अल कायदा के निशाने पर भारतीय सेना और हिंदू संगठन, हिट लिस्ट में अफसर सबसे ऊपर

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खूंखार आतंकवादी संगठन अल कायदा के फोकस पर अब भारतीय उपमहाद्वीप है। आतंकी संगठन ने कहा है कि वह भारतीय सुरक्षा बलों और हिंदू ‘अलगाववादी’ संगठनों के नेताओं का निशाना बनाएगा। अल कायदा ने ‘उपमहाद्वीप के मुजाहिदीनों के लिए आचार संहिता’ नाम से एक विस्तृत दस्तावेज जारी किया है जिसमें साफ-साफ जिक्र है कि किसे निशाना बनाया जाए। दस्तावेज में आतंकियों के लक्ष्य, टारगेट, क्या करना है और क्या नहीं इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। दस्तावेज में कहा गया है, ‘सेना से जुड़े सभी लोग हमारे निशाने पर हैं, चाहे वे वॉर जोन में हो या अपने बैरकों में। यहां तक कि छुट्टी पर गए सैनिकों को भी नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि वे शरिया को लागू करने के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।’ अलकायदा ने साफ किया है कि सेना के अधिकारी उसके निशाने पर सबसे ऊपर हैं। दस्तावेज में लिखा गया है, ‘सैनिकों के मुकाबले अफसर हमारे निशाने पर ऊपर हैं। जितना बड़ा अफसर होगा, उतना ही ज्यादा निशाने पर होगा। सेना के वे अफसर जिनके हाथ हमारे कश्मीरी भाइयों के खून से रंगे हैं, हमारे टारगेट पर हैं।’ दस्तावेज में कश्मीर का कई बार जिक्र किया गया है। अल कायदा ने यूपी के संभल के रहने वाले मौलाना असीम उमर को अपने भारतीय उपमहाद्वीप यूनिट का सरगना बताया है। भारतीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि अल कायदा की गतिविधियों पर उनकी करीबी नजर है, खासकर हिजबुल के पूर्व कमांडर जाकिर मूसा द्वारा नया संगठन बनाने और अल कायदा को समर्थन देने के बाद हम काफी सतर्क हैं। सुरक्षा बलों के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अल कायदा ने उपमहाद्वीप के विभिन्न आतंकी संगठनों को एक साथ आकर ‘इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान’ नाम से गठबंधन बनाने की अपील की है। आतंकरोधी अभियानों से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक अल कायदा यह स्थापित करने की कोशिश कर रहा है कि उसके काम करने का तरीके और उद्देश्य उसके चिर-प्रतिद्वंद्वी आतंकी संगठन आईएसआईएस से अलग हैं। अधिकारी ने आगे कहा, ‘दस्तावेज में जिक्र किया गया है कि मुजाहिदीन किसी आम हिंदू, मुस्लिम या बौद्ध पर हमला नहीं करेंगे और न ही धार्मिक स्थलों को निशाना बनाएंगे। यह ISIS के ठीक उलट है जिसके निशाने पर सबसे ऊपर मस्जिद हैं।’ दिसंबर 2015 में सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में अल कायदा के कई स्लीपर सेल्स का भंडाफोड़ किया था। उमर हैदराबादी, अबु सुफियान, मोहम्मद सामी और 2007 के ग्लासगो एयरपोर्ट पर हमला करने वाले कफील के भाई डॉक्टर सबील की अल कायदा सदस्यों के तौर पर पहचान हुई। गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला करने वाले फरहतुल्लाह गोरी को भी अल कायदा सदस्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया।

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