नाले की सफाई के दौरान दम घुटने से दो सफाईकर्मियों की मौत

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पटना.नाले की सफाई के दौरान दम घुटने से बुधवार की सुबह नगर निगम के दो सफाईकर्मियों दीपू चौधरी व जितेंद्र पासवान की मौत हो गई, जबकि दो बेहोश हो गए। तीन साल से सफाई न होने और बंद होने की वजह से नाले में जहरीली गैस कार्बन मोनाे ऑक्साइड भरी थी। यही उनकी मौत का कारण बनी। यह घटना आयकर गोलंबर के पास हुई। यह नाला 15 फीट गहरा है। सुबह 8 बजे से नाले की सफाई के लिए छह मजदूरों की टीम बनी थी। इसमें दीपू चौधरी, जितेंद्र पासवान, महेंद्र आदि शामिल थे। पहले दीपू नाले में घुसा। नाले में घुसने के बाद सफाईकर्मी भीतर से आवाज लगाता रहता है।लगभग 5 मिनट के बाद बाहर मौजूद उसके साथियों ने दीपू को आवाज लगाई, तो उसने जवाबी आवाज नहीं दी। दीपू के साथ किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए जितेंद्र फौरन नाले में उतरा। इसके बाद जब बाहर से उसे आवाज लगाई गई, तो उसने भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद तीसरा कर्मी महेंद्र कमर में रस्सी लगाकर नाले में घुसा। वह भी थोड़ी देर में बेहोश होने लगा तो उसे रस्सी खींचकर बाहर निकला गया। उसके बाद फायरकर्मी पवन ऑक्सीजन का सिलेंडर बांधकर घुसा। पाइप छोटा पड़ गया और वह भी बेहोश हो गया। उसे भी फौरन निकाला गया। इधर, एक घंटा तक नाले में अचेत पड़े रहने के बाद दीपू और जितेंद्र को बाहर निकाला गया। उनका नब्ज चल रहा था। फौरन दोनों को पहले न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए वहां से पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। बता दें कि आयकर गोलंबर पर जिस चैंबर में हादसा हुआ, वह वार्ड 24 से 25 को कनेक्ट करता है। इस नाले की लंबाई लगभग दो किलोमीटर है। कुल 40 मैनहोल हैं। यह चकारम से किदवईपुरी और पीएनटी कॉलोनी होते हुए मंदिरी नाले में मिलता है। इसकी सफाई एक हफ्ते से चल रही थी। सफाई मजदूर धनराज दास ने बताया- दीपू और जितेंद्र के साथ सफाई में लगा था। 15 फीट गहरे इस नाले की सफाई के लिए चैंबर को खोलने के एक घंटा बाद ही मजदूरों को अंदर भेज दिया गया। जबकि, छह घंटे बाद ही भेजने का नियम है। मजदूरों के बेहोश होने के बाद वार्ड 25 के सफाई निरीक्षक उदय पासवान ने फायर ब्रिगेड को फोन किया। लेकिन, दमकल के पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। मजदूरों का कहना है कि सफाई कराने के दौरान कई बार तो मजदूरों को डांट-फटकार कर भी अंदर भेजा जाता है। नौकरी से हटाए जाने के डर से लोग परेशानी उठाने को तैयार हो जाते हैं।
ये हुई लापरवाही
 – मास्क, वर्दी और सेफ्टी बूट किसी मजदूर के पास नहीं था।
– मास्क जहरीली गैस से बचाता है। इसमें ऑक्सीजन का छोटा सिलेंडर भी होता है। अधिक गैस उत्सर्जन की स्थिति में मजदूर आसानी से बाहर निकल सकता है।
– सफाईकर्मियों की वर्दी विशेष प्रकार की होती है। इसे पहनने पर जहरीली गैस और गंदगी का असर शरीर पर कम होता है।
– सेफ्टी बूट की लंबाई घुटने तक होती है। इसे पहनने से कीचड़ में चलना भी आसान हो जाता है।
– हर अंचल में दो सक्शन मशीन है। लेकिन, इस नाले के हिसाब से उसका साइज बेहद छोटा है। उसे छह फीट गहराई तक के नालों की सफाई ही की जा सकती है।

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