पारित होने से वस्तुओं की कीमतों में कमी आयेगी। विशेष सत्रा में सत्ता पक्ष के सभी मंत्रियों के अलावा विपक्ष के सभी सदस्य और मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्राी तेजस्वी मौजूद थे। चर्चा के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सदानंद सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी हमेशा सकारात्मक भूमिका के लिए जानी जाती है। हम हमेशा सकारात्मक बात ही करते हैं। इसलिए हम इस विधेयक का समर्थन करते हैं। वहीं, वाणिज्य कर और ऊर्जा मंत्राी विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सच अपनी जगह कायम रहता है। यह सच है कि इस बिल का मुख्यमंत्राी रहते वक्त नरेंद्र मोदी ने विरोध किया था, लेकिन हम अपने मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार पर गर्व करते हैं कि देशहित में अकेले यह व्यक्ति सही बातों का समर्थन करते हैं। हम 82 साल बाद आजाद भारत में एक नया कानून ला रहे हैं, यह एक ऐतिहासिक क्षण है। मंत्राी ने कहा कि इसमें केवल एक दल को क्रेडिट देना ठीक नहीं है। मैं सभी का आभार प्रकट करता हूं। यह एक नयी व्यवस्था आयी है। निश्चित तौर से देश को पफायदा होगा, तो बिहार का भी पफायदा होगा। इस कानून से देश के छोटे व्यापारियों और गांव के लोगों को कापफी सहूलियत होगी। यह एक नयी शुरुआत है। इसलिए इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाये। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को पारित होने की घोषणा की। उसके अलावा विधानसभा में बिहार कराधान विधि संशोधन विधेयक, बिहार राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, पटना विवि संशोधन विधेयक और भू-अर्जन पुनर्वास और पुन पुर्नव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार संशोधन विधेयक भी सर्व सम्मति से पारित किया गया। एक विधेयक पर जनमत जानने का प्रस्ताव खारिज: पहले दो विधेयकों को प्रभारी मंत्राी विजेंद्र यादव ने सदन के पटल पर रखा, जबकि बाकी के दो को शिक्षा मंत्राी अशोक चौधरी ने सदन में रखा। सभी विधेयकों को पूर्ण सहमति से पारित किया गया। हालांकि राज्य विवि संशोधन विधेयक को जनमत जानने का प्रस्ताव खारिज हो गया।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय ;संशोधनद्ध विधेयक 2017 के जरिए राज्य में विश्वविद्यालय सेवा आयोग गठित करने का रास्ता सापफ होगा जबकि पटना विवि ;संशोधनद्ध विधेयक 2017 के जरिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव तथा कॉलेज के प्राचार्य पद को शैक्षणिक पद का दर्जा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय सेवा आयोग विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय तथा कॉलेजों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग की बजाय विश्वविद्यालय सेवा आयोग के जरिए होगी। विधेयक के जरिए सरकार 2007 में भंग किए गए विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पिफर से जीवित कर रही है। आयोग सात सदस्यीय होगा, जिसमें एक अध्यक्ष तथा छह सदस्य होंगे। आयोग के अध्यक्ष पूर्व कुलपति या मुख्य सचिव रैंक के अधिकारी होंगे। छह सदस्यों में से तीन प्रोपफेसर व तीन प्रशासनिक अधिकारी होंगे। अधिकारी संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के संवर्ग के होंगे। अध्यक्ष और सदस्य का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

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