एक्सपर्ट्स ने जारी की चेतावनी- सोमवार को फिर हो सकता साइबर अटैक

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नई दिल्ली (SPK News Desk): सिक्योरिटी रिसर्च से जुड़ी एक संस्था ने रविवार को चेतावनी दी है कि सोमवार को फिर से साइबर अटैक हो सकता है. बीते शुक्रवार को यूरोप समेत दुनिया के 100 देशों में रेनसमवेयर वायरस से साइबर हमला हुआ था. इस हमले से दुनिया भर के लाखों कंप्यूटर ठप हो गए थे. हमले के लिए रेनसमवेयर नाम के वायरस को जिम्मेदार माना जा रहा है.

यूरोपोल के निदेशक रॉब वेनराइट ने कहा कि मौजूदा स्थिति में हमारे सामने बड़ा खतरा है. संख्या बढ़ रही है और मुझे चिंता है कि सोमवार को जब लोग काम पर आएंगे तो कहीं फिर से रैनसमवेअर का हमला न हो जाए जिसने कार फैक्ट्रियों, अस्पतालों, दुकानों और स्कूलों की गतिविधियों पर अचानक ब्रेक लगा कर दुनियाभर में तहलका मचा दिया था.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के सिक्यॉरिटी रिसर्चर ‘मैलवेयर टेक’ ने सोमवार को दूसरा हमला होने की आशंका जताई है. मैलवेयर टेक ने रैनसमवेयर हमले को सीमित करने में मदद की. वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक डोमेन का रजिस्ट्रेशन कराए जाने के बाद मैलवेयर टेक का ‘आकस्मिक हीरो’ के तौर पर स्वागत किया गया. मैलवेयर टेक अपनी पहचान नहीं जाहिर करना चाहता.

माना जा रहा है कि हैकर्स ने अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर इतने बड़े पैमाने पर साइबर अटैक किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी जिस तकनीक का इस्तेमाल करती थी वह इंटरनेट पर लीक हो गई थी और हैकर्स ने उसी तकनीक का इस्तेमाल किया. हैकर्स ने संदेश छोड़ा है कि अगर सबकुछ फिर से पहले जैसा करने है तो इन देशों को बिटकॉन में फिरौती देनी होगी.

यह वायरस स्पेन, फ्रांस और रूस सहित 100 देशों में फैल गया। इंग्लैंड में 48 राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाएं (NHS) ट्रस्ट व स्कॉटलैंड के 13 NHS निकाय इसके शिकार हुए. इससे कुछ अस्पतालों और आपात सेवाएं रद्द करनी पड़ीं. सुरक्षा फर्म कैस्परस्की लैब और अवेस्टसेड ने इस हमले के लिए जिम्मेदार मैलवेयर की पहचान की. दोनों सुरक्षा फर्मों का कहना है कि इस साइबर हमले से रूस सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था.

क्या है रेनसमवेयर वायरस
रेनसमवेयर एक ऐसा वायरस है जो कंप्यूटर्स फ़ाइल को बर्बाद करने की धमकी देता है. धमकी दी जाती है कि यदि अपनी फ़ाइलों को बचाना है तो फीस चुकानी होगी. ये वायरस कंप्यूटर में मौजूद फ़ाइलों और वीडियो को इनक्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिरौती देने के बाद ही खोला जा सकता है.

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