डूबे लोन की रिकवरी होगी आसान, NPA ऑर्डिनेंस को प्रेसिडेंट की मंजूरी

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ई दिल्ली.  किंग रेग्युलेशन एक्‍ट में बदलाव के लिए लाए गए ऑर्डिनेंस को प्रेसिडेंट ने मंजूरी दे दी है। इसके जरिए एक्‍ट में NPA (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) रिकवरी के लिए जरूरी बदलावकिए जा सकेंगे। फाइनेंस सेक्रेटरी अशोक लवासा के मुताबिक, इस बदलाव के बाद आरबीआई को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) मुद्दे के हल के लिए ज्‍यादा अधिकार मिलेंगे। इससे बैंकों के लिए बैड लोन की रिकवरी पहले से ज्‍यादा आसान हो जाएगी। इसके जरिए आरबीआई को यह अधिकार मिलेगा कि एनपीए इश्यू पर समय-समय पर बैंकों को इंस्ट्रक्शन दिए जा सकें. पीएसयू बैंकों के बैड लोन यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स बड़ी प्रॉब्लम बन गए हैं। बैंकों का एनपीए 6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इससे निपटने के लिए बैंकिंगरेग्युलेशन एक्‍ट में बदलाव को जरूरी माना जा रहा था, लेकिन एक्‍ट में बदलाव के लिए पहले अध्‍यादेश लाना जरूरी था। पिछले दिनों कैबिनेट की मीटिंग में इस ऑर्डिनेंस कोपेश किया गया। इसके बाद इसे राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। सरकार ने शुक्रवार को बैंकिंग रेग्‍युलेशन (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2017 नोटिफाई कर दिया। इस ऑर्डिनेंस के जरिएबैंकिंग रेग्युलेशन एक्‍ट के सेक्‍शन 35ए में बदलाव किए जाने हैं।

फाइनेंस सेक्रेटरी अशोक लवासा के मुताबिक, बैंकिंग रेग्युलेशन एक्‍ट में बदलाव से एनपीए की प्रॉब्लम से निपटना आसान हो जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इससे एनपीए घटेगा, लेकिन कितना घटेगा, इसके बारे में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल, अब तक के सर्वे से यह कहा जा सकता है कि इससे एनपीए से निपटने के लिए सिस्‍टम पहले से ज्‍यादा असरदार हो जाएगा। – बैंकिंग रेग्युलेशन एक्‍ट 1949 के सेक्‍शन 35ए में ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधिकार शामिल हैं।

पब्लिक सेक्टर बैंक के एक सीनियर अॉफिशियल के मुताबिक, एनपीए की प्रॉब्लम से निपटने के लिए हेयरकट (जितना अमाउंट कर्जदार देने में सक्षम हो, उतना ही एक्सेप्ट कर लिया जाए जैसे प्राेविजन किए जा सकते हैं। हेयरकट का सीधा मतलब है कि बैंकों को लोन वसूली में समझौता करना पड़ेगा। डिफॉल्टर जो कर्ज लौटा सकता है, बैंकों को उसे लेकर अपनी लोन बुक को क्लियर करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो उसका सीधा असर प्रॉफिट पर पड़ेगा।

वन टाइम सेटलमेंट का भी मौका

एनपीए पॉलिसी में इसके अलावा बैंकों को वनटाइम सेटलमेंट का भी ऑप्शन मिल सकता है। इसमें बैंक डिफॉल्टर से एक बार में कर्ज वसूलने का ऑप्शन मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि एनपीए पॉलिसी के जरिए देश के टॉप-50 डिफॉल्टर से ज्यादा से ज्यादा कर्ज वसूला जा सके।

सीडीआर (कॉरपोरेट डेट रीस्ट्रक्चरिंग) सेल की रिपोर्ट के  मुताबिक 31 दिसंबर 2016 तक कुल 655 केस पहुंच चुके हैं। कुल 4.74 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। इनमें से 168 केस अभी लाइव हैं, इनमें कुल कर्ज की रकम 2.07 लाख करोड़ रुपए है।

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