बिहार में मचा राजनीतिक बवाल, जनता दल अब ‘यूनाइटेड’ नहीं रहा, जुबानी जंग में बढ़ी तल्खी

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पटना : बिहार में महागठबंधन में टूट के बाद अब कई पार्टियों के अंदरखाने की राजनीति अब सतह पर है. यह दो दल हाल में बिहार में बने महागठबंधन में शामिल थे. जदयू और कांग्रेस. दल के अंदर उठे तूफान को सियासी शब्दों के नजरिये से देखें, तो यह शब्द सामने आते हैं. स्टैंड की राजनीति, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, पूर्व का इतिहास, नैतिकता, जनता का हित, सत्ता के लिए सिद्धांत के साथ समझौता, विद्रोह, नाराजगी और निलंबन. सत्ताधारी दल जदयू अब एनडीए के साथ है, लेकिन सियासी हलकों में चल रही चर्चा के मुताबिक, जनता दल यूनाइटेड में से अब ‘यूनाइटेड’ दूर होने लगा है. बिहार की धरती पर, जनता से संवाद के बहाने भ्रमण पर निकले पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव के बयान बगावती तेवर की अलग कहानी बयां कर रहे हैं. शरद यादव बिहार के तूफानी दौरे पर हैं और यूनाइटेड के सिद्धांत को किनारे रखकर घूम-धूम कर लोगों को बता रहे हैं कि कैसे नीतीश कुमार ने बिहार की 11 करोड़ जनता के विश्वास पर कुठाराघात किया है.

शरद यादव ने जब बिहार की धरती पर कदम रखा, तो अपने से ज्यादा उनके लिये गैरों ने नारे लगाये. शरद के समर्थन में पटना एयरपोर्ट पर जुटी भीड़ में शामिल ज्यादातर लोग राजद के थे. राजद कार्यकर्ताओं ने उनका भरपूर स्वागत किया. उसके पहले लालू ने शरद यादव को असली जदयू का संस्थापक मानते हुए, उनके साथ गठबंधन जारी करने का एलान कर दिया था. शरद यादव के भ्रमण का असर पार्टी के अंदरखाने दिखने लगा और जदयू ने अपने राज्यसभा सदस्य अली अनवर अंसारी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलायी गयी विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने की वजह से शुक्रवार रात संसदीय दल से निलंबित कर दिया. पार्टी के प्रवक्ता के सी त्यागी ने बताया कि कांग्रेस नीत संप्रग से जदयू द्वारा अपने रिश्ते खत्म करने के बावजूद विपक्षी दलों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अंसारी को संसदीय दल से निलंबित किया गया है. त्यागी ने सोनिया पर पार्टी के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर अतिक्रमण का प्रयास करने का आरोप भी लगाया. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में 16 विपक्षी दलों ने शुक्रवार को एक बैठक की थी. यह बैठक भाजपा से मुकाबले के लिए वैकल्पिक रणनीति बनाने पर विचार करने के लिए हुई थी.

बयानों में बढ़ी तल्खी

इन सबके बीच जदयू के वरिष्ठ नेताओं के बयानों की बानगी देखिए, जो बदलते वक्त के साथ तल्ख होते जा रहे हैं. शरद यादव जब सोनपुर पहुंचे, तो वहां राजद और उनसे जुड़े समर्थक पहले पहुंचे हुए थे. अति उत्साह में दिख रहे शरद के समर्थक मंच पर ज्यादा संख्या में चढ़ गये. मंच टूट गया. टूटे मंच से ही शरद यादव ने कहा बिहार के जनादेश का अपमान हुआ है. उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास को महज आठ घंटे में पलट दिया. शरद ने कहा कि जनता का विश्वास तोड़ा गया है, मैं सड़क पर लड़ूंगा. शरद यादव ने लोगों को समझाया कि किस तरह जदयू अन-यूनाइटेड हो रहा है. उन्होंने कहा कि एक सरकारी जनता दल है,जिसे नीतीश कुमार चला रहा हैं और मैं जनता दल यूनाइटेड में हूं, जिसके साथ बिहार की जनता है. शरद यादव 17 अगस्त को ‘विरासत बचाओ सम्मेलन’ करने जा रहे हैं. शरद ने जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से ठीक दो दिन पहले इस बैठक को बुलाया है, समझा जा सकता है कि एक तरह विरासत बचाने की बात और दूसरी ओर दल के होते दो टुकड़े. राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त कहते हैं कि यह कोई नयी बात नहीं है, जनता दल के लिए पहले से एक गाना प्रसिद्ध है, जनता दल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गिरा, कोई वहां गिरा.

सियासी सरगर्मी और शरद

बिहार में शरद यादव के भ्रमण के अगले ही दिन मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया कि भारी बारिश और आंधी तूफान की संभावना है. शरद ने प्रतिक्रिया भी दी है, कहा है कि वह इस झूठे अलर्ट की जांच करवायेंगे. यह साजिश है, उनके भ्रमण और कार्यक्रम को असफल करने की, ताकि जनता घरों से बाहर न निकले. अब समझ जाइए, स्थिति कहां तक पहुंच चुकी है. वैसे भी, शरद की यात्रा से जदयू के अंदरखाने तूफान मचा हुआ है. जदयू नेता केसी त्यागी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शरद को 19 तारीख तक संयम बरतना चाहिए और मर्यादा में रहना चाहिए. जदयू प्रवक्ता ने शरद यादव और लालू प्रसाद यादव के बीच समझौते का आरोप लगाया. त्यागी ने बड़ा बयान दिया और कह डाला कि शरद यादव जिस रास्ते पर चले हैं, उस अंधेरी राह में उन्हें लालटेन का साथ मिला हुआ है. इस पर यादव ने कहा कि लालू प्रसाद भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए हैं. तब किन परिस्थितियों में (वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के लिए) उनके साथ गठबंधन किया गया था. यादव ने कहा कि बिहार से शुरु हुई उनकी संवाद यात्रा देश के अन्य हिस्सों में भी जाएगी. जदयू के नेता यादव की यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं और धीरे धीरे उनके स्वर यादव के प्रति कठोर होते जा रहे हैं.

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