बाढ़ और सुखाड़ दोनों की रखें तैयारी : सीएम

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को बाढ़ और सुखाड़ दोनों के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है. सभी जिलों के प्रभारी सचिवों को भी निर्देश दिया कि वे अपने जिलों में जाकर बाढ़ व सुखाड़ को लेकर की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा करें और ससमय तैयारी पूरी हो, यह भी सुनिश्चित करें.

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग स्थित नेक संवाद भवन में बाढ़ व सुखाड़ को देखते हुए समीक्षात्मक बैठक की. करीब सात घंटे तक चली मैराथन बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी प्रमंडलों व जिलों के वरीय अधिकारियों के साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग भी की.

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ व सुखाड़ दोनों को सोचते हुए आगे बढ़ें. बिहार में बारिश कम हो या ज्यादा, बाढ़ आ सकती है. कब कहां से नुकसान होगा, पता नहीं. बारिश कम हुई, तो इससे जरूरी नहीं कि बिहार में बाढ़ नहीं आये. प्रदेश में बाढ़ नेपाल, उत्तराखंड व मध्यप्रदेश में बारिश होने से भी आती है. 2007 में सबसे अधिक बाढ़ आयी थी. इससे 22 जिले और 2.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. यह बाढ़ सिर्फ प्रमुख नदी में ही नहीं, बल्कि बूढ़ी गंडक में भी आयी थी. उन्होंने कहा कि बारिश की स्थिति को देखते हुए सुखाड़ की भी पूरी तैयारी रखें.

सुखाड़ की स्थिति में यह भी देखें कि डीजल अनुदान, नहरों में पानी अंतिम छोर तक पहुंचे, सभी ट्यूबवेल काम कर रहे हों, बिजली की पर्याप्त आपूर्ति हो, आकस्मिक फसल योजना का लाभ लोगों तक पहुंचे. मुख्यमंत्री ने कहा कि आकस्मिक फसल योजना के संबंध में कृषि विभाग को निरंतर समीक्षा करते रहनी होगी, ताकि लोगों को अधिक-से-अधिक सहूलियत मिले. मुख्यमंत्री ने नाविकों को प्रशिक्षण और उनके उन्मुखीकरण अनिवार्य रूप से कराने का भी निर्देश दिया. इस पर आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की प्रीपोजिशनिंग कर ली गयी है.

बैठक में राहत सामग्रियों का जिलावार टेंडर और उसकी खरीद की भी समीक्षा की गयी. मुख्यमंत्री ने इसके लिए जिन जिलों में दरें निर्धारित नहीं हुई हैं, वहां जल्द ही दरें निर्धारित कर लेने का निर्देश दिया. समीक्षा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाओं की उपलब्धता के बारे में बताया गया. पशुपालन विभाग द्वारा पशु दवा व पशु चारा की उपलब्धता के साथ-साथ पशु राहत शिविरों के संबंध में मुख्यमंत्री को जानकारी दी गयी. इसके अलावा समीक्षा में बाढ़ शरण स्थलों की पहचान, जिला टास्क फोर्स का गठन, बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली, तटबंधों की स्थिति, सड़क की स्थिति पर भी चर्चा की गयी. बैठक में कृषि विभाग ने कृषि से संबंधित विभिन्न पहलुओं, वर्षापात, खरीफ फसल की कितनी खेती हुई, आकस्मिक फसल योजना, डीजल अनुदान को लेकर भी मुख्यमंत्री के सामने प्रेजेंटेशन किया गया. आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधानसचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री के सामने बाढ़ पूर्व तैयारी से संबंधित पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन किया.

बैठक में थे मौजूद

समीक्षात्मक बैठक में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार राय, पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह, आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर, पीएचइडी मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यासजी, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य यूके मिश्रा, डीजीपी पीके ठाकुर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव अतीश चंद्रा व मनीष कुमार वर्मा सहित सभी विभागों के प्रधान सचिव व सचिव मौजूद थे.

जून में 30 सालों के एवरेज से कम बारिश

बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि इस साल सभी जिलों में अब तक पिछले साल की तुलना में कम बारिश हुई है. जून में होने वाली बारिश पिछले 30 सालों के एवरेज से कम है. बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) द्वारा ऋतुकालीन वर्षा को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया. इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विभिन्न संस्थानों से मिलने वाले आंकड़ों को मिला कर एक अंतिम आंकड़ा निकालें और इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जा सके.

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