गंगा की अविरलता को लेकर केंद्र और राज्य सरकार सजग

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि गंगा की अविरलता और निर्मलता बनाये रखने के लिए राज्य व केंद्र सरकार सजग हैं और इसके लिए काम भी कर रही हैं. इसको लेकर विशेषज्ञों का सेमिनार आयोजित किया गया और केंद्र सरकार को भी सुझाव दिया गया. गंगा नदी में गाद जमा है, थोड़ी बारिश होने पर भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

सोमवार को वीर कुंवर सिंह पार्क में पेड़ को राखी बांधने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सीवरेज व ड्रेनेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नगर विकास व आवास विभाग को निर्देश दिया गया.

इसमें नाली के पानी का ट्रीटमेंट किया जायेगा और उसके बाद पानी को नदी में नहीं छोड़ा जायेगा, बल्कि इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकार गंगा नदी के किनारे ऑर्गेनिक फॉर्मिंग को बढ़ावा देगी. सिंचाई के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट के पानी का उपयोग किया जायेगा. वर्मी कंपोस्ट का भी उपयोग किया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि लावारिस घूम रहे पशुओं को गोशाला में रखने के लिए पटना के डीएम को निर्देश दिया था. अब पटना साहिब के गोशाला में लावारिस पशुओं को रखा जा रहा है. सरकार इन लावारिस पशुओं की रक्षा करेगी और उनका देखभाल करेगी.

उन्होंने कहा कि पशुओं के गोबर व मूत्र का उपयोग जैविक कृषि में किया जायेगा. जैविक कृषि से उपजाये गये सब्जियों या कोई भी अनाज की कीमत ज्यादा मिलती है. बिहारशरीफ के सोहडीह गांव में जैविक कृषि के माध्यम से उत्पादन किया जाता है.

प्रकृति ने जो दिया उसका सदुपयोग करें, कायम रहेगा संतुलन

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर पूरा ध्यान देना होगा. इसका संरक्षण जरूरी है. जो कुछ प्रकृति ने दिया है, उसका सदुपयोग करें. इससे पर्यावरण में संतुलन कायम रहेगा. आज मौसम का मिजाज बदलता रहता है. कभी कम बारिश होती है, तो कभी भारी बारिश होती है. ठनका तक गिरता है, जिससे जान-माल का नुकसान होता है. वज्रपात होने की जानकारी पहले से चल जाये तो जान-माल के नुकसान को रोका जा सकता है. इस क्षेत्र में भी सरकार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहा करते थे कि लोगों की जरूरतों को पूरा करने में पृथ्वी सक्षम है, लेकिन किसी के लालच को पूरा करने में यह सक्षम नहीं है.

लक्ष्य को करेंगे पूरा : मोदी

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2017 में वन क्षेत्र को 15% करने का लक्ष्य रखा गया था. इसे सरकार ने पूरा कर लिया है. अब अगले पांच सालों में इसे दो प्रतिशत बढ़ा कर 17% तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जिसे हासिल करेंगे. उन्होंने कहा कि इस बार पटना समेत सभी जिलों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. साथ ही पटना की कई संस्थाएं भी पेड़ों को राखी बांध कर त्योहार मना रही हैं.

आने वाले दिनों में यह जन अभियान का रूप लेगा और सभी इसमें भागीदार होंगे. समारोह में बच्चियों व महिलाओं ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को राखी बांधी. इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, पीएचइडी मंत्री विनोद नारायण झा, विधान परिषद के पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, वन व पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, मुख्य वन संरक्षक डीके शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव मनीषकुमार वर्मा व ओएसडी गोपाल सिंह, राज्य खाद्य आयोग के सदस्य नंदकिशोर कुशवाहा सहित अन्य मौजूद थे.

नाली के पानी का होगा ट्रीटमेंट
सिंचाई में किया जायेगा इस्तेमाल
सीएम व िडप्टी सीएम ने पेड़ों को बांधी राखी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2011 से ही रक्षा बंधन के दिन वृक्ष सुरक्षा दिवस मनाया जा रहा है. पेड़ों को राखी बांध कर उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है. मुख्यमंत्री वीर कुंवर सिंह पार्क में आयोजित वृक्ष सुरक्षा दिवस के कार्यक्रम में पेड़ को राखी बांधी और पौधारोपण भी किया. मुख्यमंत्री ने बैट्री संचालित वाहन से वीर कुंवर सिंह पार्क का भ्रमण किया.

पांच साल में वन क्षेत्र बढ़ा कर 17% करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में इस साल के अंत तक 15% वन क्षेत्र के लक्ष्य को हासिल कर लिया जायेगा. अगले पांच साल में प्रदेश में इसे बढ़ा कर 17% करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार अपने संसाधनों से पौधारोपण काम का सर्वेक्षण भी करायेगी. उन्होंने बताया कि झारखंड के बंटवारे के बाद बिहार का वन क्षेत्र 9% से भी कम था. काफी मंथन के बाद इसे अधिकतम 17% तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया. इसी आधार पर वर्ष 2017 के अंत तक हम 15% वन क्षेत्र तक पहुंच जायेंगे.

इसके लिए हरियाली मिशन का शुभारंभ साल 2011 से किया गया. 24 करोड़ पौधा लगाने की प्रक्रिया शुरू की गयी थी अौर सरकार ने इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है. वन व पर्यावरण विभाग ने इस काम में पूरी दिलचस्पी दिखायी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधों की रक्षा के साथ-साथ मनरेगा कार्यक्रम के अंतर्गत पौधारोपण किया गया. बांध पर और सड़कों के किनारे पौधे लगाये गये. किसानों को भी अपने खेत की चारों तरफ पौधा लगाने को कहा गया, इससे उनकी आमदनी भी बढ़ी. शुरू में बिहार में पौधा की कमी थी. आज बिहार में लगाने के लिए पर्याप्त संख्या में पौधे उपलब्ध हैं.

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