गुलमर्ग में आंधी से रोप-वे पर गिरे पेड़, दिल्ली की फैमिली समेत 7 लोगों की मौत

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श्रीनगर.जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में रविवार को तेज हवा की वजह से गोंडोला (रोप-वे) की दो केबल कार नीचे गिर गईं। इस हादसे में 7 टूरिस्टों की मौत हो गई। मरने वालों में एक ही परिवार के 4 लोग- पति-पत्नी और उनकी 4 और 6 साल की दो बेटियां हैं। यह परिवार दिल्ली के शालीमार बाग यहां घूमने आया था। हादसे में तीन कश्मीरी गाइड की भी मौत हो गई। दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे इस रोप-वे में 19 साल में यह पहला हादसा है। गुलमर्ग में गाइड एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट गुल चाचा ने भास्कर को बताया, “स्की रिजॉर्ट आम दिनों की तरह ही सैलानियों से गुलजार था। देश-विदेश से आए सैलानी सुबह से ही दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची केबल कार सर्विस यानी गुलमर्ग गोंडोला का आनंद ले रहे थे।” “दोपहर बाद करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ देर में बारिश तो रुक गई, लेकिन हवा की रफ्तार एकाएक काफी तेज हो गई। हवा तेज होने पर एहतियातन गोंडोला बंद कर देते हैं। लेकिन कुछ लोग बीच में थे। उनके दूसरे छोर पर पहुंचने तक गोंडोला चलाना जरूरी था।”
“इसी बीच, दो बड़े पेड़ टूटकर फेज- 1 के रोप-वे पर जा गिरे। झटके से तार एक टावर से नीचे झूल गया। लेकिन टूटा नहीं। केबल कारों के बोझ की वजह से पहले तार 30-40 फीट नीचे गया और फिर झटके से ऊपर उछला। दो बार ऐसे झटके लगते ही दो केबल कारों की पुलि तार से निकल गई।” “करीब 100 फीट की ऊंचाई से दोनों केबल कार पत्थरों पर जाकर गिरीं। एक में दिल्ली के परिवार के चार लोग थे, जबकि दूसरी में पांच गाइड थे। सात लोग मारे गए।” गोंडोला फौरन रोकना पड़ा। करीब 150 लोग फंस गए। हालांकि, इन्हें निकाल लिया गया। गुलमर्ग गोंडोला के 19 साल में यह पहला हादसा है। जम्मू-कश्मीर केबल कार कॉरपोरेशन के जीएम रियाज अहमद ने कहा कि हादसे के बाद हमने 100 टूरिस्टों को सुरक्षित निकाला। फिलहाल सर्विस रोक दी है। पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर हादसे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- जब तेज हवाएं चलने का अलर्ट था तो केबल कार सर्विस रोकी क्यों नहीं गई। महबूबा सरकार ने जांच के ऑर्डर दिए हैं।
एशिया का सबसे लंबा केबल कार प्रोजेक्ट
गुलमर्ग गोंडोला एशिया का सबसे लंबा और दुनिया का दूसरा ऊंचा रोप-वे है। जो टूरिस्टों को 5 किलोमीटर का हैरतंगेज सफर कराता है। यह सैलानियों को कोंगदुरी पहाड़ी पर समुद्र तल से 13,780 फीट ऊंचाई पर ले जाता है। गुलमर्ग गोंडोला का पहला फेज 1998 मेंशुरू हुआ था।

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