सलाउद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया जाना पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा: एक्सपर्ट्स

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अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया सैयद सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने के फैसले की सुरक्षा विशेषज्ञों ने तारीफ की है। उनके मुताबिक यह पाकिस्तान की सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है। विदेश मंत्रालय ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि अमेरिका ने इस कदम से भारत के इस आरोप की पुष्टि होती है कि जम्मू-कश्मीर में हिंसक घटनाओं के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है। डिफेंस एक्सपर्ट जनरल जी.डी. बख्शी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह स्वागत योग्य कदम है कि सैयद सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों में लिस्ट में शामिल किया है। इसका मतलब यह है कि कोई भी अमेरिकी व्यक्ति सलाउद्दीन से किसी तरह की बातचीत और लेनदेन नहीं कर सकेगा। सलाउद्दीन की कोई भी प्रॉपर्टी जो अमेरिका में होगी वह ब्लॉक हो जाएगी।’ हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका जरूर है, पर भारत को इससे ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए। डिफेंस एक्सपर्ट प्रफुल्ल बख्शी ने कहा, ‘सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया गया है, इसके पहले हाफिज सईद को भी इस लिस्ट में रखा गया था। जो भी हुआ है, हमें उससे बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए। हां, यह पाकिस्तान की सरकार के मुंह पर तमाचा है, पर अगर हम यह मान लें कि अब वे कश्मीर में हिंसा फैलाना बंद कर देंगे, तो यह गलत होगा। वे अपना काम जारी रखेंगे, इसलिए हमें अपनी नीतियों को और मजबूत बनाते हुए सक्रिय रहना होगा।’ इधर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने अपने बयान में कहा, ‘उस संदर्भ में, हम इस नोटिफिकेशन का स्वागत करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि भारत और अमेरिका दोनों को आतंकवाद से खतरा है और हम मिलकर उसके खिलाफ लड़ रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ऐसा कर के भारत के इस स्टैंड को अपना समर्थन दिया है कि जम्मू और कश्मीर में हिंसक गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का हाथ है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक सलाउद्दीन ने पिछले साल सितंबर में यह कहा था कि वह कश्मीर समस्या के किसी भी शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश को रोक देगा। उसने कश्मीर में फिदायीन हमलावरों की ट्रेनिंग देने की धमकी भी दी थी। उसने यह भी कहा था कि वह कश्मीर घाटी को भारतीय सुरक्षा बलों का कब्रगाह बना देगा। सलाउद्दीन की अगुवाई में हिजबुल मुजाहिदीन ने कई आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है। सलाउद्दीन को विशेष सूची में डालने से अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उसकी पहुंच खत्म हो जाएगी।

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