डोकलाम में तनाव: अमेरिका को पाले में करने की चीन की उम्मीदें टूटीं

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डोकलाम क्षेत्र के विवाद को लेकर भारत से तनातनी मोल ले रहे चीन की उम्मीदों को झटका लगा है। चीन को लगता था कि इस मुद्दे पर उसे पश्चिमी मुल्कों खासतौर पर अमेरिका का साथ मिलेगा।वॉशिंगटन में आयोजित सालाना यूएस-चीन इकॉनमिक डायलॉग बेनतीजा रहने की वजह से अब चीन के मंसूबों पर पानी फिर गया है। बता दें कि चीन आरोप लगा रहा है कि भारतीय सेना सीमा पार करके उनके इलाके में घुस आई है। चीन के राजनयिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही साबित करना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी वाला चीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर आक्रामक नहीं है। चीन के लिए पाकिस्तान जैसे देशों को डोकलाम के मुद्दे पर अपने पाले में करना आसान है, जो उसकी आर्थिक मदद या संसाधनों पर आश्रित हैं। बैठक में अमेरिकी पक्ष ने डिमांड की थी कि चीनी एक्सपोर्टरों द्वारा उत्पन्न व्यापारिक कमी को पाटा जाए। इसके अलावा, अमेरिका ने कुछ दूसरी व्यावसायिक मांगें भी की थीं। दोनों देशों के अधिकारी कार्यक्रम के बाद एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले थे, लेकिन उसे भी अचानक से कैंसल कर दिया गया। वॉशिंगटन स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ चाइना अमेरिका स्टडीज के सीनियर स्पेशलिस्ट सौरभ गुप्ता ने बताया, ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए कैंसल कर दी गई क्योंकि बताने के लिए कुछ नहीं था। मीटिंग के जरिए कुछ भी हासिल नहीं किया जा सका। अमेरिका ने चीन पर काफी सख्त रवैया अपनाया और मुझे लगता है कि चीन भी अड़ गया है।’

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