इस्रायल दुनिया के सबसे अहम पीएम का इस्‍तकबाल करने को तैयार, बदल रही भारतीय विदेश नीति!

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पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार को इस्रायल के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला इस्ररायली दौरा है. पीएम मोदी द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की स्‍थापना के 25वीं वर्षगांठ पर वहां पहुंच रहे हैं. इस्रायल ने भारतीय पीएम के इस दौरे को ऐतिहासिक करार दिया है. कुछ दिन पूर्व एक इस्रायल अखबार ने अपने संपादकीय में इस दौरे की अहमियत बताते हुए लिखा था कि दुनिया के सबसे अहम पीएम इस्रायल आ रहे हैं. इसकी बानगी इस तरह भी समझी जा सकती है कि पीएम मोदी जब तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरेंगे तो उनका स्‍वागत कमोबेश उसी अंदाज में होगा जिस तरह अमेरिकी राष्‍ट्रपति का होता है. माना जा रहा है कि इस्रायल पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू और उनके कैबिनेट मंत्रियों समेत 50 बड़ी हस्तियां मोदी के स्‍वागत के लिए वहां मौजूद होंगी.

अब सवाल उठता है कि आखिर इस्रायल, पीएम मोदी के दौरे को इतनी अहमियत क्‍यों दे रहा है. उसकी कुछ वजह ऐतिहासिक हैं. दरअसल भारत की शुरुआती विदेश नीति का झुकाव इस्ररायल के विरोधी अरब देशों की तरफ रहा है. 1947 में संयुक्‍त राष्‍ट्र में इस्रायलदेश बनाने के लिए फलीस्‍तीन विभाजन प्रस्‍ताव का विरोध किया था. हालांकि तीन वर्षों बाद 1950 में भारत ने इस्रायल को मान्‍यता दे दी. उसके बाद 1992 में पीवी नरसिम्‍हा राव की सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच पूर्ण कूटनयिक संबंध स्‍थापित हुए.

उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में बीजेपी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद इस्रायल के साथ संबंधों को तरजीह दी गई. बीजेपी शुरू से ही इस्रायल के साथ बेहतर संबंधों की हिमायती रही है. उसके दौर में दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बनकर उभरे हैं.

पिछले एक दशक में दोनों देशों के रिश्‍ते काफी गहरे हुए हैं. इस दौर में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और यूपीए सरकार के दौरान एसएम कृष्‍णा इस्रायल की यात्रा कर चुके हैं. इन नेताओं के दौरे की खास बात यह रही है कि इन्‍होंने फलस्‍तीनी क्षेत्रों का भी दौरा किया था. लेकिन इन सबसे इतर पीएम मोदी फलीस्‍तीनी क्षेत्रों का दौरा नहीं करेंगे. इस्ररायल में इसे भारत की बदलती विदेशी नीति के रूप में देखा जा रहा है और संभवतया इसीलिए पीएम मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए इतनी तवज्‍जो भी दे रहा है.

बदलते रिश्‍ते
इसके अलावा भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्‍यवस्‍था वाला देश है. उधर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के सत्‍ता में आने के बाद से उनकी इस्रायल नीति के बारे में अभी अनिश्चितता का माहौल बरकरार है. इस पृष्‍ठभूमि में इस्रायल के एक अखबार ‘हारिट्ज’ ने विश्‍लेषण करते हुए लिखा है कि अनिश्चितता के इस माहौल में भारत, ”इस्रायल का सबसे बड़ा सहयोगी” बनकर उभर सकता है.

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