AI कर्मचारी ने लिखा खत ‘मेरा दो साल का यात्रा भत्ता ले लें, पर एयर इंडिया को बचा लें’

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नई दिल्ली। घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के भविष्य को लेकर भले ही अभी पूरी तरह स्थिति स्पष्ट न हो, लेकिन इसके निजीकरण की चिंता इसके कर्मचारियों को सताने लगी है। लंबे समय से एयर इंडिया में काम कर रहे कर्मी ऊहापोह में है।

घाटे से उबारने के लिए गत दिनों सरकार द्वारा एयरलाइंस के निजीकरण या अन्य उपाय किए जाने की बात कही थी। इसके बाद कुछ कर्मचारी इसकी स्थिति सुधारने के लिए आगे आए हैं। एयरलाइंस का दबदबा बना रहे, इसके लिए कर्मियों ने अपने खर्च की कटौती कर तनख्वाह के रुपए या यात्रा भत्ते की राशि का त्याग करने संबंधी पत्र एयर इंडिया के सीएमडी अश्वनी लोहानी को लिखे हैं।

एक महिला कर्मी ने अपने दो साल का यात्रा भत्ता एयर इंडिया को देने की बात कही है, जो दो लाख रुपए है। छोटी सी मदद से खुशी होगी कर्मियों का कहना है कि उनकी छोटी सी मदद से यदि एयर इंडिया का भविष्य सुरक्षित रहता है, तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। पत्रों को अधिकारी भी प्रशंसा की नजरों से देख रहे हैं।

निजीकरण के खिलाफ सात यूनियनोंने दी चेतावनी

एयर इंडिया कर्मचारियों की सात यूनियनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर एयरलाइन का निजीकरण के

नीति आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

14 जून को लिखे इस पत्र में इन यूनियनों ने एयर इंडिया के भविष्य पर चर्चा के लिए केंद्रीय नागरिक उड्‌डयन मंत्री गजपति राजू से समय देने की मांग की है। पत्र में सरकार के इस कदम से लोगों के बेरोजगार होने पर भी चिंता व्यक्त की है, खासकर आरक्षित वर्ग के लोगों को लेकर। क्योंकि, निजी क्षेत्र पर आरक्षण नीति लागू करने बाध्यता नहीं है। एयर इंडिया व उसकी सब्सिडिरी में 21,137 कर्मचारी हैं।

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