खेती के पहले ही किसानों को मिल जायेगा अनुदान : नीतीश

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को किसान समागम में किसानों को आश्वस्त किया कि नये कृषि रोड मैप (2017-22 ) में उनकी राय को प्राथमिकता मिलेगी. कृषि रोड मैप का मूल उद्देश्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है.

सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के ज्ञान भवन में करीब आठ घंटे तक किसानों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सवा घंटे से अधिक के संबोधन में कहा कि नये कृषि रोड मैप में सरकार किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी की व्यवस्था करेगी. किसानों की सूची बनेगी. जमीन के अनुरूप खेती के पहले ही सरकार किसानों को अनुदान देगी. जैविक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा. राज्य सरकार जेनेटिकली मॉडिफाइ (जीएम) बीज का विरोध करती रहेगी. ये बीज किसान के हित में नहीं हैं

उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति में बदलाव लाना जरूरी है. अभी देश में किसानों की जो स्थिति है, उससे देश का भला होने वाला नहीं है. मुख्यमंत्री ने किसानों की चिंता से अपने को जोड़ते हुए कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए जो कुछ बन पड़ेगा, वह किया जायेगा. उन्होंने कहा कि किसान शब्द को व्यापक रूप में लेना चाहिए. इसमें सिर्फ जमीन मालिक ही नहीं, बल्कि खेत में काम करनेवाले मजदूरों की हितों और उनके कल्याण के लिए भी सोचना होगा.

मुख्यमंत्री ने अगले कृषि रोड मैप के जरिये कृषि व किसान के विकास के लिए क्रियान्वित की जानेवाली योजनाओं का खाका खींचा. कहा कि कृषि व उससे जुड़े क्षेत्रों का समग्र विकास होगा. अनाज, फल, फूल, सब्जी, पशुपालन, मत्स्य पालन समेत सभी क्षेत्र का विकास होगा. भूधारी व भूमिहीन सभी किसानों को विकास किया जायेगा. नये रोड मैप में सब्जी की खेती को भी जोड़ा जायेगा. सब्जी के लिए सहकारी समिति और फेडरेशन बनेगा. गंगा बेसिन में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा.

मुख्यमंत्री ने केंद्र की फसल बीमा योजना की आलोचना की और कहा कि इससे किसानों को लाभ नहीं मिलने वाला है. यह किसानों की फसल का नहीं, बीमा कंपनियों का बीमा है. मुख्यमंत्री ने जीएम बीज का विरोध करते हुए कहा कि सरसों, मक्का, बैगन में जीएम सीड की क्या जरूरत है? कृषि के क्षेत्र में केंद्र भले ही बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन राज्य अपने बूते किसान व खेती का विकास कर रहा है. कृषि रोड मैप में पूरे पांच साल की कार्ययोजना तैयार होगी.

राज्य के सुझाव पर केंद्र करे विचार

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केंद्र के खिलाफ नहीं हैं. विकास में केंद्र और राज्य दोनों को सहायक होना चाहिए, लेकिन केंद्र सुनता ही नहीं है. राज्य से अगर कोई ठोस सुझाव जाये, तो उस पर केंद्र को विचार करना चाहिए, उन्होंने कहा कि सिर्फ योजना बनाने से नहीं होगा, उसका क्रियान्वयन सही तरीके से होना चाहिए, ताकि किसानों को इसका सही लाभ मिल सके.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन के सर्वे का काम चल रहा है. इसके बाद चकबंदी भी होगी. पिछला रोडमैप भी प्रभावशाली रहा. उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है. राज्य में भूखमरी की स्थिति नहीं है. 76% लोग कृषि पर निर्भर हैं, ऐसे में कृषि का विकास जरूरी है. कृषि विकास के लिए सड़क, बिजली आदि के क्षेत्र में भी विकास हुआ. धान खरीद को पारदर्शी बनाया गया.

कागजी टारगेट से कुछ नहीं होगा. वास्तविकता में रह कर काम करना होगा. उन्होंने शराबबंदी के बाद गांवों में आयी खुशहाली और नशामुक्ति के अपने संकल्प को दोहराया. उन्होंने किसानों से कहा कि वे गांजा- भांग की खेती से दूर रहें.

गंगा की गाद की समस्या पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि नदियों का प्रवाह जरूरी है. पर्यावरण की सुरक्षा भी जरूरी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए वे प्रयासरत हैं. राज्य के खजाने पर पहला हर आपदा पीड़ितों का है.

मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ पंगत में किया भोजन

पटना : किसान समागम के मौके पर मुख्यमंत्री पंगत में बैठ कर किसानों के साथ भोजन भी किया. किसानों को जो भोजन परोसा गया, वही सीएम ने भी खाया. उनके साथ कृषि मंत्री राम विचार राय, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्शीद आलम, पशुपालन मंत्री अवधेश कुमार सिंह व सहकारिता मंत्री आलोक मेहता ने भी भोजन किया. मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर कुमार सिन्हा, वित्त विभाग के प्रधान सचिव डीएस गंगवार, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा, कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष वर्मा समेत अन्य पदाधिकारियों ने पंगत में खाना खाया.

लागत के हिसाब से फसलों के मिलें दाम

सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को लागत के हिसाब से फसलों के दाम मिलने चाहिए. कहा, खेती में लागत बढ़ रही है, पर किसानों को लागत के हिसाब से फसलों के दाम नहीं मिल रहे हैं. कृषि क्षेत्र में सतही डिबेट से कुछ नहीं होगा. ऋण तो सीमित समस्या है. असली समस्या लागत के हिसाब से कीमत नहीं मिलना.

नये रोड मैप में इन पर होगा जोर
– िकसानों को इनपुट सब्सिडी
– जैविक खेती को बढ़ावा
– सब्जी की खेती भी जुड़ेगी
– सब्जी के लिए सहकारी समिति व फेडरेशन बनेगा

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