रिलायंस और बीपी बनाएंगे भारत में पेट्रोल पंपों का बड़ा नेटवर्क

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नई दिल्ली। जिस दिन से देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों को रोजाना बदलने का फॉर्मूला लागू किया जा रहा है ठीक उसके एक दिन पहले दुनिया की दो दिग्गज पेट्रोलियम कंपनियां भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के खुदरा कारोबार में संयुक्त तौर पर उतरने की घोषणा करती हैं। क्या यह सिर्फ इत्तेफाक है? यह महज इत्तेफाक हो सकता है लेकिन जिस तरह से गुरुवार को घरेलू पेट्रोलियम कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और बहुराष्ट्रीय कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने भारत के पेट्रोलियम बाजार के लिए अपनी भावी योजनाओं का खाका पेश किया है, वह इस बाजार के भविष्य की तरफ से इशारा करते हैं। इशारा साफ है कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोलियम खुदरा बाजार में काफी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) के पास देश में 5000 पेट्रोल पंप खोलने का लाइसेंस है जबकि ब्रिटिश पेट्रोलियम के पास 3500 पेट्रोल पंप खोलने के लाइसेंस काफी दिनों से हैं। इस तरह से दोनों कंपनियों का गठबंधन आसानी से देश में 8500 पेट्रोल पंप बगैर किसी झंझट के खोल सकते हैं। देश में अभी सरकारी तेल कंपनियों के लगभग 56000 पेट्रोल पंप हैं। दोनों कंपनियों के प्रमुखों ने आज इस बात के साफ संकेत दिए कि भारत के लिए खुदरा पेट्रोल बाजार को लेकर उनकी रणनीति काफी आक्रामक है। आरआइएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी और बीपी के सीईओ बॉब डेडली ने जब पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान से मिले तो प्रधान ने छूटते ही उनसे भारत के खुदरा बाजार में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। बाद में अंबानी ने अपनी रणनीति का खुलासा भी किया। उनकी योजना में भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का खुदरा कारोबार बहुत अहम है।

उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक रोजाना कीमत तय होने से पेट्रोलियम खुदरा सेक्टर में सब्सिडी देने को लेकर जो आशंका थी, वह पूरी तरह से खत्म हो गई है। निजी कंपनियों को अभी तक यह आशंका थी कि वर्ष 2002 की तरफ से सरकार फिर से खुदरा पेट्रोल व डीजल पर सब्सिडी देनी शुरू कर सकती है। यही वजह है कि बाजार आधारित पेट्रोल व डीजल किये जाने के दो वर्ष बीत जाने के बावजूद किसी निजी कंपनी ने तेजी से अपने पेट्रोल पंप के विस्तार का एलान नहीं किया था। लेकिन रोजाना तय कीमत करने की फॉर्मूला देश भर में लागू कर केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी सूरत में सब्सिडी वाली खुदरा कीमतों का दौर नहीं आएगा।

आरआइएल के अलावा एस्सार लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, ओएनजीसी को भी पेट्रोल पंप खोलने का लाइसेंस दिया था लेकिन इन्हें सरकारी कंपनियों की तरह सब्सिडी नहीं मिलती थी। लिहाजा सभी को अपने आउटलेट बंद करने पड़े थे। ऐसे में निजी कंपनियां नए सिरे से भारत में पेट्रोल पंप खोलने का एलान कर सकती हैं। इस संभावना को देख कर ही सरकारी तेल कंपनियों के विलय को बढ़ावा देने की नीति लागू की गई है। हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी में एक दूसरी सरकारी कंपनी एचपीसीएल के विलय के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया है। सरकार की मंशा ओएनजीसी, इंडियन ऑयल के नेतृत्व में दो बड़ी पेट्रोलियम खुदरा कंपनी बनाने की है। रोजाना कीमत तय करने के फॉर्मूले के बाद इस प्रक्रिया को तेज किये जाने के आसार हैं।
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