ऋद्धिमान साहा बोले-स्‍लेजिंग नहीं है जरूरी, इस दिग्‍गज क्रिकेटर की दी मिसाल

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कोलंबो: टीम इंडिया के टेस्‍ट में विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा नहीं मानते कि क्रिकेट में विपक्षी टीम के खिलाड़ि‍यों को गुस्‍सा दिलाने के लिए छींटाकशी (स्‍लेजिंग) जरूरी है. उन्‍होंने कहा कि यह बिल्‍कुल जरूरी नहीं है कि मैदान पर आप स्‍लेजिंग करें. इस मामले में उन्‍होंने टीम इंडिया के पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी की मिसाल रखी. धोनी की तरह साहा भी विरोधी बल्लेबाजों के खिलाफ स्‍लेजिंग पर यकीन नहीं रखते. कोलंबो टेस्‍ट में श्रीलंका के खिलाफ बल्‍लेबाजी और विकेट के पीछे शानदार प्रदर्शन करने वाले साहा ने कहा,‘मैंने कभी एमएस धोनी को स्‍लेजिंग करते नहीं देखा. यह जरूरी नहीं है कि आप स्‍लेजिंग करें . कई बार हम चीजों को तोड़-मरोड़ देते हैं और कह सकते हैं कि पिच खराब थी और आपने खराब शॉट खेला. उतना ठीक है.’

अपने समकालीन विकेटकीपरों की तरह साहा के आदर्श भी ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट हैं. अपने प्रदर्शन से कप्‍तान विराट कोहली की प्रशंसा हासिल करने वाले साहा ने कहा,‘मुझे बचपन से एडम गिलक्रिस्ट पसंद हैं. उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग की शैली भी. मेरी नजर में वह आदर्श विकेटकीपर रहे हैं. मार्क बाउचर और इयान हिली भी अच्छे विकेटकीपर हैं लेकिन गिलक्रिस्ट मेरे पसंदीदा हैं.’

कोलंबो टेस्‍ट में भारतीय टीम की पहली पारी में साहा ने 67 रनों का योगदान दिया. श्रीलंका की दूसरी पारी के दौरान तो विकेट के पीछे उनकी चुस्‍ती-फुर्ती देखते ही बन रही थी. टेस्‍ट के तीसरे दिन उन्‍होंने शतकीय पारी खेलने वाले कुसल मेंडिस का लाजवाब कैच लपका. चौथे दिन भी उन्‍होंने अपने पास आए हर मौके को लपका. चौथे दिन आज साहा ने एंजेलो मैथ्‍यूज का कैच पकड़ा जबकि दिलरुवान परेरा की स्‍टंपिंग की.

साहा ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘मुझे अश्विन और जडेजा के खिलाफ ऐसी पिचों पर विकेटकीपिंग में मजा आता है. अगर काफी गेंदें विकेटकीपर के पास आती हैं तो यह अच्छा है, अन्यथा हमारे पास पूरे दिन में सिर्फ 10 से 12 गेंद आती हैं. अगर आपके पास अधिक गेंद आती हैं तो आप हमेशा अधिक एकाग्र रहते हो.’ उन्होंने कहा, ‘अगर आपको उछाल से सामंजस्य बैठाना है तो आपको थोड़ा पहले खड़ा होना होगा ओर यह अच्छा रहा. यह सामान्य सी बात है. मैं बचपन से यह देख और सीख रहा हूं कि गेंद के उछाल के साथ आपको उठना होगा. लेकिन इस विकेट पर अधिक उछाल था इसलिए मैं थोड़ा बदलाव करते हुए कुछ जल्दी उठ रहा था.’

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