काउंटडाउन शुरू: आज रात ठीक 12 बजे से लागू होगा जीएसटी

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नई दिल्ली । देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले एक समान वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) की 1 जुलाई से होने वाली शुरुआत के मौके पर शुक्रवार संसद के सेंट्रल हॉल में आधी रात को विशेष साझा सत्र होगा। कांग्रेस, द्रमुक, वाम दल व तृणमूल कांग्रेस ने इसके बहिष्कार का एलान किया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार इस सत्र में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में प्रमुख विपक्षी दलों की गैर मौजूदगी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका आगाज करेंगे। रात 12 बजे घंटा बजाकर इसे लागू किया जाएगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष से अपील की है कि वह बैठक का बहिष्कार न करे। जीएसटी 70 साल में सबसे बड़ा कर सुधार है। जीएसटी के विरोध में शुक्रवार को मध्‍यप्रदेश में बंद रहेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने ऐतिहासिक सत्र में पार्टी सांसदों के भाग नहीं लेने की जानकारी दी। कांग्रेस पिछले कुछ दिनों से दुविधा में थी। अंतत: बैठक से दूर रहने का फैसला किया गया। पार्टी के कई नेताओं की राय थी कि जीएसटी मूल रूप से कांग्रेस की देन है, इसलिए उसे इसमें भाग लेना चाहिए, जबकि कुछ नेताओं की राय थी कि सरकार इसे जल्दबाजी में लागू कर रही है, छोटे व्यापारियों व कारोबारियों की परेशानियों का खयाल नहीं रखा गया है, इसलिए उसे सत्र का बहिष्कार करना चाहिए।

नेहरू के भाषण का महत्व कम नहीं करना चाहती है कांग्रेस
सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता के आधी रात को यानी 14 अगस्त 1947 को दिए गए ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (नियति से किए गए वादे) भाषण के ऐतिहासिक महत्व को कम नहीं करना चाहती, इसलिए वह इस प्रकार के किसी कार्यक्रम में भाग लेने को इच्छुक नहीं है। जीएसटी लॉन्चिंग के मौके पर पीएम मोदी का विशेष भाषण होगा।

जल्दबाजी में सरकार: येचुरी माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी जीएसटी लागू करने में सरकार द्वारा जल्दबाजी दिखाने का आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया था।

गैर जरूरी जल्दी: ममता तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार जीएसटी को लागू करने में ‘गैरजरूरी जल्दीबाजी’ दिखा रही है। इसे लागू करने के लिए कम से कम छह महीने चाहिए। हम एक जुलाई से इसे लागू करने को तैयार नहीं हैं।

फनफेयर कार्यक्रम: द्रमुक प्रवक्ता टीकेएस एलेंगोवन ने कहा कि पार्टी द्वारा विशेष सत्र का बहिष्कार किया जाएगा। इसे ‘फनफेयर’ (जलसा) कार्यक्रम की संज्ञा देते हुए कहा कि यह सिर्फ नई कर प्रणाली लागू करने का समारोह है, जबकि बैंकों व बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण व कई अन्य ऐतिहासिक कानूनों को लागू करने के मौके पर ऐसे भव्य कार्यक्रम नहीं किए गए थे।

विरोध के कारण बहिष्कार: राजा भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि जीएसटी के विरोध में देशभर में आंदोलन का माहौल है, इसलिए वाम दल जश्न में शामिल नहीं होंगे। जीएसटी को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं।

जीएसटी के लिए सेंट्रल हॉल का उपयोग गलत: कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे व गुलाम नबी आजाद ने संसद के सेंट्रल हॉल में जीएसटी कार्यक्रम करने पर कड़ा एतराज जताया। खड़गे ने कहा कि संप्रग सरकार ने मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार जैसे कानून बनाए तब किसी का भी जश्न सेंट्रल हॉल में नहीं मनाया गया।

आधी रात को सिर्फ तीन जश्न: आजाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आजाद भारत में आधी रात को केवल तीन जश्न हुए हैं। 1947 में देश की आजादी, 1972 में आजादी की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती। इन तीनों से भाजपा का नाता नहीं रहा, क्योंकि उसने आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लिया था। राजग सरकार सिर्फ प्रचार के लिए जीएसटी की लॉन्चिंग आधी रात को कर रही है।

सिर्फ जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होगा जीएसटी: 16 अप्रत्यक्ष करों के बदले लागू किया जा रहा जीएसटी देश के सभी राज्यों की सरकारें पास कर चुकी हैं। यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होगा, क्योंकि इससे संबंधित कानून वहां पारित नहीं हुआ है।

जीएसटी का अर्थ नहीं बता पाए उप्र के मंत्री लखनऊ

जीएसटी लागू करने को लेकर देशभर में महीनों से बहस चल रही है, लेकिन उत्‍तर प्रदेश के मंत्री रमापति शास्त्री ने केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार की किरकिरी करा दी। शास्त्री जीएसटी का पूरा अर्थ भी नहीं बता पाए। वह भी तब, जबकि उप्र के महाराजगंज में वे कारोबारियों के बीच जीएसटी के लाभों पर चर्चा कर रहे थे। भी़ड़ में से किसी ने उन्हें जीएसटी का अर्थ बताने का प्रयास किया, लेकिन उसे भी शास्त्री समझ न सके।

जीएसटी में विसंगतियों के खिलाफ मप्र में कारोबार बंद
जीएसटी नियमों में विसंगतियों के खिलाफ शुक्रवार को मप्र में व्यापारी बंद रखेंगे। बंद का असर इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर समेत अधिकतर शहरों में रहेगा। अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के महासचिव सुशील सुरेका के मुताबिक, वे जीएसटी का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि जीएसटी काउंसिल के नियमों में जो विसंगतियां हैं, उनका विरोध कर रहे हैं। यदि नियमों को सरल बना दिया जाए तो जीएसटी से कोई दिक्कत नहीं है। उनके मुताबिक बंद का समर्थन सभी कारोबारी कर रहे हैं। इंदौर में दवा की दुकानें भी बंद रहेंगी। पेट्रोल, डीजल जीएसटी में शामिल नहीं है, लेकिन बंद के समर्थन में इंदौर में दोपहर 12-2 बजे तक पेट्रोल पंप भी बंद रहेंगे। सुरेका के मुताबिक दूध, सब्जी और जरूरी चीजों को बंद से बाहर रखा गया है। भोपाल में बंद का आह्वान भोपाल में किराना, कपड़ा, दवा की थोक और फुटकर बाजारों की दुकानें नहीं खुलेंगी। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टर और होटल कारोबारी भी कारोबार बंद रखेंगे। भोपाल चैंबर ऑफ कामर्स के बैनर तले गुरुवार को शहर भर में लाउड स्पीकर के जरिए 30 जून को बंद का आह्वान किया गया। भोपाल चैंबर के अध्यक्ष ललित जैन के मुताबिक, जीएसटी के विरोध में बंद को सभी व्यापारिक संगठनों ने समर्थन दिया है।

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