UN के लिए ऐतिहासिक दिन, 120 देशों ने परमाणु हथियारों के बहिष्कार को मंजूरी दी

0
76

शुक्रवार का दिन संयुक्त राष्ट्र (UN) के लिए काफी अहम दिन था। यहां 120 से अधिक देशों ने परमाणु हथियारों के बहिष्कार की एक संधि को मंजूरी दी। परमाणु हथियारों को खत्म करने की दिशा में यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रयास है। उधर, न्यूक्लियर राष्ट्रों ने पहले ही इस बैठक के बहिष्कार का ऐलान कर दिया था। दुनिया के जिन 9 देशों- रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, चीन, फ्रांस, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तरी कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं, उनमें से कोई भी इस संधि का समर्थन नहीं कर रहा है। इन देशों के कई सहयोगी भी इस बैठक से दूर रहे।

इस UN सम्मेलन की अध्यक्षता कर रही एलेन गोम्ज ने समझौते को ऐतिहासिक बताया। 122 देशों ने जहां इसके समर्थन में मतदान किया, वहीं केवल नीदरलैंड्स ने इसका विरोध किया। सिंगापुर वोटिंग में शामिल ही नहीं हुआ। गोम्ज ने कहा, ‘परमाणु हथियारों से इस दुनिया को आजाद करने की दिशा में हमने आज पहला बीज बोया है। हम आज अपने बच्चों से कह रहे हैं कि हां, परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का सपना साकार हो सकता है। अगस्त 1945 में जब जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर आणविक बम गिराए गए थे, उसके बाद पिछले 70 सालों से दुनिया इस तरह के कानून का इंतजार कर रही थी।’

हिरोशिमा हमले के समय 13 साल के रहे सेतसुको थुरलो ने बताया, ‘अमेरिका द्वारा बम गिराए जाने के बाद जो लोग वहां जिंदा बचे, वे पूरी जिंदगी बस इन्हीं कोशिशों में लगे रहे कि दुनिया के किसी भी अन्य इंसान को कभी इस तरह के अत्याचार का सामना न करना पड़े।’ UN में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के राजदूतों ने एक साझा बयान जारी कर कहा कि उनका देश कभी इस संधि का हिस्सा नहीं बनना चाहता। बयान में आगे कहा गया है, ‘यह समझौता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू को नजरंदाज करती है।’ नीदरलैंड्स के अलावा सभी NATO सदस्य देशों ने इस संधि का बहिष्कार किया। नीदरलैंड्स से पास अपना कोई परमाणु हथियार तो नहीं है, लेकिन उसकी जमीन पर अमेरिका के न्यूक्लियर हथियार जरूर तैनात हैं। नीदरलैंड्स की संसद ने सरकार से इस सम्मेलन में अपना प्रतिनिधि दल भेजे जाने की अपील की थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here