लालू-राबड़ी के आवास पर छापेमारी, सीबीआइ ने 11 घंटे तक कमरा खंगाला…जानिए क्‍या-क्‍या हुआ जब्‍त

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पटना : राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बीते बुधवार (5 जुलाई) को अपनी पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के दौरान अपने जेल जाने की आशंका कार्यकर्ताओं के सामने व्यक्त की थी. इसके ठीक एक दिन बाद ही शुक्रवार को सीबीआइ की बड़ी कार्रवाई पटना स्थित लालू प्रसाद के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर हुई.

सुबह करीब सात बजे सीबीआइ के करीब 25 अधिकारियों की विशेष टीम उनके आवास पर पहुंची और पूरे घर को सील करने के बाद गहन छापेमारी शुरू की. प्राप्त सूचना के अनुसार, इस टीम में पटना, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल के चुनिंदा अधिकारियों के साथ ही दो महिला अधिकारी भी शामिल थीं. सूत्रों के अनुसार, पहले सीबीआइ की टीम ने आवास में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव समेत अन्य सभी सदस्यों को निकाल कर बाहर बने बैठक स्थल पर बैठा दिया. इसके बाद पूरे घर की गहन तलाशी शुरू की.

एक-एक कमरे और एक-एक सामान की तलाशी ली गयी. करीब 11 घंटे तक चली इस छापेमारी में घर का ऐसा कोई कोना नहीं बचा, जहां टीम ने तलाशी नहीं ली. तलाशी के दौरान करीब छह कंप्यूटर, पांच टैब, एक दर्जन मोबाइल समेत जमीन-जायदाद के दो दर्जन कागजात जब्त किये गये. इनमें पटना में बन रहे राज्य के सबसे बड़े मॉल के भी सभी कागजात शामिल हैं. जब्त हुए सभी कागजात और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जायेगी.

जांच में कई बड़े राज और बेनाम संपत्ति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हो सकती है. यह समझा जा रहा है कि कागजात के बाद वैसी कई संपत्तियों के बारे में बड़ा खुलासा हो सकता हैं, जिनके बारे में अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आयी है.

तेजस्वी, राबड़ी समेत अन्य से घंटों पूछताछ : सीबीआइ की टीम ने तलाशी के साथ-साथ डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्व सीएम राबड़ी देवी समेत अन्य लोगों से घंटों पूछताछ की.

राबड़ी देवी से पूछताछ के दौरान महिला अधिकारी भी मौजूद थीं. इनसे सबसे पहले उस डिलाइट मार्केटिंग कंपनी के बारे में पूछताछ हुई, जिसका नाम के साथ-साथ मालिकाना हक 2014-15 में आकर बदल गया. वर्तमान में इसका नाम ‘लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी’ (लारा का मतलब लालू-राबड़ी है) कर दिया गया और इसका मालिकाना हक पहले राज्यसभा सांसद प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के नाम पर था, जो बाद में बदल कर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम पर हो गया. इसी कंपनी के नाम पर 10 प्लॉट को ट्रांसफर किया गया था, जिनमें पटना में बन रहे मॉल वाली जमीन के अलावा नयी दिल्ली, गुड़गांव, रांची समेत अन्य स्थानों पर प्लॉट शामिल हैं. कंपनी के नाम पर जमीन उस समय दान दी गयी थी, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे. उस समय यह कंपनी डिलाइट मार्केटिंग ही थी. 12-13 साल बाद इस कंपनी को ही इसकी पूरी परिसंपत्ति के साथ ही इसे राबड़ी यादव और तेजस्वी यादव के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया. इससे मनी लॉड्रिंग से लेकर अवैध या आय से अधिक संपत्ति का पूरा मामला साफ तौर पर बनता है. इसके बाद इन दोनों से आवास से जब्त कागजात के बारे में भी गहन पूछताछ की गयी.

तेजस्वी से पांच घंटे, तो राबड़ी से सात घंटे से ज्यादा देर पूछताछ

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से करीब पांच घंटे पूछताछ हुई, लेकिन पूर्व सीएम राबड़ी देवी से सात घंटे से ज्यादा देर तक पूछताछ चली. इन दोनों से तलाशी पूरी होने के बाद देर शाम फिर से काफी देर तक पूछताछ हुई. पूछताछ के दौरान सीबीआइ की टीम ने अपने साथ लाये दिल्ली में उनकी संपत्ति से जुड़े कागजात को दिखाते हुए इनके बारे में भी जानकारी एकत्र की. तेजस्वी से उनके तमाम क्रियाकलापों और जमीन से जुड़ी उनकी दखलअंदाजी पर भी पूछताछ हुई. राजनीतिक स्थिति पर भी बीच-बीच में पूछताछ की गयी. इस दौरान इन्हें चाय-नाश्ते से लेकर तमाम तरह की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया. टीम ने यह भी कहा कि जमीन और अवैध संपत्ति के तमाम डिटेल दे दीजिए, आपकी फजीहत कम होगी.

बड़े बेटे तेज प्रताप से नाॅर्मल पूछताछ

इस मामले में लालू प्रसाद के बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव से पूछताछ नहीं हुई. सीबीआइ की टीम ने उनसे बहुत साधारण स्तर पर जानकारी ली, जिसमें सामान्य तरह के सवाल थे. इस केस से संबंधित कोई जानकारी हो, तो उन्हें बताने के लिए कहा गया.

किसी तरह की गहन पूछताछ नहीं हुई. हालांकि, उनकी मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव से पूछताछ के दौरान उन्हें वहां नहीं रहने दिया गया. उन्हें बाहर निकाल कर पूछताछ शुरू की गयी. राबड़ी और तेजस्वी से अलग-अलग और एक साथ बैठ कर दोनों तरीके से पूछताछ की गयी. पूछताछ के दौरान इन्हें आपस में बात करने या किसी तरह का सलाह-मशविरा करने की इजाजत नहीं थी. हालांकि, राबड़ी देवी ने कई मौकों पर बेटों से सलाह लेने या बात करने की मांग की, लेकिन उन्हें इस तरह का कोई मौका नहीं दिया गया.

लालू थे रांची में, देर शाम लौटे पटना

लालू प्रसाद के आवास में शुक्रवार को जब सीबीआइ की छापेमारी हुई, तो उस समय लालू रांची थे. वे सीबीआइ कोर्ट में पेशी के लिए वहां गये हुए थे. उनकी गैरमौजूदगी में पूछताछ और तलाशी की यह कार्रवाई हुई है. हालांकि, इस मामले में रांची स्थित राजकीय अतिथिशाला में उनसे करीब चार घंटे तक सीबीआइ की दूसरी टीम ने पूछताछ की और कई मामलों में जवाब देने को कहा. शाम करीब सात पटना लौटे. उस समय पार्टी उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह और पूर्व मंत्री जगदानंद सिंह उनके आवास पर मौजूद थे.

पटना में तीन जगह छापे

सीबीआइ की टीम ने पटना में तीन जगहों पर छापेमारी की. लालू-राबड़ी के सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड के अलावा आर ब्लॉक स्थित विजय कोचर व विनय कोचर के होटल चाणक्या और दिल्ली के सीए मनोज अग्रवाल के एक पटना स्थित एक एसोसिएट के यहां भी छापेमारी हुई.

सरकार पर संकट नहीं, तेजस्वी पर राजद के रुख का इंतजार करेगा जदयू

पटना : राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक दल राजद के मुखिया लालू प्रसाद और विधानसभा में दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के आवास पर सीबीआइ की छापेमारी के बाद भले ही बिहार की राजनीति में भूचाल-सा दिख रहा हो, लेकिन महागठबंधन की सरकार पर फिलहाल कोई खतरा नहीं दिखता.

वैसे राजद ने इस छापेमारी को गंभीरता से लिया है. राजद के वरीय नेताओं ने देर रात तक मंथन किया. इधर, सत्ताधारी दल जदयू उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सीबीआइ केस में अभियुक्त बनाये जाने के बाद उनके भविष्य को लेकर राजद के रुख के इंतजार करेगा. जदयू नेताओं को इस संवेदनशील मामले पर फिलहाल संयम बरतने को कहा गया है. जदयू का मानना है कि संभवत: इस मामले में पर राजद अपने स्टैंड से जल्द ही सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को अपनी भावनाओं से अवगत करायेगा. इसके बाद ही कोई रणनीति बन पायेगी. शुक्रवार की देर शाम लालू प्रसाद के रांची से पटना पहुंचने के पहले पार्टी कोर कमेटी की बैठक 10 सर्कुलर रोड पर हुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बरसने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह और लालू-राबड़ी के पूरे 15 साल के शासनकाल में मंत्री रहे पूर्व सांसद जगदानंद सिंह पहुंचे.

दोनों नेताओं ने मंत्रणा की. अंदर के सूत्रों ने बताया कि फिलहाल संकट की इस घड़ी में उपमुख्यमंत्री के इस्तीफे पर कोई संभावना नहीं बनती दिख रही है. राजद के थिंक टैंक में शामिल लोगों ने इस मसले पर कानूनी राय-मशविरा भी किया है. उनकी नजर में भी कानूनी तौर पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के इस्तीफे की संभावना भी नहीं बनती. सीबीआइ इस केस में यदि आरोपपत्र दायर करता है और तेजस्वी यादव के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर देता है, तो उन्हें कोर्ट में सरेंडर करना होगा. इस समय उनके इस्तीफे का सवाल कानूनी तौर पर उठ सकता है. वर्तमान में तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआइ ने मामला ही दर्ज किया है. केंद्र सरकार में उमा भारती ऐसी मंत्री हैं, जिनके खिलाफ सीबीआइ का मुकदमा लंबित है. सीबीआइ की छापेमारी के बाद सरकार के मुखिया नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे के सवाल पर कोई भी बात नहीं कही है. यहां तक कि उनकी पार्टी जदयू की ओर से भी कोई टीका-टिप्पणी नहीं हुई है.

गठबंधन का तीसरा सहयोगी कांग्र्रेस ने भी अपनी ओर से उपमुख्यमंत्री के इस्तीफे या सरकार की सेहत को लेकर कोई बयान जारी किया है. ऐसे में नीतीश सरकार की सेहत पर इस छापेमारी का कोई असर नहीं दिख रहा. वैसे महागठबंधन की सरकार में 80 विधायकों वाला राजद सबसे बड़ा दल है. जदयू के सदस्यों की संख्या 70 है और कांग्रेस के 27 विधायक हैं. इधर, छापेमारी के बाद जदयू ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है. पार्टी के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजगीर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. वहीं, अपने सभी प्रवक्ताओं को जदयू ने संयम बरतने को कहा है.

चिल्लड़ व खटमल जैसे काटनेवालों को जनता की दवाई से ठीक कर देंगे : लालू

पटना : सीबीआइ की छापेमारी के बाद पटना लौटे राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर जम कर हमला किया. उन्होंने कहा कि वह चिल्लड़ और खटमल जैसे लोगों के काटने से नहीं डरते हैं. वह इस तरह के लोगों को पब्लिक की दवाई से ठीक कर देंगे. लालू प्रसाद ने खुली चुनौती देते हुए कहा-‘सुनो, अमित शाह और नरेंद्र मोदी, मैं फांसी पर लटक जाऊंगा, पर तुम्हारा अहंकार चूर-चूर कर दूंगा.

आप लोगों को हमने बिहार से लौटाया है.’ उन्होंने फिर दोहराया कि बिहार में महागठबंधन है. इस केस से महागठबंधन को कोई लेना-देना नहीं है.

रांची में चारा घोटाले के एक केस में कोर्ट में पेशी के बाद शुक्रवार की शाम पटना लौटे लालू प्रसाद ने प्रेस कॉन्फेंस में कहा कि भाजपा के मंसूबे को 2019 मेें पूरा नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा, छापेमारी में सीबीआइ का उतना दोष नहीं है, जितना नरेंद्र मोदी और अमित शाह का है.

सीबीआइ वाले कह रहे थे कि उन्हें ऊपर से आदेश मिला है. नरेंद्र मोदी ने जितने भी इनकम टैक्स और सीबीआइ के हथियार थे, उन्हें चला लिया. दिल्ली का मोदी जो पेपर देता है, यहां का मोदी (सुशील कुमार मोदी) उसी को यहां बोलता है. पूरा दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है. इसी के तहत हमारे घर का सर्च कराया गया है. उन्होंने कहा कि जब सीबीआइ की टीम यहां आयी, तो हमने पूछा कि किस मामले में जांच करने आयी है. मालूम हुआ कि आइआरसीटीसी मामले में जांच की जायेगी. कुछ मीडिया ने यह खबर दिन भर चलायी कि राबड़ी देवी से 17 घंटे पूछताछ की गयी. तेजस्वी प्रसाद यादव से आठ घंटे पूछताछ हुई. लालू प्रसाद को रांची के गेस्ट हाउस में डिटेन कर लिया गया है. हमने रांची से ही परिवार वालों को कह दिया कि वे सीबीआइ के साथ सहयोग करें. जांच के दौरान जो भी इनवेंट्री तैयार की जाये, उसकी सीबीआइ टीम के हस्ताक्षर युक्त फोटो काॅपी रख ले लेना. कहीं, वे बाद में बदल नहीं जाएं. उन्होंने बताया कि परिवार को यहां तक कहा कि सीबीआइ की टीम की गाड़ी को अंदर बुला कर विदा करना. उनके पास सिक्युरिटी नहीं हो, तो अपनी सिक्युरिटी लगा देना. उन्होंने कहा कि 1999 में आइआरटीसी का गठन किया गया और यह 2002 में फंक्शनल हुआ.

2003 में एजेंसी ने रांची, हावड़ा और दिल्ली के अपने यात्री निवास और होटल को हैंडओवर किया. 31 मई, 2004 को मैं रेल मंत्री बना. वर्ष 2006 में ओपेन टेंडर किया गया. सबसे अधिक बोली लगानेवाले को इसे दिया गया. तब एक करोड़ 15 लाख में टेंडर दिया गया. इसमें होटल की जगह कैसे जमीन मिल गयी. जिस समय टेंडर किया गया, उस समय राबड़ी देवी पब्लिक सर्वेंट नहीं थीं और तेजस्वी प्रसाद यादव नाबालिग थे. तब कैसे केस कर दिया. ये लोग महागठबंधन में फूट डालना चाहते हैं. गांव-गांव के लोगों को 27 अगस्त की रैली में पटना बुला रहे हैं, उसमें भंडाफोड़ करेंगे कि कैसे हम पर और बच्चों पर भी केस किया. झूठ का केस किया है

तेजस्वी को करें बरखास्त

वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू परिवार पर सीबीआइ छापे के बाद अब तो मुख्यमंत्री को चुप्पी तोड़नी चाहिए. अब भी अगर तेजस्वी व तेज प्रताप इस्तीफा नहीं देते हैं, तो नीतीश कुमार को उन्हें बरखास्त कर देना चाहिए.

इस्तीफा नहीं दूंगा : तेजस्वी

प्रेस काॅन्फ्रेंस में लालू प्रसाद की बगल में बैठे तेजस्वी यादव एक न्यूज चैनल की महिला पत्रकार के सवाल पर भड़क उठे. तेजस्वी ने कहा कि आप यहां ड्रामा कर रहे हो. इस पर लालू ने उन्हें रोका और कहा कि न्यूज क्यों बना रहे हो. पत्रकार ने उनसे सवाल किया था कि क्या आप इस्तीफा देंगे. इस पर तेजस्वी कहा कि नहीं देंगे इस्तीफा, किस बात पर दें इस्तीफा.

मुख्यमंत्री राजगीर में, सोमवार को लौटेंगे पटना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को पटना लौटेंगे. राजगीर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राजद अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आवास पर सीबीआइ छापेमारी की खबरों पर नजर बनाये रखी.

सूत्रों ने बताया कि छापेमारी की खबर जैसे ही मीडिया में आयी, मुख्यमंत्री ने आला अधिकारियों को राजगीर तलब किया. लेकिन, देर रात तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई. सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री को राज्य में अलर्ट जारी करने की अधिकारियों ने सूचना दी है. सोमवार को उनके पटना पहुंचने के बाद ही सरकार का इस मामले में रुख स्पष्ट हो पायेगा. राजगीर सर्किट हाउस में ठहरे नीतीश ने शाम पांडू पोखर इलाके में शाम काे सैर भी किया.

सीबीआइ कर रहा है अपना काम

केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ सीबीआइ छापों में सरकार या भाजपा की कोई भूमिका नहीं है.सीबीआइ अपना काम कर रही है और कानून में उसे प्रदत्त शक्तियों के तहत कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने पूछा कि राजनीतिक बदले की भावना क्या है? इसमें भाजपा कहां है?

मुकदमे में इनके नाम

लालू प्रसाद, तत्कालीन रेल मंत्री, 10 सर्कुलर रोड, पटना
राबड़ी देवी,10 सर्कुलर रोड, पटना
तेजस्वी प्रसाद यादव, 10 सर्कुलर रोड, पटना
सरला गुप्ता (प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी), 18 तीन मूर्ति लेन, नयी दिल्ली
विजय कोचर, डी-4,अंसल विला, सतबारी नयी दिल्ली
विनय कोचर, ई-1/ 789 अंसल विला, सतबारी साउथ दिल्ली
मेसर्स लारा प्रोजेक्ट, न्यू फ्रेंडस कॉलोनी, साउथ दिल्ली
पीके गोयल, तत्कालीन एमडी, आइआरसीटीसी, जी-13/ 2-डीएलएफ फेज-2, गुड़गांव

कम कीमत पर भूमि ले हुआ सौदा

सीबीआइ के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना कहा कि रेलवे होटल के निविदा में घोटाले को लेकर प्रारंभिक जांच के बाद पांच जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया और शुक्रवार को 12 ठिकानों पर छापेमारी की गयी. सीबीआइ ने होटलों के रखरखाव के लिए निविदाएं देने में कथित अनियमितताओं के मामले में यह छापेमारी की है.

लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते बीएनआर ग्रुप के रांची और पुरी के होटलों के रखरखाव का जिम्मा सुजाता होटल लिमिटेड को दिया. बदले में सुजाता होटल लि ने पटना में दो एकड़ जमीन डिलाइट कंपनी को सौंप दी. बाद में डिलाइट कंपनी के सभी शेयर लालू परिवार की लारा कंपनी को सौंप दी. 32 करोड़ की जमीन लारा प्रोजेक्ट को सर्कल रेट से कम सिर्फ 65 लाख में डिलाइट कंपनी ने 2010-14 के दौरान सौंप दी.
इसे देखते हुए लालू यादव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश का केस दर्ज किया गया है. धारा 420,120बी के अलावा प्रीवेंशन ऑफ करपश्न एक्ट की धारा 13(2)और13(1)(डी) के तहत लालू, राबड़ी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. अगर आरोप साबित होते हैं तो इस मामले में 7-10 साल की सजा हो सकती है. गौरतलब है कि डिलाइट कंपनी की डायरेक्टर पूर्व कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्री प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता थी.

शिकंजे में लालू
1999
आइआरसीटीसी का गठन.
18 सितंबर, 2001
रेलवे बोर्ड का फैसला, होटल चलाने का काम आइआरसीटीसी को देंगे.
03 मार्च, 2004
आइआरसीटीसी और रेलवे के बीच एमओयू
मई, 2004
लालू प्रसाद

रेल मंत्री बने.

30 नवंबर, 2004

रेलवे बोर्ड सचिव ने आइआरसीटीसी के रांची और पुरी के होटल के टेकओवर की सूचना लालू को दी.
25 फरवरी, 2005

कोचर बंधु ने पटना में तीन एकड़ जमीन 10 सेल डीड के सहारे कंपनी मेसर्स डिलाइट को 1.47 करोड़ रुपये में ट्रांसफर किया, जबकि इसका सर्किल रेट 1.93 करोड़ रुपये था.

25 अगस्त, 2005
रेलवे बोर्ड के सचिव ने रांची और पुरी में होटल ट्रांसफर से संबंधित बोर्ड मीटिंग के मिनट्स भेजे.
10 जुलाई, 2006
आइआरसीटीसी के निदेशक ने प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत बीएनआर होटल के विकास का प्रस्ताव भेजा.
16 सितंबर, 2006
रेलरत्न होटल के संचालन के टेंडर में बीएनआर का उल्लेख नहीं.
24 अक्तूबर, 2006
एक शुद्धिपत्र जारी करके बीएनआर होटल को शामिल किया गया.
15 नवंबर, 2006
दूसरा शुद्धिपत्र जारी कर टेंडर की शर्त को बदला तािक कोचर बंधु को फायदा हो.
27 दिसंबर, 2006
बीएनआर होटल रांची और पुरी का टेंडर कोचर बंधु को मिल गया.
मई 2010- फरवरी 14

प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कंपनी डिलाइट कंपनी प्रालि ने लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी को दो एकड़ जमीन ट्रांसफर किया.
… और सीबीआई ने 05 जुलाई, 2017 को केस दर्ज किया.

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