पेशी के लिए पहुंचे डेरा प्रमुख, अंबाला में समर्थकों की पुलिस से झड़प

0
33

जेएनएन, चंडीगढ़। एक गुमनाम पत्र पर लिए गए संज्ञान के करीब 15 साल बाद आज फैसले की घड़ी आ गई। पंचकूला में सीबीआइ की विशेष अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह दोपहर करीब 2.30 बजे फैसला सुना सकते हैैं। डेरा प्रमुख सीबीआइ कोर्ट पंचकूला में पेश होने के लिए शुक्रवार सुबह सिरसा से सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ पंचकूला पहुंचे। शुरू में उनके साथ 800 गाड़ियों का काफिला था। हरियाणा के डीजीपी बीएस संधू ने कहा कि धीरे-धीरे सभी गाड़ियां कम करा दी गई। कोर्ट परिसर में सिर्फ दो-तीन गाड़ियां ही गई। सुरक्षा के मद्देनजर पंचकूला सीबीआइ कोर्ट के पास हाइड्रोलिक क्रेनें भी तैनात की गई हैं। आसपास हेलीकाप्टर और ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही है।

इससे पूर्व राम रहीम का सिरसा से काफिला कुछ ही दूर नरवाला पहुंचा ही था कि नरवाना के नजदीक उनके काफिले की तीन गाड़ियां टकरा गई। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। वहीं, उनका काफिला पहुंचने से पहले अंबाला में सड़क किनारे खड़े डेरा प्रेमी पुलिस से भिड़ गए।

डेरा प्रमुख के काफिले से टकराई कार।

उधर, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की पेशी के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से हरियाणा व पंजाब मुख्यमंत्रियों से की बातचीत की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दोनों राज्यों को सहायता देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

डेरा प्रमुख 9.05 बजे पुलिस और अपने समर्थकों के काफिले के साथ पंचकूला के लिए निकले। डेरे के पीछे के गेट से गाड़ियों का काफिला गांव नेजिया खेड़ा से होते हुए निकला। डेरे के नज़दीक लगते तीन गांवों में भी कर्फ्यू लगा दिया गया था। ये गांव नेजिया खेड़ा, बाजेकां ओर बेगू हैं।

सड़कों पर लेटे डेरा प्रेमी।

सड़क मार्ग पर हर तरफ सिर्फ और सिर्फ डेरामुखी का ही काफिला दिखा। डेरा प्रेमी कई स्थानों पर सड़कों पर लेटे दिखे। राज्य में बस सेवाएं पहले ही बंद कर दी गई थी। राज्य में तरह से अघोषित कर्फ्यू के से हालात बने हुए हैं। डेरामुखी ने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए करीब ढाई सौ किलोमीटर की दूरी तय कर सड़क मार्ग के जरिए ही कोर्ट में पेश होंगे। इस बीच, आइबी ने हिंसक झड़पों की आशंका व्यक्त की है। सिरसा में डेरा प्रेमी महिलाओं के हाथों में डंडे नजर आए।

सिरसा में डंडे हाथ में लिए डेरा प्रेमी महिलाएं।

डेरा प्रमुख ने ट्वीट के जरिए कहा कि वे कोर्ट में पेश होंगे और कोर्ट का सम्मान करते हैैं। उन्होंने डेरा अनुयायियों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि हमें भगवान पर दृढ़ भरोसा है। डेरा प्रमुख की कमर में दर्द है। इस बात की जानकारी उन्होंने अपने ट्वीट में दी है। कोर्ट में पेशी उनकी अपनी जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार उन्हें हवाई मार्ग के जरिए यहां लाने में मदद कर सकती है।

डेरा प्रमुख और उनके समर्थकों के लिए यह फैसला बेहद अहम होगा। इस फैसले पर हरियाणा और पंजाब के साथ-साथ केंद्र सरकार तक की निगाह टिकी हुई है। डेरा मुखी पर फैसले के मद्देनजर कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह से चौकस है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी के साथ निरंतर संपर्क में हैैं।

पूरे प्रदेश में अद्र्ध सैनिक बलों की 50 से अधिक कंपनियों ने मोर्चा संभाल लिया है। सबसे अधिक अद्र्ध सैनिक बल पंचकूला और सिरसा में तैनात हैैं। यहां डेरा समर्थक भी भारी तादाद में आए हुए हैै। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्यपाल को पूरी स्थिति की जानकारी प्रदान कर दी है। सभी मंत्रियों व विधायकों को फील्ड में उतारा जा चुका, जबकि मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी के साथ लगातार बैठकें चल रही हैैं। धारा 144 लागू होने के बावजूद पंचकूला में लाखों अनुयायी सिर्फ इसलिए आए हुए हैैं, ताकि उन्हें एक झलक अपने गुरुजी की मिल जाए। कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए सेना को रिजर्व में रखा गया है।

हरियाणा पुलिस के जवान और होमगार्ड भी ड्यूटी पर जुट गए हैैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पंचकूला के सेक्टर-छह में राज्य स्तरीय दंगा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रदेश के सभी स्कूलों व कालेजों में आज छुट्टी घोषित कर रखी है। राज्य में चंडीगढ़ और पंचकूला आने वाली तमाम बस सेवा भी बंद है। समूचे प्रदेश में अघोषित कफ्र्यू की स्थिति बनी हुई है।

पंचकूला में महिला डेरा प्रेमी की हार्ट अटैक से मौत

पंचकूला में डेरा समर्थक महिला की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतका की पहचान अंग्रेज कौर निवासी गांव संधुआ (जिला फरीदकोट) के रूप में हुई है

हमेशा कानून का सम्मान किया

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने ट्वीट कर कहा कि हमने सदा कानून का सम्मान किया है। हालांकि हमारी बैक में दर्द है, फिर भी कानून की पालना करते हुए हम कोर्ट जरूर जाएंगे। सभी शांति बनाए रखें। हमें भगवान पर दृढ़ भरोसा है।

सीबीआइ कोर्ट त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में

पंचकूला सीबीआइ कोर्ट ने मामले में फैसला करना है। इसके मद्देनजर सीबीआइ कोर्ट को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में लिया गया है। कोर्ट की तरफ बिना जांच के जाने वाले किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के आदेश जारी किए गए हैं।

डेरे को फैसला हक में आने की उम्मीद

डेरा अनुयायिओं को फैसला डेरा प्रमुख के हक में आने की उम्मीद है। यदि फैसला डेरा मुखी के विरुद्ध आता है तो उन्हें सीबीआइ कोर्ट से जेल भेजा जा सकता है। इसके लिए अंबाला सेंट्रल जेल, झज्जर और रोहतक में तैयारी है।

गुमनाम पत्र में लगाए गए थे संगीन आरोप

गुमनाम पत्र के माध्यम से एक साध्वी ने डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम पर यौन शोषण सहित कई अन्य संगीन आरोप लगाए थे। यह पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ-साथ इसकी प्रति पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को भेजी गई थी। पत्र में आरोप लगाए गए थे कि पीडि़ता पंजाब की रहने वाली है और सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में 5 साल से एक साध्वी के रूप में रह रही है।

आरोप लगाया गया कि साध्वियों का शोषण किया जा रहा है। अपनी आपबीती भी बताई गई थी, जिसमें डेरामुखी गुरमीत राम रहीम पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। घटना 1999 की है और पत्र 2001 में लिखा गया। प्राथमिकी 2002 में दर्ज की गई। तब उच्च न्यायालय ने पत्र का संज्ञान लेते हुए सितम्बर 2002 को मामले की सीबीआइ जांच के आदेश दिए थे।

सीबीआइ ने जांच में उक्त तथ्यों को सही पाया और डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह के खिलाफ विशेष अदालत के समक्ष 31 जुलाई 2007 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। डेरा प्रमुख को उक्त मामले में अदालत से जमानत तो मिल गई, परंतु पिछले लंबे समय से मामला पंचकूला की सीबीआई अदालत में चल रहा है। अब 25 अगस्त को इस मामले में सीबीआइ कोर्ट फैसला सुनाएगी।

दोषी होने पर हो सकती है 10 साल तक कैद

डेरा प्रमुख के खिलाफ धारा 376 और 506 के तहत आरोप तय हुए थे। जिसमें अब फैसला आना है। इन आरोपों में यदि डेरा प्रमुख दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कम से कम 7 और अधिकतम 10 साल कैद हो सकती है।

टाइम लाइन
-15 मई 2002 में एक गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को लिखा गया था।
-24 सितंबर 2002 को मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई।
-30 जुलाई 2007 को मामले में सीबीआइ ने आरोप पत्र पेश कर दिया।
-28 फरवरी 2009 को एक दुष्कर्म पीडि़ता ने बयान दर्ज करवाए।
-9 सितंबर 2010 को दूसरी पीडि़ता ने बयान दर्ज करवाए।
-30 जुलाई 2013 प्रमुख जांच अधिकारी सतीश डागर ने बयान दर्ज करवाए।
-2 नवंबर 2014 को डेरा प्रमुख ने बयानों में खुद को शारीरिक तौर पर सेक्स करने के लिए फिट नहीं होना बताया।
-17 अगस्त 2017 को कोर्ट ने 15 साल सुनवाई के बाद फैसले की तिथि सुना दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here