शरद यादव का बयान – जब रास्ता नहीं सूझता तो जनता के बीच जाता हूं – के क्या हैं मायने?

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नयी दिल्ली : जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता शरद यादव के राजनीतिक कदम पर देश की निगाह टिकी है. समाजवादी राजनीति में बदलाव की आहट भी सुनायी पड़ रही है. शरद यादव दस अगस्त को पटना आयेंगे और वहां से मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर सहित कई जगहों की यात्रा करेंगे. उनकी यह तीन दिनों की यात्रा होगी, जो बदलते राजनीतिक समीकरण के मद्देनजर काफी अहम होगी. बिहार की राजनीति में भाजपा व नीतीश कुमार के गठजोड़ के शरद यादव ने अपनी भावी रणनीति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन हर एक-दो दिन में वे कुछ नये संकेत दे रहे हैं.

शरद यादव ने कहा है कि जब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझता है तो वे जनता के बीच जाते हैं और जनता ही उन्हें रास्ता बताती है. शरद यादव का तीन दिन का बिहार दौरा इसी की कड़ी है. बिहार से दिल्ली लौटने पर वे दिल्ली के प्रसिद्ध वीपी हॉउस में खुद के द्वारा 17 अगस्त को बुलाये गये सम्मेलन की तैयारी के अंतिम चरण में जुट जायेंगे. शरद यादव ने यह कहा है कि उन्होंने यह सम्मेलन किसान आत्महत्या, भीड़ द्वारा आम आदमी की पीट-पीट कर हत्या किये जाने के मुद्दे पर बुलाया है.’

समाजवादी राजनीति में ऐसे सम्मेलन बुलाना अपनी पैठ टटोलने व भविष्य की राजनीति की भूमिका तैयार करने के लिए हमेशा से अहम रही है. और, इस सम्मेलन के ठीक दो दिन बाद 19 अगस्त को पटना में जदयू कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें शरद यादव शामिल होंगे. शरद ने इस सम्मेलन में शामिल होने की स्वयं पुष्टि की है और कहा है कि पार्टी फोरम में ही वे अपनी बात रखेंगे. वहीं, उनकी पार्टी ने पहले ही कहा है कि शरदजी हमारे वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें जो कुछ कहना है वह अपनी बात पार्टी फोरम में रख सकते हैं.

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