चुनाव आयोग ने लाभ के पद मामले को खत्म करने की 21 AAP विधायकों की मांग खारिज की

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लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी को चुनाव आयोग से झटका लगा है। आयोग ने संसदीय सचिव पद पर रहे AAP के 20 विधायकों की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें विधायकों ने ‘लाभ के पद’ मामले को खत्म करने की मांग की थी। इस मामले में चुनाव आयोग अगस्त में अंतिम फैसला सुना सकता है। इस तरह संसदीय सचिव रहे इन 21 विधायकों की विधानसभा सदस्यता जाने का खतरा बरकरार है। हालांकि इनमें से रजौरी गार्डन से विधायक रहे जरनैल सिंह पहले ही विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
लाभ के पद मामले में अपने 21 विधायकों की अर्जी समाप्त होने पर AAP ने बयान जारी कर संकेत दिया है कि आयोग का विपरीत फैसला आने पर वह उसे चुनौती देगी। AAP ने अपने बयान में कहा, ‘चुनाव आयोग के हालिया आदेश की गलत व्याख्या नहीं होनी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इसलिए पद से जुड़ी याचिका की सुनवाई का सवाल ही नहीं है क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट के मुताबिक वह पद कभी अस्तित्व में ही नहीं रहा। हालांकि चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि वह अब भी याचिका की सुनवाई करेगा। चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती दिए जाने के लिए सारे तत्व मौजूद हैं। हम माननीय दिल्ली हाई कोर्ट के साथ-साथ माननीय चुनाव आयोग के आदेश का भी सम्मान करते हैं।’
बता दें कि चुनाव आयोग के सामने प्रशांत पटेल नाम के वकील ने पिछले साल जुलाई में एक याचिका दायर कर इन 21 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की अपील की थी। कांग्रेस और BJP ने इस मामले में एक पक्ष बनने की अपील की थी, लेकिन आयोग ने इन अपीलों को खारिज कर दिया। पिछले साल सितंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए उसे तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया था। इससे पहले 2006 में आयोग ने राज्यसभा सांसद जया बच्चन की सदस्यता रद्द कर दी थी।

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