तीन तलाक पर सुनवाई शुरू, CJI बोले- अगर यह धर्म का हिस्सा तो नहीं देंगे दखल

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सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को पांच जजों के संवैधनिक बेंच ने तीन तलाक पर सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता में बेंच ने साफ कहा कि वह सिर्फ तीन तलाक पर ही सुनवाई करेगी, बहु विवाह पर कोई बात नहीं होगी लेकिन हलाला पर सुनवाई की जा सकती है। मामले में चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या तीन तलाक धर्म का हिस्सा है, अगर ऐसा है तो इसमें दखल नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट में कुल सात याचिकाएं सुनवाई के लिए लगी हैं, जिनमें पांच पीड़ित महिलाओं की ओर से हैं। इस मामले की शुरुआत कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के बराबरी के हक को देखते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए की थी। बाद में पीड़ित महिलाओं ने भी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह को चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक विचार के बिंदु तय नहीं किए हैं। हालांकि शुरुआत में ही कोर्ट ने साफ कर दिया था कि वह संवैधानिक दायरे में कानूनी मुद्दे पर विचार करेगा। किसी की व्यक्तिगत याचिकाओं पर विचार नहीं होगा। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षकारों को लिखित दलीलें दाखिल करने के छूट देते हुए गर्मी की छुट्टियों में 11 मई से नियमित सुनवाई करने का फैसला लिया था।

विरोध में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट को दिए लिखित जवाब में सुनवाई का विरोध किया है। बोर्ड ने कहा है कि यह पर्सनल लॉ से जुड़ा मुद्दा है और कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं कर सकता। पर्सनल लॉ कुरान और हदीस की रोशनी में बना है। सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ को दोबारा नहीं लिखा जा सकता।

केंद्र ने कहा, महिलाओं से भेदभाव : केंद्र सरकार ने अपने लिखित जवाब में एक बार में तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के साथ लिंग आधारित भेदभाव बताया है। सरकार का कहना है कि भारतीय संविधान किसी तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं देता है।

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