गंडक में उफान से गोपालगंज के भी 97 गांव जलमग्न, सीतामढ़ी व पूर्वी चंपारण में सेना ने संभाली कमान

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पटना मुजफ्फरपुर/भागलपुर : उत्तर बिहार और सीमांचल इलाके में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर है. सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण के ढाका, सुगौली व रामगढ़वा में भी राहत व बचाव कार्य में सेना व एनडीआरएफ को लगाया गया है. कई नये इलाकों में पानी फैल गयाहै. 19 अगस्त तक बाढ़ग्रस्त इलाकों में स्कूल बंद दिये गये हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ से अब तक 72 लोगों की मौत हुई है.

इधर गंडक में उफान के कारण गोपालगंज में सारण मुख्य तटबंध पर दबाव बढ़ गया है, जिसे बचाने के लिए जल संसाधन के इंजीनियर जुटे हैं. मधुबनी में महाराजी की रिंग बांध दो सौ मीटर में टूट गया है. मोतिहारी के सुगौली जंक्शन पर पानी लगने के बाद मोतिहारी से सभी ट्रेनें लौट गयीं. बगहा, नरकटियागंज के बाद अब बेतिया भी रेल मार्ग से कट गया है, जिससे बेतिया में सैकड़ों यात्री फंस गये हैं.

गोरखपुर से एक हेलीकाप्टर मंगाया गया है, जो जिले के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री गिरा रहा है. कटिहार रेल मंडल से होकर गुजरने वाले 45 ट्रेनों को रेल प्रशासन ने अगले आदेश तक रद्द कर दिया है. बुधवार को कटिहार-मालदा रेल खंड पर मनिया रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर पानी आ जाने और ट्रैक के नीचे से सतह बह जाने के कारण कटिहार-मालदा रेल रूट को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है. सीएम नीतीश कुमार गुरुवार को गोपालगंज, पूर्व व पश्चिमी चंपारण का हवाई सर्वेक्षण करेंगे.

सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी. इन जिलों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है. दूरसंचार व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है, जबकि बिजली आपूर्ति ठप है. रेल व सड़क संपर्क भंग हो चुका है. सभी जिला मुख्यालयों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग हो गया है. सुपौल जिले के मरौना में कोसी की सहायक तिलयुगा और बिहुल नदी में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी है.

मरौना क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में मंगलवार को डूबने से नौ लोगों की मौत हो गयी. मौत की पुष्टि थानाध्यक्ष अजीत कुमार ने की. अररिया व किशनगंज जिले में दूरसंचार व बिजली आपूर्ति छह दिनों से ठप है. वहां से संपर्क नहीं हो पा रहा है. किशनगंज में अब तक 12 लोगों की मौत हो गयी.

कटिहार जिले में प्रलयंकारी बाढ़ ने भीषण तबाही मचायी है. अब तक जिले में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. बारसोई में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने पांच लोगों को अपने आगोश में ले लिया है. बाढ़ का कहर अभी जारी है.

गोपालगंज में गंडक का जल स्तर बढ़ने से जहां कुचायकोट, सदर प्रखंड, मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर के लगभग 97 गांव बाढ़ से घिर गये हैं, वहीं सलेमपुर छरकी के टूटने से परसौनी के पास सारण मुख्य तटबंध पर दबाव बना हुआ.

सदुवां के समीप स्लूइस गेट के पास स्थानीय लोगों ने पानी के बहाव को लेकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया. हालांकि जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने दावा किया सारण मुख्य तटबंध सुरक्षित है. तटबंध में सदुवां स्लूइस के पास दबाव से बचाने के लिए तेजी से काम हो रहा है. छह-सात घंटे काम कर उसे दुरुस्त कर लिया जायेगा. इसके लिए बाढ़ व सिंचाई के अभियंता प्रमुख सहित अभियंताओं की टीम लगी है. गोपालगंज के डीएम भी पास में कैंप किये हुए हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल में इस बार पांच लाख 35 हजार क्यूसेक पानी गंडक नदी में प्रवाहित हुआ. नेपाल के कंकइ, परमाने व बकरा नदी का जल स्तर बढ़ने से किशनगंज, अररिया प्रभावित हुआ. हालांकि, अब पानी घट रहा है.

वह पानी महानंदा में मिल रहा है. महानंदा में इतना पानी होने का अब तक इतिहास नहीं रहा है. इससे कटिहार प्रभावित हुआ है. लेकिन गंगा का जल स्तर नीचे होने से महानंदा का पानी इसमें आ रहा है. कोसी से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. तटबंध के बीच में बसे गांव प्रभावित हुए हैं. कोसी में एक सप्ताह से लगातार ढाइ लाख क्यूसेक से अधिक पानी रहा, जो पहले कभी नहीं रहा. प्रेस काॅन्फ्रेंस में विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

सीएम आज गोपालगंज, पूर्व व पश्चिमी चंपारण का करेंगे हवाई सर्वेक्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को गोपालगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लेंगे. दिन के 11 बजे मुख्यमंत्री आला अधिकारियों के साथ सबसे पहले गोपालगंज के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वे करेंगे. इसके बाद वहां से पश्चिमी व पूर्वी चंपारण के बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लेंगे. इसके बाद पटना लौट आयेंगे. मुख्यमंत्री बुधवार को मौसम खराब होने के चलते इन जिलों का हवाई दौरा नहीं कर पाये थे.

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