अबू सलेम पर विस्फोटों का षडयंत्र रचने का दोष था: सीबीआई

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पिछले महीने विशेष टाडा जज जीए सनप ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को आतंकवाद विरोधी टाडा कानून के तहत इन विस्फोटों को करने का षडयंत्र रचने के लिए दोषी ठहराया था। उस पर आरोप था कि उसने गुजरात से मुंबई के समुद्री तटों पर हथियारों और गोलाबारूद का जखीरा स्मगल किया था। उसने इस जखीरे में से ऐक्टर संजय दत्त को भी हथियार दिए थे, ताकि समय आने पर मुंबई में हमले कराए जा सकें। अबू सलेम ने संजय दत्त को एके-56 राइफल, 250 गोलियां और हाथगोले उसके घर पर 16 जनवरी, 1993 को रखवाए थे। दो दिन बाद ही 18 जनवरी, 1993 को अबू अपने दो अन्य साथियों के साथ दत्त के बान्दरा वेस्ट स्थित घर पर गया और दोनों राइफल और कुछ गोलियां ले आया। अबू सलेम पर फरवरी, 2015 में एक विशेष कोर्ट ने मुंबई के प्रमुख बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के लिए आजीवन कारावास की भी सजा सुनाई गई थी। उस पर हत्या, वसूली, डराने-धमकाने के अनेक मामले चल रहे हैं।
2002: अबू सलेम को पुर्तगाल में भारत के कहने पर 1993 के बम विस्फोटों और अन्य अपराधों का आरोपी होने के कारण अरेस्ट किया गया था। उस समय के उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पुर्तगाल के लिस्बन कोर्ट को भरोसा दिया था कि यदि पुर्तगाल उसे भारत को सौंप देगा तो अबू को भारत में फांसी की सजा नहीं दी जाएगी। साथ ही 25 साल से ज्यादा का कारावास नहीं दिया जाएगा।
मार्च, 2003: पुर्तगाल के न्याय मंत्रालय ने विशेष आरोपों पर प्रत्यर्पण को मंजूर किया।
जुलाई, 2004: लिस्बन के अपील कोर्ट को प्रत्यर्पण के लिए अधिकृत किया।
जनवरी, 2005: पुर्तगाल के सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण पर मुहर लगाई।
नवंबर, 2005: सलेम को भारत लाया गया।
2013: सीबीआई कोर्ट ने सलेम के विरुद्ध कुछ आरोप खारिज कर दिए थे क्योंकि ये आरोप प्रत्यर्पण संधि के प्रॉवधानों के विरुद्ध थे।
क्या है प्रत्यर्पण कानून:
प्रत्यर्पण ऐक्ट की धारा 34 के तहत फांसी की सजा के बदले आजीवन कारावास की व्यवस्था है। यह धारा यह बताती है कि यदि कोई अपराधी या व्यक्ति किसी अन्य देश में कोई अपराध करके पुर्तगाल में आ गया है तो उस अपराधी को अपराध करने वाले देश में तभी सौंपा जा सकता है जब पुर्तगाल की कोर्ट उसके लिए सहमत हो जाए। साथ ही इस तरह के अपराधी को सौंपे जाने वाले देश में फांसी की सजा नहीं दी जा सकती चाहे उसका अपराध फांसी की सजा वाला हो। उसे अधिकतम सजा आजीवन का कारावास ही दिया जा सकता है। उस अपराधी को उतना ही अपराध सौंपे गए देश में दिया जा सकता है जितना उसे पुर्तगाल में मिल सकता है। गौरतलब है कि पुर्तगाल में फांसी नहीं दी जाती है।

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