अच्‍छा हुआ राज बब्‍बर की इस फि‍ल्‍म का नाम बदल गया, नहीं तो न जाने कितने तलाक होते

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नई दिल्‍ली : तीन तलाक के मुद्दे पर अगर फि‍ल्‍मों की बात करें तो हमें सबसे पहले 1982 में आई सलमा आगा, राज बब्‍बर और दीपक पाराशर की फि‍ल्‍म निकाह का नाम याद आता है. बीआर चोपड़ा की इस फि‍ल्‍म ने पहली बार इस प्रथा के कारण एक औरत की जिंदगी कैसे प्रभावित होती है इस पर रोशनी डाली थी. लेकिन इस फिल्‍म से जुड़ा एक रोचक पहलू है, जो इसके नाम को लेकर है. दरअसल, अचला नागर की लिखी इस फिल्म का नाम पहले तलाक तलाक तलाक रखा गया था. लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया. उसके पीछे भी एक कहानी है. ये फिल्म बनकर तैयार हो गई. फिल्म प्रदर्शित होती इससे पहले ही बीआर चोपड़ा ने फिल्म के नाम के बारे में अपने एक करीबी दोस्त से जिक्र किया.

जैसे ही उस दोस्‍त ने फिल्म के नाम के बारे सुना तो उसने तुरंत बीआर चोपड़ा से कहा- इस फिल्म का नाम बदलना बहुत जरूरी है. जब चोपड़ा ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्‍होंने कहा, यदि कोई मुस्ल‍िम दर्शक अपने घर फिल्म देखकर पहुंचेगा और पत्नी पूछेगी कौन सी फिल्म देखी तो इस फिल्म का नाम लेते ही उस जोड़े का तलाक हो जाएगा. इस तरह बहुत से कई सारे रिश्ते टूटने का डर है. इतना सुनने के बाद बीआर चोपड़ा ने उसकी सलाह पर अमल करते हुए फिल्म का नाम बदलकर निकाह कर दिया.

एक सवाल से उपजी स्‍टोरी : जब निकाह औरत की मर्जी के बगैर नहीं हो सकता तो तलाक कैसे हो सकता है? यही वह सवाल था, जिसने तीन तलाक जैसे मुद्दे पर भारत की सबसे सुपरहिट फिल्म ‘निकाह’ की कहानी लिखने के लिए लेखिका अचला नागर को मजबूर कर दिया था. खुद अचला नागर कहती हैं कि उन्‍हें इस फि‍ल्‍म का आइडिया आकाशवाणी में अनाउंसमेंट के दौरान अचानक आया था. जिसे उन्‍होंने बाद में बीआर चोपड़ा से शेयर किया. करीब 35 साल पहले बनी इस फिल्म को लेकर तब भी उतने ही विवाद उठे थे, जितने आज इस मुद्दे को लेकर उठ रहे हैं. इसी फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा सलमा आगा ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी. राज बब्बर हीरो थे और दीपक पाराशर सह कलाकार थे. फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे तीन तलाक एक औरत की जिंदगी में तूफान ले आता है. यह फिल्म सुपर डुपर हिट रही थी.

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