अमेरिका में ‘प्रॉक्सी वोटिंग’ का अधिकार मिलने पर खुश हैं प्रवासी भारतीय

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वाशिंगटन: अमेरिका में प्रवासी भारतीय समुदाय ने विदेश में रह रहे भारतीयों को प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार देने के भारतीय कैबिनेट के हालिया फैसले का स्वागत किया है. ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ऑरिजिन (जीओपीआईओ) के अध्यक्ष थॉमस अब्राहम ने कहा, ‘‘हम इस कदम का स्वागत करते हैं.’’ अब्राहम पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से ग्रीन कार्ड धारक हैं. इसके बावजूद वह अब भी एक भारतीय नागरिक हैं.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत सरकार का निर्णय उनके जैसे लोगों के लिए एक सपना साकार होने की तरह है. भारत निर्वाचन आयोग का अनुमान है कि देश के बाहर करीब एक करोड़ 60 लाख भारतीय नागरिक रह रहे हैं जिनमें से 70 प्रतिशत लोग मतदान करने के पात्र हैं. उनकी एक बड़ी संख्या पश्चिम एशिया में रहती है. अमेरिका में आठ लाख से 15 लाख भारतीय रहते हैं. इनमें बड़ी संख्या में युवा हैं जो या तो यूनिवर्सिटी छात्र हैं या एन 1बी वीजा धारक हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एक छात्र संजय सिंह ने कह, ‘‘यह बहुत अच्छा कदम है लेकिन अभी मुझे यह पता करना है कि इसकी प्रक्रिया क्या है.’’ ऑनलाइन और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रॉक्सी वोटिंग की सूचना पाने वाले सिंह का मानना है कि यह कदम सर्वाधिक सार्थक तभी हो सकता है यदि प्रवासी भारतीयों को ऑनलाइन मतदान की अनुमति दी जाए.

न्यूयार्क में केरल सेंटर के संस्थापक अध्यक्ष ई एम स्टीफन ने कहा, ‘‘अभी ऐसा संभव नहीं होगा. प्रॉक्सी वोटिंग के दुरुपयोग की आशंका अत्यधिक है.’’ भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यूयार्क और वाशिंगटन में भारतीय अमेरिकी समुदाय से हाल में बातचीत की थी. इस बैठक में मौजूद अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन इसकी प्रक्रिया के संबंध में कई लोगों ने सवाल पूछे. बैठक में मौजूद कई लोगों ने कहा कि विदेशी भारतीय नागरिक (ओसीआई) को दोहरी नागरिकता में बदल दिया जाये. जीओपीआईओ ने कहा कि भारतीय संसद में प्रवासी भारतीयों को उचित प्रतिनिधित्व मुहैया कराया जाना चाहिए.

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