प्लेन के टिकट की जगह चेहरे और फिंगरप्रिंट्स का होगा इस्तेमाल

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सोचिए, यात्रा कितनी सुविधाजनक हो जाएगी जब आपको एयरपोर्ट में घुसने या फ्लाइट पर बैठने के लिए सिर्फ फिंगरप्रिंट्स स्कैन करवाने पड़ें या फिर चेहरा स्कैन करवाना पड़े। इस काम की शुरुआत हो गई है और अमेरिका में दो कंपनियों ने टिकट और बोर्डिंग पास की जगह इस सिस्टम को अपनाने के लिए टेस्टिंग शुरू कर दी है। डेल्टा एयरलाइन ने ऐलान किया है कि उसने बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन पायलट प्रोग्राम शुरू किया जिसके तहत यात्री प्लेन के टिकट के बजाय अपने फिंगरप्रिंट्स इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे कुछ घंटे पहले जेटब्लू ने ऐलान किया था कि बॉस्टन में ऐसे प्रोग्राम की टेस्टिंग की जा रही है जो यात्रियों के चेहरों का मिलान यूएस कस्टम ऐंड बॉर्डर प्रॉटेक्शन के पासपोर्ट डेटाबेस से करेगा।
डेल्टा ने ‘क्लियर’ के साथ मिलकर वॉशिंगटन के रीगन नैशनल एयरपोर्ट पर इस प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए यात्री का डेल्टा के ‘फ्रिक्वेंट फ्लायर स्काईमाइल्स’ प्रोग्राम का मेंबर होना जरूरी है। साथ ही उसके पास क्लियर की भी सब्स्क्रिप्शन होनी चाहिए। डेल्टा के प्रोग्राम के पहले चरण में इलीट-टियर के पैसंजर्स को लाउंज में जाने के लिए बोर्डिंग पास की जगह अपने फिंगरप्रिंट इस्तेमाल करने होंगे। दूसरे चरण में वे बोर्डिंग पास की जगह अपने फिंगरप्रिंट इस्तेमाल कर सकेंगे।
प्रिवेसी पॉलिसी के मुताबिक यूजर्स की बायोमीट्रिक इन्फर्मेशन का रख-रखाव ‘क्लियर’ को करना होगा। यूजर्स कभी भी अपनी इन्फर्मेशन को कंपनी के सर्वर से हटाने और अपने अकाउंट को बंद करने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। एयरलाइन ने यह ऐलान भी किया है कि वह चेहरा पहचानने वाली तकनीक का इस्तेमाल बैग ड्रॉप करने में करेगी। आने वाले वक्त में वह मिनीऐपलस सेंट पॉल इनंटरनैशन एयरपोर्ट पर पायलट प्रोग्राम को टेस्ट करेगी।
जेटब्लू एयरलाइन के प्रोग्राम की बात करें तो यह यूएस कस्टम्स ऐंड बॉर्ड प्रॉटेक्शन (CBP) और टेक कंपनी SITA के साथ मिलकर काम करता है। बॉस्टन के लोगन इंटरनैशनल एयरपोर्ट और क्वीन बीट्रिक्स इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर कंपनी के ग्राहकों के पास दो ऑप्शन होंगे। या तो वे पहले वाली नॉर्मल बोर्डिंग लाइन में जा सकते हैं या फिर उन्हें दूसरी लाइन में जाना होगा जहां पर फोटो लेने के लिए कैमरा लगा है। SITA का सिस्टम यात्री के फोटो को CBP के पास भेजेगा और उसे डेटाबेस से मैच किया जाएगा। जेटब्लू का कहना है कि मैचिंग की यह प्रक्रिया तुरंत हो जाती है।
जेटब्लू का कहना है कि न तो हमारे पास CBP के डेटाबेस का ऐक्सेस है और न ही SITA के पास। कंपनी का कहना है कि SITA और जेटब्लू यूजर्स की बायोमीट्रिक इन्फर्मेशन को स्टोर नहीं करेंगे। अगर अभी चेहरा स्कैन करने पर किसी यात्री की वेरिफिकेशन नहीं हो पाती है तो उसे ट्रेडिशनल लाइन में लगाया जाएगा और पुराने ढंग से ही उसकी वेरिफिकेसन होगी। इसलिए अभी यात्रियों को पहले की ही तरह आईडी वगैरह कैरी करनी होगी।
यह एक तरह से सुविधाजनक तो लगता है मगर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों को ऐसे चीजों के लिए साइनअप करने से पहले इस बात पर ध्यान देना होगा कि उनकी निजी इन्फर्मेशन का मिसयूज न हो। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि किसी भी कंपनी ने यह नहीं बताया है कि यात्रियों की इन्फर्मेशन को सरकार कैसे इस्तेमाल कर सकती है। ऐसा कोई कानून भी नहीं है कि सरकार को ऐसे कार्यकर्मों के जरिए बड़े स्तर पर लोगों की निगरानी करने से रोका जाए।

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