मम्मी-पापा के लिए लड़कियां दे देती हैं प्यार की कुर्बानी: सुप्रीम कोर्ट

0
287

सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी में असफल प्रेम कहानियों का बेहद जीवंत वर्णन मिला है, जिसमें न्यायालय ने कहा है कि भारत में माता-पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए महिलाओं का अपने रिश्तों का बलिदान करना एक आम घटना है.

शीर्ष अदालत ने एक व्यक्ति की दोषसिद्धी और उम्रकैद की सजा को खारिज करते हुए अपने फैसले में यह टिप्पणी की. व्यक्ति ने एक महिला से गुपचुप शादी की और इसके तुरंत बाद दोनों ने खुदकुशी कर ली जिसमें व्यक्ति जीवित बच गया जबकि 23 साल की पीड़िता को बचाया नहीं जा सका.

बहरहाल, सन् 1995 की इस घटना में पुलिस ने व्यक्ति के खिलाफ पीड़िता की हत्या का मामला दर्ज किया. शीर्ष अदालत ने यह उल्लेख किया कि हो सकता है महिला अनिच्छा से अपने माता पिता की इच्छा को मानने के लिए राजी हो गई हो, लेकिन घटनास्थल पर फूलमाला, चूड़ियां और सिंदूर देखे गए. इन दृश्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि बाद में उसका मन बदल गया.

न्यायमूर्ति के सीकरी और न्यायमूर्त अशोक भूषण की एक पीठ ने कहा कि अपने प्यार का बलिदान कर भले ही अनिच्छा से ही अपने माता-पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए लड़की की ओर से जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई, वह इस देश में आम घटना है.

अदालत ने कहा कि पीड़ित और आरोपी एक दूसरे से प्यार करते थे और लड़की के पिता ने अदालत के सामने यह गवाही दी थी कि जाति अलग होने के कारण उनके परिवार ने इस शादी के लिये रजामंदी नहीं दी थी. व्यक्ति को कथित तौर पर उसकी हत्या करने का दोषी ठहराते हुए निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी और इस फैसले की राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी पुष्टि की थी.

अदालत ने टिप्पणी की कि परिकल्पना के आधार पर आपराधिक मामलों के फैसले नहीं किए जा सकते और उसने व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि पर्याप्त संदेह के बावजूद अभियोजन पक्ष उसका दोष सिद्ध करने में सक्षम नहीं रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here