ओएनजीसी खरीदेगी एचपीसीएल में 51 फीसदी हिस्सा

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सरकार ने आज हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी उपक्रम ओएनजीसी को बेचने की मंजूरी दे दी। इस बिक्री से सरकार को विनिवेश मद में करीब 30,000 करोड़ रुपये और मिल जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस हिस्सा बिक्री को सैद्घांतिक मंजूरी दी गई। वरिष्ठï अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि अब ओएनजीसी, एचपीसीएल और सरकार फैसला करेंगी कि इस सौदे पर आगे कैसे बढ़ा जाए। एक बार एचपीसीएल की हिस्सा बिक्री की प्रक्रिया का फैसला हो जाए, उसके बाद कैबिनेट होने वाले वास्तविक सौदे को मंजूरी देगी।

अधिकारी ने बताया कि एचपीसीएल ओएनजीसी की सहायक कंपनी के रूप में अलग इकाई बनी रहेगी। इससे एचपीसीएल और मेंगलोर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) के विलय की भी संभावना बनती है। ओएनजीसी के सीएमडी डी के सराफ ने कहा कि इस बारे में फैसला एमआरपीएल और एचपीसीएल के निदेशक मंडल लेंगे। प्रमोटर के नाते ओएनजीसी उनका फैसला मानेगी।

ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण किए जाने पर अल्पांश शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाना पड़ सकता है। हालांकि सराफ ने कहा कि ओएनजीसी को ओपन ऑफर लाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार में बैठे अधिकारियों ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि क्या ओएनजीसी को ओपन ऑफर न लाने की छूट दी गई है। सेबी की अधिग्रहण संहिता के अनुसार अगर कोई कंपनी किसी दूसरी कंपनी में 25 फीसदी से अधिक हिस्सा लेती है या किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रबंधन का अधिग्रहण करती है तो उसे उन्हीं शर्तों पर ओपन ऑफर लाना पड़ेगा जिन पर उसने अधिग्रहण किया है। हालांकि जिस कंपनी का अधिग्रहण किया जा रहा है, उसमें सार्वजनिक हिस्सेदारी 25 फीसदी से नहीं घटनी चाहिए। सूचीबद्धता के लिए 25 प्रतिशत की शर्त जरूरी है।

वित्त वर्ष 2017-18 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार को एकीकरण, विलय और अधिग्रहण के जरिये सरकारी उपक्रमों को मजबूत करने की संभावना दिख रही है। उन्होंने तेल और गैस क्षेत्र का उदाहरण भी दिया। जेटली ने कहा, ‘हम सार्वजनिक क्षेत्र में एक दिग्गज तेल कंपनी बनाने का प्रस्ताव कर रहे हैं। यह कंपनी अंतरराष्ट्रीय और देश के घरेलू निजी क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों के प्रदर्शन से मुकाबला कर सकेगी।’

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