बाढ़ से हाहाकार, 17 जिले प्रभावित, 153 लोगों की मौत, मोतिहारी में भड़के बाढ़ पीड़ित, रोड जाम

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पटना : उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. दरभंगा शहर के कई मुहल्लों में तीन से चार फुट पानी है, वहीं मुजफ्फरपुर शहर के निचले इलाकों में भी पानी प्रवेश कर गया है. सीतामढ़ी, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण में भी स्थिति भयावह है.

उत्तर बिहार की स्थिति

उत्तर बिहार में 24 घंटे के दौरान 34 लोगों की मौत हो गयी. मोतिहारी के बंजरिया में नाव पलट गयी. इसमें चार लोगों को बचा लिया गया, जबकि चार लापता हैं. वहीं सीमांचल के जिलों में पानी कम होने के साथ ही बाढ़ से तबाही का मंजर दिखने लगा है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ से अब तक 153 लोगोें की मौत हो चुकी है. दरभंगा जिले में बाढ़ लगातार विकराल होती जा रही है.

कमला नदी का तटबंध टूटा

शुक्रवार को कमला नदी का तटबंध कर्जापट्टी में टूट गया, जिससे दरभंगा-कमतौल-बसैठा-मधवापुर पथ पर आवागमन ठप हो गया है. इधर अलग-अलग स्थानों पर बाढ़ के पानी में डूबने से डीएम के पेशकार के पुत्र समेत तीन लोगों की मौत हो गयी. वहीं शहर में लगातार बागमती नदी का पानी तेजी से फैल रहा है. इसने तीन दर्जन मुहल्ले जलमग्न हो गये हैं.

मुजफ्फरपुर बूढ़ी गंडक का हाल

मुजफ्फरपुर शहर से सटी बूढ़ी गंडक नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है. इसका पानी बांध से टकराने के बाद नदी में उछाल मारते हुए बांध के भीतर के आसपास के मुहल्लाें में प्रवेश कर रहा है. इससे शहर पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. सिकंदरपुर नाका के पास बने स्लुइस गेट की बगल से रिसाव होने के कारण शुक्रवार की शाम तेजी से पानी सिकंदरपुर में घुसने लगा है. देर शाम तक मिट्टी से भरा बोरा डाल रिसाव को बंद करने की कोशिश जारी थी. वहीं मुहल्ला में घुसे पानी को निगम दो-दो पंर्पिंग सेट लगा निकालने में जुटा गया है.

सीतामढ़ी का हाल

सीतामढ़ी जिले में जहां रून्नीसैदपुर, बेलसंड, डुमरा, बैरगनिया, सुप्पी, बाजपट्टी, पुपरी व रीगा में स्थिति गंभीर बनी हुई है, वहीं सुरसंड, बथनाहा, मेजरगंज, सोनबरसा व परिहार में बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद परेशानी बरकरार है. सीतामढ़ी शहर के कई इलाकों में अब भी तीन से चार फुट पानी बह रहा है. बाढ़ पीड़ितों ने 30 शिक्षकों को बंधक बना लिया. बाढ़ के पानी में आठ लोग बह गये. सात शव बरामद हुए. लखनदेई का उफान जारी है, जबकि बागमती के जल स्तर में कमी आयी है. रून्नीसैदपुर में कुरनिया पुल बह गया.

पश्चिम चंपारण के हालात

पश्चिम चंपारण में गंडक, सिकरहना, पंडई व गंडक की सहायक नदियों के जारी कहर के बीच सिकटा, मैनाटांड, मझौलिया में हालात जस-के-तस है, वहीं गौनाहा, साठी, चनपटिया, नौतन, बैरिया व लौरिया में पानी कम होने के बावजूद समस्या बरकरार है. पानी कम होने के बाद कटाव होने से दहशत है. शुक्रवार को तीन लोगों की मौत हो गयी.

पूर्वी चंपारण की स्थिति

पूर्वी चंपारण जिले में पांच और प्रखंड बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. 27 में 20 प्रखंडों के लिए सिर्फ 137 नावों का परिचालन पीड़ितों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है. इधर शुक्रवार को छठें दिन कुंडवाचैनपुर घोड़ासहन से रक्सौल के लिए ट्रेन परिचालन शुरू किया गया. संभावना है कि शनिवार से मोतिहारी-सुगौली रेलखंड पर बेतिया के लिए ट्रेन का परिचालन शुरू हो जायेगा. वहीं, शुक्रवार की सुबह से मोतिहारी-गोढ़वा-पकड़ीदयाल पथ में पानी दो से तीन फुट बहने के कारण आवागमन बंद कर दिया गया है.

कोसी बराज से पानी डिस्चार्ज

कोसी बराज से डिस्चार्ज घटने के साथ ही नदी का जल स्तर घटने लगा है. हालांकि इसके बाद भी लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है. अररिया-किशनगंज में पानी निकलने के बाद अब तबाही का मंजर दिखने लगा है. कई पुल-पुलिये व पक्के मकान तक ध्वस्त हो गये हैं. सहरसा, सुपौल, मधेपुरा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है. पूर्णिया के एनएच पर हजारों बाढ़पीड़ित शरण लिये हुए हैं. पूर्णिया के अलग-अलग प्रखंडों में बाढ़ के पानी में डूबने से पांच लोगों की मौत हो गयी. चूनापुर एयरबेस से प्रमंडल के सभी चार जिले में सूखा राशन पैकेट की एयर ड्रॉपिंग की जा रही है.

कटिहार में बाढ़ की स्थिति में सुधार नहीं

कटिहार में बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है. शुक्रवार को भी बाढ़ का पानी कई नये इलाके में प्रवेश कर गया है. हालांकि, महानंदा नदी के जल स्तर घटने से पीड़ित इलाके में पानी कम हो रहा है. वहीं, शुक्रवार को फलका, हसनगंज, कोढ़ा, मनिहारी, मनसाही, कटिहार शहरी क्षेत्र के नये इलाके में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से अफरा-तफरी की स्थिति है. कटिहार-पुर्णिया मुख्य पथ पर भसना के पास पानी बह रहा है. राजबाड़ा के पास सड़क संपर्क भंग हो चुका है.

पूर्णिया में स्थिति

पूर्णिया में बाढ़ का पानी लगातार कम हो रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में घरों में अब भी पानी फैला है. जिले की 135 पंचायतों के 732 गांव की 10 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है. सहरसा में भी पानी घटने के बाद भी तटबंध के अंदर की परेशानी अब कम नहीं हुई है. अब कटाव का खतरा मंडराने लगा है.इधर सुरसर नदी के उफनाने से सौरबाजार, सोनवर्षा, पतरघट व बनमा इटहरी में फैले पानी से लोगों को अभी राहत नहीं मिली है. लोग नाव व राहत के लिए सड़क जाम कर रहे हैं.

सुपौल का हाल

सुपौल जिले के सात प्रखंड बाढ़ के कुल 90 गांव बाढ़ से प्रभावित है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है. जिला प्रशासन द्वारा कुल 133 सरकारी तथा 52 निजी नावों के अतिरिक्त दो मोटर वोट का भी परिचालन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कराया जा रहा है.

कटाव शुरू

बाढ़ का पानी घटने के बाद अब कटाव शुरू हो गया है. मरौना के कई गांव कटाव की चपेट में हैं. घोघड़िया पंचयात स्थित वार्ड नंबर 11, 12 व 13 के हरिजन टोला खुखनहा में अब तक 25 परिवारों का घर कोसी की तेज धारा में विलीन हो चुका है. त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित मेला ग्राउंड से सटे चिलौनी नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने से हजारों की आबादी का आवागमन प्रभावित हो गया है.

मधेपुरा का हाल

मधेपुरा में एनएच 107 पर मीरगंज के पास उसी स्थान पर लगातार पानी बह रहा है, जहां 2008 में पानी ने सड़क को भीषण रूप से काट दिया था. उधर आलमनगर और चौसा में कोसी अपना रौद्र रूप दिखा रही है. आलमनगर के रतवारा, सोनामुखी, सुखार घाट, गंगापुर आदि क्षेत्रों की स्थिति गंभीर है. कोसी के कटाव का शिकार हो चुके गांव मुरौत के विस्थापित फिर से विस्थापन के लिए बाध्य हैं. ग्वालपाड़ा के भालुआहि के पास एन एच 106 कट गया. कुमारखंड में सुरसर का पानी कई गांव में पसरा हुआ है.

किशनगंज की कहानी

किशनगंज में महानंदा, कनकई, बूढ़ी कनकई, रतुआ, मेची, डोक के जल स्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ग्रस्त इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. अररिया में भी पानी कमा है. बाढ़ के कारण आवागमन की समस्या पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है. यही कारण है कि बिचौलिये सक्रिय हो गये हैं.

सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी

बाढ़ पूर्व 10 रुपये प्रति किलो बिकने वाला आलू 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. चीनी 45 की जगह 60 रुपये में बिकने लगा है. बाढ़पीड़ितों की संख्या के आगे शिविर नाकाफी हैं.

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