स्मृति ईरानी का खुला खत, सोनिया गांधी पर साधा निशाना, पढ़े पूरा लेटर

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नई दिल्ली : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को एक खुला खत लिखकर कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा है. केंद्रीय मंत्री की तरफ से लिखे गए खत में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर संसद के विशेष सत्र में सोनिया गांधी की तरफ से दिए गए बयान की आलोचना की गई है. आपको बता दें कि सोनिया गांधी ने बुधवार को संसद के विशेष सत्र में आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले वीरों को सलाम करने के बाद देश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि इस समय देश में नफरत और विभाजन का दौर चल रहा है.

उन्‍होंने यह भी कहा था कि लोकतांत्रिक मूल्‍य खतरें में पड़ रहे हैं. हमें आजादी की कुर्बानियों को याद रखना होगा और इन्‍हें बचाने के लिए काम करना होगा. सोनिया गांधी के संसद में दिए गए भाषण के जवाब में स्मृति ईरानी ने लिखा- अपेक्षा की जाती है कि भारत छोड़ो आंदोलन जैसी ऐतिहासिक घटना के बारे में हमें सही रूप में अपने विचार रखने चाहिए थे, लेकिन सोनिया गांधी अपने भाषण में 2014 की अपनी सत्ता की हार का अफसोस मनाती दिखीं. यह 2014 में उनकी पार्टी की हार से पहले तक छाए रहे नेहरू वंश के नियंत्रण को खोने की ‘लंबी, दयनीय हताशा’ है.

बुधवार रात किए गए फेसबुक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि सोनिया ने यह साबित किया कि पारिवारिक संबंध अन्य चीजों से ऊपर हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में अपने भाषण में केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या अंधकार की ताकतें लोकतंत्र की जड़ें नष्ट प्रयास कर रही हैं. इस खत में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की भी जमकर तारीफ की. उन्‍होंने लिखा कि पीएम मोदी राष्ट्र की बात करते हैं, जबकि सोनिया गांधी केवल परिवार की बात करती हैं.

पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा करो या मरो की शपथ को अपनाने को कहा है. पीएम ने न सिर्फ सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की बात की बल्कि महिलाओं के योगदान को भी अपने भाषण में सम्मान दिया.

सोनिया गांधी ने कहा था कि जहां आजादी का माहौल था, वहां भय फैल रहा है. कई बार कानून के राज पर भी गैरकानूनी शक्तियां हावी दिखाई देती हैं. भारत छोड़ो आंदोलन एक याद है, जो हमें प्रेरणा देती है कि अगर हमें आजादी को सुरक्षित रखना है, तो हरेक दमनकारी शक्ति के खिलाफ संघर्ष करना होगा, फिर चाहे वह कितनी भी सक्षम क्यों न हो.

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