बिहार में दिख रहा बैंकों की हड़ताल का असर, एटीएम भी प्रभावित

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पटना । युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 22 अगस्त को बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर हैं। हड़ताल में वाणिज्यक बैंकों के साथ ही ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक भी शामिल हैं और बैंकों की हड़ताल का असर बिहार में भी दिख रहा है। हड़ताल को लेकर इन बैंकों के एटीएम भी प्रभावित हैं।

हालांकि निजी बैंकों में हड़ताल नहीं है, लेकिन कामकाज और लेन-देन ठप रखने की तैयारी है। एटीएम सेवा को भी बाधित रखने की रणनीति बनाई गई है।

भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष उमाकांत सिंह ने बताया कि नौ सूत्री मांगों के समर्थन में हड़ताल की गई है। बिहार में एसबीआइ की सारी शाखाएं बंद हैं। बिहार में बैंकों की कुल छह हजार 844 शाखाएं और छह हजार 751 एटीएम हैं। देश में इनकी संख्या क्रमश: 90 हजार 437 और एक लाख 40 हजार 935 है। हड़ताल राष्ट्रव्यापी है।

– 6844 बैंक शाखाएं हैं बिहार में, देश में 90437

– 6751 एटीएम हैं बिहार में, देश में 140935

सरकार से शिकायत

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के वरीय उपाध्यक्ष डॉ. कुमार अरविंद ने कहा कि सरकार बैंकिंग उद्योग को ध्वस्त करने पर तुली हुई है।

बैंककर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ एक के बाद एक नियम बनाए जा रहे। पुराने नियमों को भी बेवजह बदला जा रहा है। बिहार प्रोविंसियल बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के सचिव संजय तिवारी ने सरकार पर कर्मचारियों की मांगों को दरकिनार करने का आरोप लगाया।

कहा कि बैंकिंग सुधार के बहाने सरकार जन विरोधी काम कर रही है। वसूली करने के बजाय औद्योगिक घरानों के बड़े ऋण बट्टे खाते में डाले जा रहे। यह आम जनता की गाढ़ी कमाई है, जो बड़े उद्योगपतियों की झोली में पहुंच रही है। मुनाफा कमा रहे सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जा रहा है। क्या यही बैंकिंग सुधार है?

यूनियन की नौ मांगें

1. बैंकों के निजीकरण और विलय पर रोक लगे

2. कॉरपोरेट ऋणों की वसूली हो

3. दोषी ऋण-धारकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर हो

4. बैंक बोर्ड ब्यूरो को खत्म किया जाए

5. अनुकंपा के आधार पर बैंकों में नियुक्ति हो

6. ग्रेच्युटी एक्ट-1972 के तहत ग्रेच्युटी सीमा का समापन हो

7. बैंकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति हो

8. केंद्र के अनुरूप बैंकों में पेशन व्यवस्था लागू हो

9. एनपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए

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