महागठबंधन में सुलह पर अब भी सस्पेंस

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बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद भले ही विवाद शांत होता दिख रहा है, लेकिन महागठबंधन में स्थिति पूरी तरह सहज नहीं हुई है। आरजेडी के नेता इस मुलाकात के बाद दावा कर रहे हैं कि संवादहीनता समाप्त होते ही सबकुछ सामान्य हो गया है। पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने बुधवार को लालू प्रसाद से उनके आवास पर मुलाकात के बाद दावा किया कि तेजस्वी और नीतीश की मुलाकात बाद सभी विवाद समाप्त हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कहीं कोई विवाद था ही नहीं, यह तो केवल संवादहीनता थी। इधर मुलाकात के बाद जेडीयू के नेताओं ने चुप्पी साध ली है। जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह से इस संदर्भ में पूछने पर कहा कि अभी इस मामले पर वह कुछ नहीं बोलेंगे। जेडीयू के एक अन्य प्रवक्ता अजय आलोक इतना जरूर कहते हैं कि मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल का कोई भी सदस्य मिल सकता है। इसमें कोई खास बात नहीं है। जेडीयू के एक नेता ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर कहा, ‘पार्टी अभी भी अपनी मांगों पर कायम है। तेजस्वी को सबूत के साथ जनता के सामने आरोपों पर सफाई देनी ही होगी, अपनी संपत्ति के स्रोत सामने रखने ही होंगे।’ मंगलवार देर शाम बिहार मंत्रिमंडल की बैठक के बाद तेजस्वी ने नीतीश कुमार से मुलाकात की थी और दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई थी। इस मुलाकात के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव ने नीतीश कुमार की चुप्पी पर चुटकी लेते हुए कहा है कि नीतीश अपने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति से समझौता कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जेडीयू को नीतीश और तेजस्वी की हुई बातों को सार्वजनिक करना चाहिए। गौरतलब है कि सीबीआई ने लालू प्रसाद और बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं उनके बेटे तेजस्वी यादव सहित उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने 7 जुलाई को पटना सहित देशभर के 12 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह मामला वर्ष 2004 का है, जब लालू प्रसाद देश के रेलमंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के दो होटलों को एक निजी कंपनी को लीज पर दिलवाया और उसके एवज में उन्हें पटना में 3 एकड़ जमीन दी गई। आरोपों के बाद जेडीयू ने तेजस्वी से जनता के सामने पर तथ्यों के साथ सफाई देने की मांग रखी है।

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