GSLV MK-3 लॉन्चः अब आम इंसान करेगा स्पेस की सैर, कई गुना बढ़ेगी इंटरनेट स्पीड और भी बहुत कुछ…

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इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने सोमवार को पहली उड़ान भरी। इसका वजन 200 हाथियों के बराबर है। इसे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया। रॉकेट ने एक हाथी के बराबर वजनी देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 को 16 मिनट में स्पेस ऑर्बिट में पहुंचाया। इससे आने वाले कुछ सालों में भारत में हाई स्पीड इंटरनेट की शुरुआत होगी। इसरो ने कहा कि आने वाले वक्त में नए जीएसएलवी रॉकेट से इंसानों को स्पेस की सैर कराई जा सकती है।

क्या है GSLV MK- 3

GSLV इसरो का सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है।

इसका पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है।

इस रॉकेट को इसरो ने डेवलप किया है।

इसके जरिए 2001 से अब तक 11 बार सैटेलाइट स्पेस में भेजे जा चुके हैं।

आखिरी उड़ान 5 मई, 2017 को भरी थी,

तब यह जीसैट-9 को अपने साथ लेकर रवाना हुआ था।

GSLV MK- 3 के फायदे

इसके जरिये बड़े उपग्रहों का देश में ही प्रक्षेपण हो सकेगा
यह साधारण, बेहतर पेलोड वाला और मजबूत प्रक्षेपण यान
कुल वजन 640 टन, यह करीब 200 हाथियों के बराबर है
यह हाई स्पीड इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने में सक्षम है
जीएसएलवी एमके-3 भविष्य के भारत का रॉकेट है
इंटरनेट गति बेतहाशा बढ़ जाएगी
सोमवार को जीएसएलवी एमके-3 के जरिये उपग्रह जीसैट-19 को भी भेजा जाएगा। इसके सफल प्रक्षेपण के बाद भारत में इंटरनेट की गति में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी। डेढ़ साल के अंदर दो अन्य संचार उपग्रहों जीसैट-11 और जीसैट-20 को भी अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
अब भारत दूसरे देशों पर डिपेंड हुए बिना बड़े और भारी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग देश में ही कर सकेगा।
यह स्पेस में 4 टन तक के वजन वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है।
इसकी क्षमता मौजूदा जीएसएलवी मार्क 2 की दो टन की क्षमता से दोगुना है। ़
धरती की कम ऊंचाई वाली ऑर्बिट तक 8 टन वजन ले जाने की ताकत रखता है। जो भारत के क्रू को लेकर जाने के लिए लिहाज से काफी है।
इसरो पहले ही स्पेस में 2 से 3 मेंबर भेजने का प्लान बना चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के फंड मिलने का इंतजार है।

इसे क्यों कहा जा रहा है फैट बॉय ?

– GSLV मार्क 3 का वजन 630 टन है, जो 200 हाथियों (एक हाथी-करीब 3 टन) के बराबर है। ऊंचाई करीब 42 मीटर है। इसका वजन 5 पूरी तरह से भरे बोइंग जम्बो विमान या 200 हाथियों के बराबर है। इसीलिए इसे फैट ब्वॉय कहा जा रहा है। इसको बनाने में 160 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

अब आपको बताते हैं GSAT-19 सैटेलाइट के क्या हैं फायदे

क्या है सैटेलाइट GSAT-19?

अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद में बनाया गया है
भारत के लिए संचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाला उपग्रह है
यह पुराने 6-7 संचार उपग्रहों के समूह के बराबर होगा
मेड इन इंडिया उपग्रह डिजिटल भारत को सशक्त करेगा
पहली बार किसी उपग्रह पर कोई ट्रांसपोंडर नहीं होगा
यह प्रति सेकंड चार गीगाबाइट डेटा देने में सक्षम होगा
लगभग 3.2 टन वजनी है, इसकी उम्र 15 वर्ष होगी

क्या है जीसैट-11

इसका आगामी कुछ महीनों में प्रक्षेपण किया जाएगा
वजन 5.8 टन है, इसे अमेरिका की मदद से भेजा जाएगा
इस साल के आखिरी में इसे अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा
यह प्रति सेकंड 13 गीगाबाइट डेटा देने में सक्षम होगा

क्या है जीसैट-20

वर्ष 2018 के अंत तक इसके प्रक्षेपण की योजना
इसका डेटा रेट 60-70 गीगाबाइट प्रति सेकंड होगा

इसरो अध्यक्ष एसएस किरण कुमार ने बताय कि यह मिशन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अब तक का सबसे भारी रॉकेट और उपग्रह है जिसे देश से छोड़ा जाना है।

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