जीएसटी काउंसिल की बैठक आज, तय होगा सोना महंगा होगा या सस्ता

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नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 3 जून को प्रस्तावित बैठक में गोल्ड पर टैक्स की दरें तय करने का मुद्दा सबसे प्रमुख रहेगा। इसके अलावा काउंसिल को इस बैठक में जेम्स, ज्वैलरी, अपैरल, टैक्सटाइल, बीड़ी, सिगरेट, फुटवेयर और फॉर्म इक्विपमेंट पर कर की दरें भी तय करनी हैं। गोल्ड पर टैक्स की दरें तय करने को लेकर राज्यों और ज्वैलर्स की ओर अलग-अलग मत है। हालांकि काउंसिल की ओर से गोल्ड पर जीएसटी की दरें तय करने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी कि सोना सस्ता होगा या महंगा।

3 जून को होगी हाई वोल्टेज डिबेट:

सोना: फैसला होना है बाकी

• बंगाल और केरल चाहते हैं सोने पर लगे 2 फीसद लेवी
• अन्य राज्य चाहते हैं कि सोने पर 5 फीसद का टैक्स लगे
• इंडिया के जेम्स एंड ज्वैलर्स फेडरेशन ने 2.25 फीसद की लेवी तय की है। इसके पीछे उनका मानना है कि सोने का उपभोग लग्जरी है।
• वहीं जो लोग कम कर की वकालत कर रहे हैं उनका कहना है कि ज्यादा लेवी से स्मगलिंग को बढ़ावा मिलेगा।

क्या चाहते हैं सर्राफा कारोबारी:
सर्राफा कारोबारियों ने सोने और आभूषणों के कारोबार पर दो फीसद की दर से विशेष जीएसटी लगाने की मांग की है। इससे पारदर्शिता बने रहने के साथ साथ राजस्व भी बढ़ेगा। उनका कहना है कि यदि पांच फीसद की ऊंची दर से जीएसटी लगाया जाता है तो इससे कर अपवंचना को बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि ग्राहक बिल नहीं लेने पर दबाव डाल सकते हैं।

सोने सस्ता होगा या महंगा जीएसटी काउंसिल करेगी फैसला:
सोने पर फिलहाल एक फीसद मूल्यवर्धित कर (वैट), एक फीसद उत्पाद शुल्क लगता है। वहीं दस फीसद सीमा शुल्क भी यदि इसमें जोड़ा जाए, तो कर की कुल दर 12 फीसद हो जाती है। अगर जीएसटी काउंसिल गोल्ड पर जीएसटी की दर 12 फीसद से ज्यादा रखती है, यानी गोल्ड पर अगर 18 फीसद कर दी दर तय की जाती है तो यकीनन सोना महंगा हो जाएगा।

क्या कहना है एक्सपर्ट का:

ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं नेमीचंद बमाल्वा एंड संस, कोलकाता के संस्थापक बच्छराज बमाल्वा ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया, “हम वित्त मंत्री से सोने पर जीएसटी दर 2 फीसद के आसपास रखने की मांग कर रहे हैं। यदि इससे ऊंची दर रखी जाती है, तो सर्राफा का संगठित क्षेत्र प्रभावित होगा, साथ ही इस क्षेत्र में पारदर्शिता भी प्रभावित होगी। बमाल्वा ने कहा कि वैसे तो इस समय सोने पर एक फीसद वैट और एक फीसद उत्पाद शुल्क लगता है। लेकिन ज्यादातर सर्राफा कारोबारी सालाना कारोबार की छूट सीमा में आते हैं, ऐसे में वास्तविक दर 1.2 फीसद ही बैठती है। इस स्थिति में यदि सोने पर चार या पांच फीसद की ऊंची दर से जीएसटी लगता है तो निश्चित रूप से ग्राहक बिल नहीं देने के लिए दबाव डालेगा। इससे जहां सरकार को राजस्व का नुकसान होगा, वहीं बिलिंग नहीं होने से पारदर्शिता भी प्रभावित होगी।

इन अटकलों पर कि सरकार सोने पर जीएसटी को सीमा शुल्क के साथ मिला सकती है, जिसमें आयात शुल्क को 10 फीसद से कम किया जा सकता है और जीएसटी दर ऊंची रखी जा सकती है, पर बमाल्वा ने कहा कि यह अच्छा विकल्प नहीं होगा, क्योंकि सीमा शुल्क को ग्राहक नहीं देखता है, उसका भुगतान आयात के समय किया जाता है।

दिल्ली बुलियन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल ने भी कहा कि सर्राफा कारोबारी दो फीसद तक जीएसटी के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि इसे चार या पांच फीसद रखा जाता है, तो सोने पर सीमा शुल्क के साथ कुल दर 14-15 फीसद हो जाएगी। ऐसे में निश्चित रूप से कारोबार प्रभावित होगा। हालांकि, गोयल का मानना है कि यदि सरकार जीएसटी दर को ऊंचा रखना चाहती है, तो उसे आयात शुल्क को 10 से घटाकर 7-8 फीसद पर लाना चाहिए।

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