राजद नेता इलियास हुसैन अलकतरा घोटाले में आरोप मुक्त

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राजद के लिए यह राहत भरी खबर है। पटना की सीबीआइ कोर्ट ने अलकतरा घोटाला के एक मामले में राजद नेता और पूर्व सांसद इलियास हुसैन समेत चार लोगों को आरोप मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने उन्‍हें साक्ष्‍य के अभाव में बरी कर दिया। पटना स्थित सीबीआइ कोर्ट ने बुधवार को बिहार में हुए 39 लाख रुपये के अलकतरा घोटाले के आरोप में इलियास हुसैन सहित चार को बरी कर दिया। इलियास के साथ शोभा सिंहा, रामाधार ठाकुर व मुर्तुजा मोहम्मद को सीबीआइ कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
मामला सुपौल जिले से जुड़ा है जहां 39 लाख रुपये के अलकतरा का घोटाला सामने आया था। इस मामले में पूर्व पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसैन समेत 6 लोग आरोपी बनाये गये थे। वकील ने बताया कि कोर्ट ने पूर्व मंत्री इलियास समेत पांच लोगों को साक्ष्य के अभाव में इस मामले से बरी किया है। कोर्ट के इस फैसले को इलियास के साथ-साथ राजद के लिये भी बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
अलकतरा घोटाले में पहला भी सुनाई गई थी सजा
मालूम हो कि करोड़ों रुपये के अलकतरा घोटाले में मोतिहारी स्थित पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) में करीब 70 लाख रुपये के गबन के एक मामले में दो इंजीनियर सहित तीन लोगों को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक को 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश वशिष्ठ नारायण सिंह ने पथ निर्माण प्रमंडल, मोतिहारी में 1994-1995 के बीच 70 लाख रुपये कीमत के 1438 मिट्रिक टन अलकतरा घोटाले में मोतिहारी के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर देवचंद्र चौधरी, धीरेंद्र नारायण कुंवर और एक ठेकेदार डीएन सिंह को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक को 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर 5 मार्च 1997 को सीबीआइ ने इस मामले की जांच शुरू की थी और 30 जून 2000 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। पश्चिम बंगाल के हल्दिया से मोतिहारी के लिए चले अलकतरे का पदाधिकारियों की मिलीभगत से गबन कर लिया गया था। राज्य में सडक निर्माण में प्रयोग में आने वाले करोड़ों रुपये के अलकतरा के घोटाले हुए थे, जिसके अलग अलग मामले चल रहे हैं।

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