टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर बात करना पड़ा कोच कुंबले को भारी

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नई दिल्ली
चैंपियंस ट्रोफी फाइनल में पाकिस्तान के हाथों 180 रनों की बड़ी हार के बाद कई लोगों ने भारतीय टीम को सलाह दी। कोच अनिल कुंबले भी उनमें से एक थे। पर कुंबले का इस पर बात करना टीम इंडिया के साथ पहले से ही खराब उनके रिश्तों के लिए अच्छा नहीं रहा। यह रिश्ता उस मुकाम पर पहुंच गया जहां से वापसी की अब कोई राह नहीं बची।

सोमवार रात को कुंबले ने टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और बीसीसीआई के सचिव अमिताभ चौधरी, सीईओ राहुल जोहरी और जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशंस) एमवी श्रीधर से बात की। इसके बाद कुंबले टीम के साथ वेस्ट इंडीज नहीं गए।

मंगलवार को भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से चला आ रहा विवाद कुंबले के इस्तीफे के साथ समाप्त हो गया। कुंबले ने बाद में ट्वीट कर अपनी बात भी रखी। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने मेरे और कप्तान के बीच गलतफहमियां दूर करने का प्रयास किया लेकिन यह साझेदारी अस्थायी थी और मुझे लगता है कि आगे बढ़ने का यह सही समय है। लंदन में दोपहर को बीसीसीआई ने भी ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी कि अनिल कुंबले ने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद से इस्तीफा दे दिया है। जहां क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी कुंबले का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में थी वहीं कुंबले ने टीम इंडिया का कोच बने रहने से इनकार कर दिया।
रविवार को पाकिस्तान के हाथों हार के बाद कुंबले ने कुछ खिलाड़ियों से निजी रूप से मैच में उनके प्रदर्शन को लेकर बात की। इससे ड्रेसिंग रूम में अजीब का वातावरण बन गया। कुंबले ने खास तौर पर गेंदबाजों के खराब खेल को लेकर बात की थी।

भारतीय कप्तान कोहली और कुंबले के बीच संवाद दो सप्ताह पहले से ही कम होना शुरू हो गया था। इंग्लैंड में एक महीने के प्रवास के दौरान भी दोनों के बीच काफी दूरियां देखी गईं। क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी (सीएसी), जिसमें सचिन तेंडुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण शामिल हैं, जिस पर टीम इंडिया का अगला कोच चुनने की जिम्मेदारी है, कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए इस मुद्दे पर बात करेगी। लक्ष्मण भारत लौट आए हैं वहीं सचिन और सौरभ अभी लंदन में ही हैं। कुंबले के इस्तीफे के बाद यह बात तो साफ हो गई है कि सीएसी द्वारा कप्तान और कोच में सुलह कराने की कोशिश नाकाम रही है। कोहली पीछे हटने को तैयार नहीं और न ही वह किसी तरह का समझौता ही करना चाहते हैं। ऐसे में कुंबले के पास इस्तीफा देने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था। मंगलवार को बोर्ड के एक अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘टीम के मतभेद सुलझ नहीं सकते। यह कुंबले के वेस्ट इंडीज न जाने भर का सवाल नहीं है। बात यह है कि लंबे वक्त के लिए यह रिश्ता चल नहीं सकता। भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर दोनों की राय बिलकुल जुदा है। ताजा बातचीत में कुंबले को अहसास हो गया कि यह समस्या सुलझ नहीं सकती। जाहिर सी बात है कि हम कप्तान को तो नहीं हटा सकते। तो कुंबले को ही पीछे हटना था और कोई रास्ता बचा ही नहीं था।’

क्या बोर्ड ने दोनों को अजस्ट करके आगे बढ़ने को नहीं कहा? इस पर अधिकारी ने कहा कि सीएसी और बोर्ड ने चैंपियंस ट्रोफी के दौरान दोनों से कई बार बात की। इस रिश्ते में अब कोई गुंजाइश नहीं बची थी।’

कुंबले और कोहली के बीच पूरी चैंपियंस ट्रोफी के दौरान तनाव देखा गया। अधिकारी ने कहा, ‘अगर आपने ध्यान दिया हो तो कुंबले ने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग नहीं लिया। उन्होंने लो-प्रोफाइल रहने का फैसला लिया। विराट कोहली ने दूसरी ओर मीडिया से बात करते हुए एक बार भी कुंबले का नाम नहीं लिया। उन्होंने हालांकि अपनी बल्लेबाजी में सुधार के लिए संजय बांगड़ और थ्रो-डाउन विशेषज्ञ राघवेंद्र तक का शुक्रिया अदा किया।’

इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर कुंबले और कोहली में कोई विवाद था तो ऑस्ट्रेलिया सीरीज के फौरन बाद उसे दूर करने के प्रयास क्यों नहीं किए गए। टीम इंडिया के मैनेजर अनिल पटेल ने अपनी रिपोर्ट में दोनों के बीच तनाव की खबर क्यों नहीं दी? और अगर उन्होंने कोई रिपोर्ट दी थी तो उसे सीओए के सामने चैंपियंस ट्रोफी की पूर्व संध्या पर क्यों लाया गया।

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