उत्तर कोरिया का आरोप: CIA ने रची किम जोंग-उन को मारने की साजिश

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प्योंगयांग
उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों ने उसके तानाशाह शासक किम जोंग-उन की हत्या की साजिश तैयार की। प्योंगयांग ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की CIA और दक्षिण कोरिया की इंटेलिजेंस सर्विस (IS) ने साथ मिलकर किम जोंग को मारने का प्लान बनाया। उसका कहना है कि दोनों एजेंसियां एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बायोकेमिकल हथियार से अटैक कर किम जोंग को मारना चाहती थीं। स्टेट मीडिया के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, ‘CIA और IS ने एक समूह को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हें चुपचाप उत्तर कोरिया की सीमा के अंदर भेजा। इस ग्रुप का मकसद हमारे सर्वोच्च नेतृत्व किम जोंग-उन की हत्या करना था।’ मंत्रालय का आरोप है कि जून 2014 में रूस में काम कर रहे उत्तर कोरिया के एक नागरिक को भी इस साजिश में शामिल किया गया। उसे इस काम के बदले काफी पैसे दिए गए और साथ ही, उसका ब्रेनवॉश भी किया गया। मंत्रालय का कहना है कि दोनों खुफिया एजेंसियों ने इस शख्स से कई बार संपर्क किया और उसे पैसे भी दिए। उसका काम रूस से लौटने के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान किम जोंग की हत्या करना था। आरोप है कि इस हत्या में बायोकेमिकल हथियारों का इस्तेमाल करने की योजना थी।मंत्रालय का दावा है कि जून 2014 के बाद CIA और IS ने कई बार इस शख्स से संपर्क किया और आखिरकार पिछले महीने उसे यह संदेश दिया गया कि हत्या में किस बायोकेमिकल हथियार का इस्तेमाल करना है, इसका फैसला CIA ने किया है। साथ ही, यह हथियार उसके पास पहुंचाने की जिम्मेदारी भी CIA की ही होगी। मंत्रालय ने हालांकि अपने बयान में इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उत्तर कोरिया को इस कथित साजिश की भनक कब और कैसे लगी। साथ ही, उत्तर कोरिया के जिस नागरिक पर इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, उसका पूरा नाम भी इस बयान में नहीं बताया गया है। बयान में केवल उसके उपनाम- किम का ही जिक्र है। इस पूरे मामले में किसी और को भी गिरफ्तार किया गया है या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है।मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि इस साजिश के जवाब में उसने भी एक हमले की तैयारी की है। प्योंगयांग के मुताबिक, पूरे देश के अंदर तत्काल कोरियन शैली में एक आतंकवाद-निरोधी ऑपरेशन चलाया जाएगा। इसका मकसद अमेरिकी साम्राज्यवाद के खुफिया संगठन और उसके मोहरों का खात्मा करना है। सोल स्थित अमेरिकी दूतावास और दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने इन आरोपों पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं की है।

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