नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट्स में 4 गुना उछाल

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मुंबई
नोटबंदी को छह महीने होने जा रहे हैं, लेकिन इसके नफे-नुकसान पर चर्चा अब भी जारी है। इस बीच सिस्टम में बनी नगदी की किल्लत धीरे-धीरे कम हुई जबकि डिजिटल पेमेंट्स और ट्रांजैक्शंस में तेज उछाल आया। इन बातों का पता भारतीय रिजर्व के पास मौजूद आंकड़ों से चलता है। पिछले साल के मुकाबले डिजिटल पेमेंट का वॉल्यूम तीन गुना बढ़ा है, जबकि वैल्यू में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। इसमें ई-वॉलेट से लेकर क्रेडिट और डेबिट कार्ड और इंटरबैंक फंड ट्रांसफर जैसे माध्यम शामिल हैं।

मर्चेंट लोकेशन पर पॉइंट ऑफ सेल टर्मिनल पर कार्ड के जरिए होने वाले लेन-देन में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे पता चलता है कि भुगतान के लिए एटीएम से पैसे निकालने के बजाय ज्यादा से ज्यादा लोगों के डेबिट कार्ड यूज करने से डिजिटल इकनॉमी को बढ़ावा मिल रहा है। जनवरी में डेबिट कार्ड्स के जरिए 1 अरब बार से ज्यादा लेनदेन हुए, जो पिछले साल इस महीने में 81.7 करोड़ बार हुए थे। एटीएम पर होने वाले लेनदेन की संख्या अब भी लगभग 70 करोड़ के आसपास है लेकिन पॉइंट ऑफ सेल टर्मिनल के जरिए होने वाले लेन-देन में बढ़ोतरी हुई है। इस साल जनवरी में इस तरह के लेनदेन का वॉल्यूम पिछले साल के 10.9 करोड़ के मुकाबले तिगुना होकर 32.8 करोड़ पर पहुंच गया।

देश में रिटेल पॉइंट ऑफ सेल टर्मिनल्स लगाने वाली बड़ी कंपनियों में शुमार होने वाली पाइनलैब्स के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर लोकवीर कपूर ने कहा, ‘देश में फंड एक्सेप्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक विस्तार हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नोटबंदी के बाद दर्ज हुई है। सरकार ने अलग-अलग तरह के कई कदम उठाए हैं, जिनके चलते पॉइंट ऑफ सेल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी होती रहेगी।’500 और 1000 रुपये के नोटों का चलन बंद करने के ऐलान के बाद सरकार ने बैंकों पर पॉइंट ऑफ सेल की संख्या बढ़ाने का दबाव बनाया। इसके चलते तीन महीनों में बैंकों ने 10 लाख अतिरिक्त PoS टर्मिनल लगाए जिससे उनकी कुल संख्या लगभग 25.2 लाख हो गई। सरकार डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के अलावा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और भारत इंटरफेस फॉर मनी (BHIM) के जरिए स्मार्टफोन ट्रांजैक्शस को भी बढ़ावा दे रही है। दोनों में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) नेटवर्क का इस्तेमाल होता है। इस साल मार्च में IMPS के जरिए हुए ट्रांजैक्शन की संख्या 160% बढ़कर 6.7 करोड़ हो गई जो पिछले साल 2.6 करोड़ थी।

NPCI की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च में कुल IMPS ट्रांजैक्शंस में BHIM और UPI का शेयर 64 लाख रही, जो जनवरी में 44 लाख और पिछले साल नोटबंदी से ठीक पहले अक्टूबर में महज एक लाख थी। RBL बैंक में नई पहल की अगुवाई करने वाली एग्जिक्यूटिव सुजाता मोहन के मुताबिक, ‘यूपीआई पर पीयर टु पीयर ट्रांजैक्शंस धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं लेकिन बैंकों के यूपीआई ऐप्स के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या में तेज उछाल होने की संभावना नजर नहीं आ रही है।’

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