लालू प्रसाद पर लग रहे आरोपों ने बढ़ाईं नीतीश की चुनौतियां

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पटना [एसए शाद]। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके परिवार पर अवैध ढंग से जमीन हासिल करने संबंधी भाजपा के आरोपों ने जदयू की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। महागठबंधन सरकार पर इंटर परीक्षा के खराब नतीजे एवं टापर घोटाला जैसे मामलों को लेकर लग रहे विपक्ष के आरोपों का नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को फिलहाल अकेले ही जवाब देना पड़ रहा है।

महागठबंधन सरकार में जदयू के अलावा शामिल राजद जहां लालू प्रसाद एवं उनके परिवार के बचाव में लगा है, वहीं कांग्रेस नेताओं का फोकस संगठनात्मक गतिविधियों पर अधिक है।

न केवल विपक्ष के राज्य सरकार पर हमलों, बल्कि केंद्र सरकार के तीन सालों के कार्यकाल को लेकर भाजपा नेताओं की बयानबाजी का भी जदयू ही जवाब दे रहा है। चाहे किसानों का मामला हो या युवाओं को रोजगार देने संबंधी वादा, जदयू के नेता लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर आंकड़ों के साथ हमलावर हो रहे हैं।

इधर, तीनों दलों के बीच बढ़ी असहजता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा दिल्ली में आयोजित भोज में नीतीश कुमार शामिल नहीं हुए, जबकि लालू प्रसाद वहां मौजूद थे। वहीं पिछले सप्ताह डीएमके प्रमुख कुरुणानिधि के जन्मदिवस पर चेन्नई में आयोजित समारोह में नीतीश कुमार तो शामिल हुए, लेकिन लालू प्रसाद गैरहाजिर रहे।

जिस समन्वय का तीनों दलों में अभी अभाव दिख रहा है, उसे बनाए रखने के लिए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का सिलसिला शुरू किया गया था। राजद ने भी हर सप्ताह पार्टी से जुड़े एक मंत्री का दरबार लगाना भी आरंभ किया। मगर फिर यह सिलसिला जदयू एवं राजद नेताओं की एक दूसरे पर बयानबाजी के बाद बंद हो गया।

राजद की यह नाराजगी भी है कि जदयू ने लालू प्रसाद पर लगने वाले आरोपों पर क्यों चुप्पी साध रखी है। महागठबंधन सरकार पर विपक्ष के हमलों के जवाब में इस बीच कांग्रेस के नेता भी मुखर नहीं हैं, हालांकि शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

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