जेठमलानी को नहीं मिली प्रधानमंत्री का नाम घसीटने की इजाजत

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर किए गए मानहानि के केस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम घसीटने की कोशिश की गई, लेकिन कोर्ट ने इससे जुड़े सवालों की इजाजत नहीं दी। केजरीवाल की पैरवी कर रहे सीनियर वकील राम जेठमलानी ने सोमवार को अपना क्रॉस इग्जैमिनेशन जारी रखते हुए जेटली से पूछा कि क्या उन्होंने प्रधानमंत्री से सलाह मशविरा करने के बाद यह केस दायर किया है और क्या वह मोदी को अपने बचाव में गवाह बनाना चाहते हैं? केजरीवाल के खिलाफ 10 करोड़ के मानहानि केस में सोमवार को जब जेठमलानी ने जेटली से पूछा, ‘चूंकि आप कैबिनेट में मंत्री हैं तो आपके लिए सर्वश्रेष्ठ चरित्र गवाह प्रधानमंत्री को ही होना चाहिए। क्या आप उन्हें गवाह के तौर पर पेश करना चाहेंगे?’ जेटली के वकील राजीव नायर और संदीप सेठी द्वारा सवाल का विरोध करने के बाद संयुक्त रजिस्ट्रार ने कहा कि सवाल को अनुमति नहीं दी जाती क्योंकि इस केस में जेटली के गवाहों की सूची पहले से ही रेकॉर्ड में हैं। जेठमलानी ने जब जेटली से यह पूछा कि क्या उन्होंने यह केस दायर करने से पहले पीएम मोदी से सलाह ली थी तो मंत्री के वकील ने इस सवाल की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए। अदालत ने भी इसे स्वीकार किया। संयुक्त रजिस्ट्रार ने कहा कि इस सवाल को अनुमति नहीं दी जाती क्योंकि इसका इस मामले के मुद्दों से कोई संबंध नहीं है। साल 2013 में बीजेपी से छह साल के लिए निष्कासित किये गये जेठमलानी ने कोर्ट में दो घंटे की कार्यवाही के दौरान जेटली से डीडीसीएम में कथित तौर पर 57 करोड़ रुपये के गबन से जुड़े सवाल भी पूछे। जेटली ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि यह पैसा खेल के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च किया गया था और इसका पूरा हिसाब मौजूद है। बता दें कि डीडीसीए में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि जेटली के डीडीसीएम का अध्यक्ष रहने के दौरान कई घोटाले हुए थे। इसी के खिलाफ जेटली ने केजरीवाल पर मानहानि का केस दायर किया था। इस केस में उनके वकील राम जेठमलानी की फीस सरकारी खजाने से दिए जाने को लेकर भी काफी विवाद हुआ था।

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