114 पाकिस्‍तानी बने भारतीय, बताया मुल्‍क छोड़ने को क्‍यों हुए मजबूर

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नई दिल्‍ली। अपना मुल्‍क छोड़ना किसी के लिए भी इतना आसान नहीं होता, मगर जिस मिट्टी में खेले-कूदे पले-बढ़ें उसे छोड़कर किसी और देश में बसने के फैसले के पीछे भी जरूर कुछ खास वजह होगी। तभी तो 114 पाकिस्‍तानी भारतीय बन गए हैं, इनमें नंदलाल मेघानी, डॉ. विशनदास मनकानी और किशनलाला अडानी भी शामिल हैं। उन्‍होंने भारत की नागरिकता मिलने पर खुशी जताई है और साथ ही यह भी बताया है कि वे पाकिस्‍तान छोड़ने के लिए क्‍यों मजबूर हुए।

अहमदाबाद मिरर के अनुसार, घाटलोडिया में रहने वाले 50 वर्षीय नंदलाल मेघानी ने बताया कि वह 16 साल पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अपनी पत्नी और बेटी के साथ भारत आए थे। यहां नई शुरुआत करने के लिए उन्‍होंने अपना कारोबार और घर सब कुछ बेच दिया। वह भारत के लोगों की आम जिंदगी से बहुत प्रभावित थे और इसलिए यहां आकर नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर दिया। भारत में शरण लेने की उनकी प्रमुख वजह पाकिस्तान में अपराध की दर उच्‍च है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान में बढ़ते आतंकवाद के मद्देनजर अपने मुस्‍लिम दोस्‍तों को भी यहां आने के लिए प्रेरित किया।

पाकिस्‍तान से आए 59 वर्षीय किशनलाल अडानी ने बताया कि वह 2005 में अपनी पत्‍नी और बेटों के साथ भारत आए थे। बहुओं समेत एक साथ भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की उनकी योजना है। अडानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थारपकड़ कस्बे में जनरल स्टोर चलाते थे। भारत में अपने बेटों के साथ उन्होंने बर्तन की दुकान शुरू की है। हालांकि वह अब भी अपने मुल्‍क को याद करते हैं। उन्‍होंने भावुक होते हुए कहा, मैं अब भी अपने उस घर और दोस्तों को याद करता हूं, जिन्हें छोड़कर हम यहां आ गए हैं। हालांकि आतंकवाद के चलते हमारे लिए बचे रहना मुश्किल हो गया था। जब हम बाहर निकलते थे तो सोचते थे कि वापस घर आ भी पाएंगे या नहीं।’

वहीं पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले में जिलाधिकारियों को अधिकार दिए जाने की तारीफ करते हुए विशनदास मनकानी ने बताया कि 2001 में वह अपने चार बच्चों के साथ भारत आए थे। मनकानी ने कहा, मुझे और मेरी पत्‍नी को 2016 में भारतीय नागरिकता मिली थी। हम भारत में हुए विकास से प्रभावित हैं, जो पाकिस्तान में नहीं दिखता। इसके अलावा भारत में सुरक्षित माहौल भी हमें यहां खींच लाया।’

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