लालू ने कहा- बाढ़ के बहाने हवाखोरी करने बिहार आ रहे हैं पीएम मोदी

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पटना । राजद अध्यक्ष लालू यादव ने तंज कसते हुए कहा कि मुझे पता चला है कि पीएम मोदी बाढ़ पीड़ित लोगों को देखने आ रहे हैं। ये सब नौटंकी है, बाढ़ तो बहाना है, बाढ़ का पानी जब उतर गया है तो पीड़ितों को देखने आ रहे हैं। वो बुनियादी बातों को देखने नहीं हवाखोरी के लिए आ रहे हैं।

हर बार बिहार में बाढ़ आती है और पीएम मोदी को इस साल बाढ़ से बेहाल लोगों का हाल जानने अा रहे हैं। इसी साल क्यों याद आयी है बिहार के बाढ़ की? इस बार बांधों की दुर्दशा हुआ है। इस बार बिहार के लोगों का दर्द आज ही समझ में आ रहा है इन लोगों को। केवल अपना स्वार्थ दिखता है।

लालू ने नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग सृजन घोटाले में आकंठ डूबे हुए हैं और नीतीश कुमार अपना पाप छुपाने के लिए जाकर भाजपा के साथ मिल गए। उन्हें डर था कि सृजन घोटाले की पोल खुलेगी तो फंसना ही है और उसके बाद नरेंद्र मोदी तो छोड़ते नहीं इसीलिए जाकर उनसे मिल गए।

नीतीश सृजन घोटाले के साक्ष्य छिपा रहे हैं

लालू ने कहा कि नीतीश सृजन घोटाले के साक्ष्य छिपा रहे हैं। एसआईटी का जिम्मा अपने स्वजातीय और चहेते अधिकारी को सौंपा है। सृजन घोटाले में मुख्यमंत्री मौनी बाबा बन गए है. वो जांच को बाधित करने और लोगों को गुमराह करने के लिए कार्य कर रहे है। मुख्यमंत्री इन सवालों के जवाब दें।

मुख्यमंत्री बतायें कि जब 2013 में आर्थिक अपराध शाखा के संज्ञान में मामला आया। जांच हुई तो उस जांच रिपोर्ट का क्या हुआ? दोषियों पर कार्यवाई करने की बजाय उन्हें प्रोत्साहित क्यों किया गया। सृजन घोटाले के जांच का आदेश देने वाले जिलाधिकारी का आनन-फानन में तबादला क्यों किया गया?

लालू ने पूछे ये सवाल…..

-सीएजी ने अपनी 2008 की रिपोर्ट में सृजन द्वारा की जा रही वितीय अनियमतिता को उजागर किया था फिर भी आपने इस मामले को क्यों दबाया?

-नीतीश कुमार खुद को बचाने के लिए सृजन घोटाले के साक्ष्यों को समाप्त करवा रहे है। उन्होंने पुरे घोटाले की SIT जांच का जिम्मा अपने चेहते स्वजातीय अफसर को सौंपा है. ताकि वो सब सबुत नष्ट कर सकें।

-जांच करने वाला अफसर खुद भागलपुर जिला का SSP रहते हुए “सृजन” के कार्यक्रमों में शरीक होता था। वो क्या निष्पक्ष जांच करेगा?

बाढ़ के नाम पर भी हुआ घोटाला

पूरी बाढ़ त्रासदी में बिहार सरकार का अमानवीय और असंवेदनशील रवैया रहा। लोग मारे जा रहे है। मुख्यमंत्री बाढ़ बचाव की तैयारी करने की बजाय कुर्सी का जोड़-तोड़ और छवि का डेंट-पेंट करने में लगे थे। माना कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है लेकिन सरकार हर वर्ष बाढ़ और कटाव के नाम पर तटबंध निर्माण में हजारों करोड़ खर्च करती है लेकिन उसकी उपयोगिता ज़मीन पर नहीं दिखती।

बाढ़ के नाम पर भी घोटाला हुआ है। सरकार बाढ से मरने वालों के सही आंकड़े जारी नहीं कर रही है। समाचार पत्रों में दिखाया गया कि कैसे पुलिस की निगरानी में लाशो को नदी में फेंका जा रहा है? पीड़ित लोगों के प्रति सरकार का उदासीन रवैया है। सरकार से ज्यादा मदद तो गैर-सरकारी संस्थाये और कार्यकर्तागण लोग कर रहे है। इसमें राजद के कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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