बढ़ते संरक्षणवाद से वैश्वीकरण से हुए लाभ के समक्ष संकट : पीएम मोदी

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हैमबर्ग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलेपन की व्यवस्था को समर्थन देने तथा उसे मजबूत बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करते हुए आज कहा कि वैश्वीकरण से हुए लाभ को बढ़ते संरक्षणवाद से खतरा है। जी 20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने जोर देकर कहा कि खुलेपन की व्यवस्था को समर्थन देने तथा उसे मजबूत बनाए रखने के लिए समूह को एक सुर में बोलना चाहिए।

समेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग तथा अन्य नेता भाग ले रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा कि नोटबंदी के निर्णय से भ्रष्टचार पर प्रहार हुआ है, डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला है और संगठित अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ है।

गौरतलब है कि सरकार ने गत वर्ष नवंबर में 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया। मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार कालाधन के खिलाफ लड़ाई को आगे ले जाने को तैयार है और उम्मीद जताई कि जी 20 सभी महत्वपूर्ण मुद्दों में कदम उठाने को लेकर नेतृत्व करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पारस्परिक आधार पर वित्तीय खातों की सूचना का स्वत: आदान-प्रदान के क्रियान्वयन से काला धन और धन के अवैध प्रवाह पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, कराधार का क्षरण और लाभ का स्थानांतरण अपनाने के साथ हम कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं। विभिन्न देशों के कथित संरक्षणवादी कदम को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि संरक्षणवादी कदमों से वैश्वीकरण के लाभों के समक्ष संकट है।

मोदी ने कहा, वैश्वीकरण से जो लाभ हुए हैं, संरक्षणवाद से उसके समक्ष संकट पैदा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जी 20 को खुलेपन की व्यवस्था को समर्थन देने तथा उसे मजबूत बनाए रखने के लिए एक सुर में बोलने की जरूरत है। वैश्विक वृद्धि और व्यापार पर एक सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से 1.3 अरब लोगों का एकीकृत बाजार सृजित होगा। उन्होंने कहा कि हमारा भारत में आर्थिक समृद्धि हासिल करने के लिए सभी की वृद्धि एवं विकास का लक्ष्य है। जीएसटी एक जुलाई से लागू किया गया है।

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