पुरानी ज्वेलरी बेचने पर भी टैक्स

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जमशेदपुर: जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू हाेने पर लोगों को पुरानी ज्वेलरी भी ज्वैलर काे बेचना आसान नहीं हाेगा. ज्वैलर्स काे पुरानी ज्वेलरी खरीदने पर रिवर्स चार्ज देना हाेगा. उसे रिकार्ड बुक में खरीदी ज्वेलरी का डिटेल भी दर्ज रखना होगा. जीएसटी लागू हाेने पर सभी कुछ अॉन पेपर हाेगा. ज्वेलर काे पुरानी ज्वेलरी पर वैल्यू एडीशन कर या पुराने गहने खरीदकर नयी ज्वैलरी बेचने पर जीएसटी देना हाेगा. 11 जून काे जेम्स एंड ज्वेलरी एसाेसिएशन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में इन बिंदुआें पर चर्चा हाेगी.

एक जुलाई से प्रस्तावित जीएसटी लागू हाेने के बाद गोल्ड ज्वेलरी व स्वर्णाभूषण की खरीदारी तीन प्रतिशत तक महंगी हो जायेगी. अभी सोने पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसमें 10 प्रतिशत इंपाेर्ट ड्यूटी, 1-1 प्रतिशत वैट व एक्साइज ड्यूटी के रूप में चुकाना पड़ता है. ग्राहक को केवल 10 प्रतिशत ही टैक्स देना पड़ रहा था. ज्वेलर्स ने कंपोजीशन स्कीम ले रखी थी. इस वजह से ग्राहकों से ज्वेलर्स वैट नहीं लेते थे. ज्वेलर्स एक्साइज ड्यूटी से बाहर थे. नयी व्यवस्था में गाेल्ड ज्वेलरी व सोना खरीदारों को सीधे 13 प्रतिशत टैक्स चुकाना पड़ेगा. हर दस ग्राम पर मौजूदा कीमतों के हिसाब से 800 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना हाेगा. वहीं ही ग्राहकों को गोल्ड ज्वेलरी व सोना बेचने पर सीधे तीन फीसदी का नुकसान होगा, क्योंकि पहले चुकाया गया जीएसटी वापस नहीं मिलेगा.

ऐसे समझें एक बार
ग्राहक यदि 50 हजार रुपये की पुरानी ज्वेलरी बेचकर एक लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदता था, जाे वह ज्वेलर काे सिर्फ डिफरेंस अमाउंट 50 हजार रुपये पर ही टैक्स देता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हाेगा. अब ज्वेलर काे 50 हजार रुपये पर रिवर्स चार्ज सरकार काे देना हाेगा आैर एक लाख रुपये की ज्वेलरी पर जीएसटी कस्टमर से लेना हाेगा. यानी ज्वैलर सरकार काे दाे बार टैक्स जमा करेगा.

जीएसटी के बाद तीन असर
1. जीएसटी के बाद 3% टैक्स ज्यादा
चुकाना पड़ेगा.
2. गहने या सोना वापस बेचने पर नहीं मिलेगा चुकाया टैक्स.
3. छोटी खरीदारी भी बिना बिल नहीं होगी संभव.

ज्वेलर्स पर यह होगा असर
जीएसटी के बाद बिल काटना होगा जरूरी. अभी कंपोजीशन स्कीम में ज्यादातर ज्वैलर्स नहीं देते थे बिल.
नकदी में लेन-देन की सीमा दो लाख रुपए होने से ज्वैलरी कारोबार में 25 फीसदी तक कमी की आशंका.
कारोबार घटने से कारीगरों के रोजगार पर असर संभव.

स्वर्णाभूषण क्षेत्र से जुड़े लाेग जीएसटी का स्वागत कर रहे हैं. सरकार ने उनकी कई मांगें मान ली है. जीएसटी से आभूषण कारोबार में कई तरह की पेचिदगियां पैदा हो जायेंगी. बिना बिल के दुकान से बाहर माल निकालना आसान नहीं होगा. असंगठित उद्याेग हाेने के कारण कारीगर खुद का हिसाब नहीं रख पाते हैं, ताे वे कंप्यूटर आदि से कैसे लैस हाेंगे. 95 फीसदी कारोबार बिल से होगा, जबकि ज्यादातर ग्राहक बिल लेने से बचते हैं.
विपिन अडेसरा, प्रमुख जेम्स एंड ज्वेलरी फेडरेशन

सोने पर जीएसटी की रेट तय होने के बाद भी तसवीर अभी साफ नहीं हुई है. जीएसटी के तहत ज्वैलर्स कैसे व्यापार करेंगे, इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इसके चलते जीएसटी के बाद कम से कम से तीन महीने तक कारीगरों के पास काम की कमी हो सकती है.
धर्मेंद्र कुमार, प्रवक्ता, फेडरेशन

सरकार पुराने गाेल्ड काे बेचने की ऐसी ट्रेड प्रेक्टिस काे अॉन रिकार्ड लाने का काम कर रही है, ताकि उसे अधिक से अधिक राजस्व टैक्स के रूप में प्राप्त हाे. सरकार ज्वैलरी खरीदने आैर बेचने वाले दाेनाें का ही रिकार्ड रखना चाहती है, जीएसटी में कई नियम तय किये गये हैं. सरकार की साफ मंशा है कि काला काराेबार पूरी तरह से बंद हाेना चाहिए. हर काेई पारदर्शी तरीके से काम करें, बेधड़क व्यवसाय करें, ताकि किसी काे भी इंस्पेक्टर राज या फिर अन्य किसी कानूनी परेशानियाें से नहीं गुजरना पड़े.

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