बिहार: संकट में महागठबंधन, ‘गांठ’ हुई और सख्त

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पटना। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर महागठबंधन में मची रार से बिहार में सियासी तापमान चरम पर है। एक ओर लालू ने एलान कर दिया है कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे। उनकी तल्खी एेसी थी कि उन्होंने यह कहा कि उसे जनता ने जिताया है। इसका जवाब देते हुए जदयू ने भी कहा है कि जनता सत्ता देती है तो सत्ता से उतारकर बाहर का रास्ता भी दिखा देती है।

इन सब मामलों पर नीतीश कुमार ने अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है लेकिन उनके नेतागण उनकी साफ-सुथरी छवि से किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। यह सीएम की यूएसपी है और अपनी छवि के कारण ही वो जनता के बीच मशहूर हैं।

उनका कहना है कि भ्रष्टाचार को नीतीश ने कभी बर्दाश्त नहीं किया है। अपने उपर भी जब आरोप लगे तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया था, अब जिसपर भ्रष्टाचार का एेसा आरोप लगा है वो अपना आरोप साक्ष्य प्रस्तुत कर खारिज करे।

वहीं लालू यादव ने जदयू के बयानों से आहत होकर कहा है कि अब हम 27 अगस्त को होने वाली रैली में ही सबको जवाब देंगे। जदयू ने लालू को बुजुर्ग कह दिया और कहा कि बुजुर्गियत की वजह से वो एेसा अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं।

लालू और नीतीश दोनों ही राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। दोनों जानते हैं कि महागठबंधन तोड़ने से नुकसान दोनों का है लेकिन महागठबंधन में बने रहना भी अब मुश्किल नजर आ रहा है। दोनों ने ना चाहते हुए भी साथ मिलकर गठबंधन बनाया लेकिन सबको पता है कि दोनों दलों की सोच अलग है।

दोनों के सिद्धांत अलग हैं, जहां जदयू भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की हिमायती है तो वहीं राजद का एक ही लक्ष्य है सांप्रदायिक शक्तियों से मुकाबला। राजनीतिक मामलों से हटकर नीतीश ने सामाजिक सुधार के कई कदम उठाए जिससे जनता उनके कामों की प्रशंसा करते नहीं थकती।

लेकिन कुछ मुद्दों को लेकर उनकी सोच महागठबंधन के घटक दलों से अलग है जिसकी वजह से गाहे-बगाहे गठबंधन में दरार की बातें सामने आती रही हैं और अब हालात एेसे हो गए हैं कि आर-पार की लड़ाई छिड़ी हुई है। लेकिन दोनों दल महागठबंधन तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, दोनों को डर है कि….

-लालू ने अगर गठबंधन तोड़ा तो बीजेपी काे सीधा फायदा होगा और अगले चुनाव के लिए उसे अपनी जमीन तैयार करने का मौका मिलेगा। लालू को अच्छी तरह याद है कि 2010 में जब आरजेडी ने अलग चुनाव लड़ा था तो उसे महज 22 सीटें मिली थीं। इसीलिए राजद महागठबंधन का साथ छोड़ने की पहल नहीं करेगी।

-अगर राजद ने समर्थन वापस लिया तो नीतीश को बीजेपी सपोर्ट कर सकती है उसके पास 58 विधायक हैं जो नीतीश की सरकार को बचा सकते हैं। लेकिन जदयू के सामने मुश्किल यह है कि उनके पास ऐसा भी वोटबैंक है, जो बीजेपी के साथ आने से दूर हो सकता है वो लालू को पसंद करता है लेकिन बीजेपी को नहीं।

– एेसे में अभी की स्थिति भी ठीक हो सकती है अगर तेजस्वी खुद इस्तीफा दे दें। जेडीयू नेताओं का कहना है कि शुरुआती जांच के बाद ही सीबीआई केस दर्ज करती है। लिहाजा, तेजस्वी को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए।

– कहा जा रहा है कि अगर तेजस्वी खुद पद नहीं छोड़ते हैं तो नीतीश उन्हें सीबीआई के चार्जशीट दायर करने से पहले या बाद में अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर सकते हैं।

– सीबीआई ने 5 जुलाई को लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 7 जुलाई को सुबह सीबीआइ ने लालू से जुड़े 12 ठिकानों पर छापे मारे। जांच एजेंसी के मुताबिक 2006 में जब लालू रेलमंत्री थे, तब रांची और पुरी में होटलों के टेंडर जारी करने में गड़बड़ी की गई।

– इसके बाद तेजस्वी के इस्तीफे की मांग उठने लगी। मामला तब गरमा गया जब नीतीश कुमार की अगुआई में इस मसले पर 11 जुलाई को जेडीयू की अहम बैठक हुई।

– इससे पहले मई से ही लालू और उनके परिवार के खिलाफ 1000 करोड़ की बेनामी प्रॉपर्टी के आरोपों की इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जांच कर रहा था। मीसा और उनके पति के ठिकानों पर भी छापे मारे जा चुके थे।

– तेजस्वी पर एफआईआर के बाद बैठक के बाद जेडीयू ने कहा कि जिन पर आरोप लगे हैं, वे जनता के सामने फैक्ट्स के साथ जवाब दें। जेडीयू ने कभी करप्शन के मामले में समझौता नहीं किया है।

-फिर चाहे वो जीतनराम मांझी का मामला हो या अनंत सिंह का। नीतीश कुमार अपनी छवि और भ्रष्टाचार की समस्या से समझौता नहीं करेंगे।

– जेडीयू-आरजेडी के अलावा कांग्रेस भी महागठबंधन का हिस्सा है। शुक्रवार को सोनिया गांधी ने लालू-नीतीश को फोन किया। कहा गया कि उन्होंने दोनों से महागठबंधन का ध्यान रखने की बात कही।

– हालांकि, लालू ने कहा कि तेजस्वी या सुलह के मसले पर सोनिया से मेरी कोई बात नहीं हुई। नीतीश से हुई हो तो मैं नहीं जानता। उन्होंने साफ किया कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देने वाले।

– टकराव दोबारा तब बढ़ गया कि जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि आरजेडी तथ्य पेश करे। वह 80 विधायक रखने की अकड़ ना दिखाए। आरजेडी यह ना भूले कि 2010 के चुनाव में उसके 22 ही विधायक जीते थे।

-2015 के चुनाव में उसकी सीटें इसलिए बढ़ीं क्योंकि ईमानदार और भरोसेमंद चेहरे के रूप में नीतीश कुमार महागठबंधन की अगुआई कर रहे थे।

– बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। आरजेडी सबसे बड़ा दल है। उसके पास 80 विधायक हैं। जेडीयू दूसरे नंबर पर है जिसके 71 विधायक हैं। महागठबंधन में शामिल तीसरे दल कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं।

– बीजेपी विपक्ष में है। उसके पास 53 सीटें हैं। बीजेपी के सहयोगियों की सीटें मिलाकर ये संख्या 58 हो जाती है।

जानें क्या है पूरा मामला ?

आपको बता दें कि तेजस्वी के खिलाफ ये मामला साल 2004 का है, जब वो 14 साल के थे और उनके पिता रेलमंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के दो होटल बनवाने का लाइसेंस एक निजी कंपनी को दिलाया और उसके एवज में उन्हें पटना में तीन एकड़ जमीन दी गई।

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